जिस कथा के लिए आप व्रत रखते हैं, सोलह सोमवार, करवा चौथ, सत्यनारायण, संतोषी माता, और अन्य।
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व्रत कथा एवं त्योहारसावन मास की कामिका एकादशी की सम्पूर्ण कथा, अर्थ और व्रत विधि, जो घोर पापों का भी नाश करने वाली मानी जाती है।

व्रत कथा एवं त्योहारआषाढ़ मास की योगिनी एकादशी की सम्पूर्ण कथा, अर्थ और व्रत विधि, जो रोग और कष्टों से मुक्ति देती है।

व्रत कथा एवं त्योहारचैत्र मास की पाप-नाशक पापमोचनी एकादशी की सम्पूर्ण कथा, अर्थ और व्रत विधि।

व्रत कथा एवं त्योहारगंगा सप्तमी माँ गंगा के पुनः पृथ्वी पर प्रकट होने का पर्व है, जिसे उनके प्रतीकात्मक दूसरे अवतरण के रूप में मनाया जाता है, जिसने संपूर्ण मानवता के लिए उनकी पावन धारा को नवजीवन दिया।

व्रत कथा एवं त्योहारबुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का पावन दिन है, जिन्हें सनातन परंपरा में भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

व्रत कथा एवं त्योहारतपस्वी मान्धाता की कथा, जो भालू के आक्रमण में घायल होकर भी इस व्रत के प्रभाव से विष्णु कृपा से बच गए, दर्शाती है कि वरुथिनी एकादशी रक्षा करती है और महान तपस्या के समान पुण्य देती है।

व्रत कथा एवं त्योहारशिकारी क्रूर चित की कथा दर्शाती है कि पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा घोर पापी को भी नर्क से बाहर खींच सकती है।

व्रत कथा एवं त्योहारराजा इंद्रसेन द्वारा अपने दिवंगत पिता के लिए किया गया इंदिरा एकादशी व्रत दर्शाता है कि श्रद्धापूर्ण व्रत पितरों को दुख से मुक्त कर सकता है।

व्रत कथा एवं त्योहारसत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कथा बताती है कि श्रद्धापूर्वक किया गया अजा एकादशी व्रत सबसे भारी पापों से भी मुक्ति दिलाता है।

व्रत कथा एवं त्योहारनवरात्रि का आठवां दिन, मां महागौरी को समर्पित दुर्गा अष्टमी, कन्या पूजन के साथ मनाया जाता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी के जीवंत स्वरूप के रूप में पूजा जाता है, साथ ही संधि पूजा एवं अष्टमी व्रत भी किया जाता है।

व्रत कथा एवं त्योहारभाद्रपद मास में मनाई जाने वाली कजरी तीज, विवाहित एवं अविवाहित महिलाओं द्वारा भगवान शिव के प्रति देवी पार्वती की भक्ति के सम्मान में रखी जाती है, तथा सुखी व समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्रदान करती है।

व्रत कथा एवं त्योहारअमावस्या, प्रत्येक चंद्र मास की अमावस्या रात्रि, तर्पण, दान तथा पूजा के माध्यम से अपने पितरों को स्मरण करने और उनकी शांति तथा परिवार के कल्याण हेतु समर्पित है।
72 भक्तिपूर्ण मार्गदर्शिकाएँ

व्रत कथा एवं त्योहारसावन मास की कामिका एकादशी की सम्पूर्ण कथा, अर्थ और व्रत विधि, जो घोर पापों का भी नाश करने वाली मानी जाती है।

व्रत कथा एवं त्योहारआषाढ़ मास की योगिनी एकादशी की सम्पूर्ण कथा, अर्थ और व्रत विधि, जो रोग और कष्टों से मुक्ति देती है।

व्रत कथा एवं त्योहारचैत्र मास की पाप-नाशक पापमोचनी एकादशी की सम्पूर्ण कथा, अर्थ और व्रत विधि।

व्रत कथा एवं त्योहारगंगा सप्तमी माँ गंगा के पुनः पृथ्वी पर प्रकट होने का पर्व है, जिसे उनके प्रतीकात्मक दूसरे अवतरण के रूप में मनाया जाता है, जिसने संपूर्ण मानवता के लिए उनकी पावन धारा को नवजीवन दिया।

व्रत कथा एवं त्योहारबुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का पावन दिन है, जिन्हें सनातन परंपरा में भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

व्रत कथा एवं त्योहारतपस्वी मान्धाता की कथा, जो भालू के आक्रमण में घायल होकर भी इस व्रत के प्रभाव से विष्णु कृपा से बच गए, दर्शाती है कि वरुथिनी एकादशी रक्षा करती है और महान तपस्या के समान पुण्य देती है।

व्रत कथा एवं त्योहारशिकारी क्रूर चित की कथा दर्शाती है कि पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा घोर पापी को भी नर्क से बाहर खींच सकती है।

व्रत कथा एवं त्योहारराजा इंद्रसेन द्वारा अपने दिवंगत पिता के लिए किया गया इंदिरा एकादशी व्रत दर्शाता है कि श्रद्धापूर्ण व्रत पितरों को दुख से मुक्त कर सकता है।

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व्रत कथा एवं त्योहारनवरात्रि का आठवां दिन, मां महागौरी को समर्पित दुर्गा अष्टमी, कन्या पूजन के साथ मनाया जाता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी के जीवंत स्वरूप के रूप में पूजा जाता है, साथ ही संधि पूजा एवं अष्टमी व्रत भी किया जाता है।

व्रत कथा एवं त्योहारभाद्रपद मास में मनाई जाने वाली कजरी तीज, विवाहित एवं अविवाहित महिलाओं द्वारा भगवान शिव के प्रति देवी पार्वती की भक्ति के सम्मान में रखी जाती है, तथा सुखी व समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्रदान करती है।

व्रत कथा एवं त्योहारअमावस्या, प्रत्येक चंद्र मास की अमावस्या रात्रि, तर्पण, दान तथा पूजा के माध्यम से अपने पितरों को स्मरण करने और उनकी शांति तथा परिवार के कल्याण हेतु समर्पित है।

व्रत कथा एवं त्योहारपूर्णिमा, प्रत्येक चंद्र मास की पूर्ण चंद्रमा की रात्रि, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा, व्रत तथा दान के लिए समर्पित है, जो शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति प्रदान करती है।

व्रत कथा एवं त्योहारसृष्टि के दिव्य शिल्पकार विश्वकर्मा भगवान की कथा तथा कारीगरों एवं श्रमिकों द्वारा मनाई जाने वाली सम्पूर्ण पूजा विधि।

व्रत कथा एवं त्योहारशनि देव के जन्म की कथा और शनि जयंती व्रत की सम्पूर्ण विधि, जिससे उनकी कृपा और कष्टों से राहत प्राप्त होती है।

व्रत कथा एवं त्योहारभगवान कार्तिकेय के जन्म और तारकासुर के विरुद्ध छह दिवसीय युद्ध में विजय की कथा, जो स्कंद षष्ठी व्रत का मूल आधार है।

व्रत कथा एवं त्योहारराजा भगीरथ की अथक तपस्या की गाथा, जिसने अपने पूर्वजों के उद्धार हेतु देवी गंगा को भगवान शिव की जटाओं से होकर पृथ्वी पर उतारा।

व्रत कथा एवं त्योहारशोभन और चंद्रभागा की मार्मिक कथा, जो यह सिखाती है कि दीपावली से पूर्व आने वाले रमा एकादशी व्रत को पूर्ण संकल्प के साथ ही क्यों करना चाहिए।

व्रत कथा एवं त्योहारवैशाख शुक्ल एकादशी की यह कथा बताती है कि भगवान विष्णु का मोहिनी रूप और यह व्रत कैसे बड़े से बड़े पापी को भी पाप-बोझ से मुक्त कर देते हैं।

व्रत कथा एवं त्योहारकार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली की संपूर्ण कथा, जब भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय का उत्सव मनाने देवता स्वयं काशी में उतर आए थे।

व्रत कथा एवं त्योहारनरक चतुर्दशी की संपूर्ण कथा, जब भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर सोलह हजार बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया, छोटी दिवाली के रूप में मनाई जाती है।

व्रत कथा एवं त्योहारचैत्र शुक्ल पक्ष में मनाई जाने वाली कामदा एकादशी ललिता एवं ललित की कथा के लिए प्रसिद्ध है, जिनकी भक्ति ने एक शापित आत्मा को राक्षस रूप से मुक्त किया और हर इच्छा पूर्ण की।

व्रत कथा एवं त्योहारआषाढ़ शुक्ल एकादशी को मनाई जाने वाली देवशयनी एकादशी चातुर्मास के आरंभ का प्रतीक है, जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर चार माह की योगनिद्रा में लीन होते हैं।

व्रत कथा एवं त्योहारमाघ मास की अमावस्या को मनाई जाने वाली मौनी अमावस्या मौन व्रत, पवित्र स्नान और पितृ तर्पण का दिन है, जिसे सहस्र सामान्य व्रतों के समान पुण्यदायी माना गया है।

व्रत कथा एवं त्योहारआषाढ़ पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास और हर उस गुरु के प्रति कृतज्ञता का पर्व है जो शिष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है।

व्रत कथा एवं त्योहारभीमसेन एवं वेदव्यास मुनि की निर्जला एकादशी कथा, कठोर निर्जल व्रत विधि, तथा ज्येष्ठ मास की यह एकादशी वर्षभर की चौबीस एकादशियों के समान पुण्यफल क्यों देती है।

व्रत कथा एवं त्योहारबहेलिये और बेलपत्र की मासिक शिवरात्रि कथा, चार प्रहर पूजा विधि तथा भगवान शिव के इस मासिक रात्रि-व्रत का गहन अर्थ।

व्रत कथा एवं त्योहारराजा हिम के पुत्र की कथा, कुबेर, माँ लक्ष्मी एवं धन्वंतरि पूजन विधि तथा दीपावली पर्व के प्रारंभ का प्रतीक धनतेरस की सम्पूर्ण जानकारी।

व्रत कथा एवं त्योहारसंतान की दीर्घायु और मंगल हेतु माताओं द्वारा रखे जाने वाले सकट चौथ व्रत की सम्पूर्ण कथा, पूजा विधि और चंद्र-अर्घ्य के नियम।

व्रत कथा एवं त्योहारदेवी सरस्वती की उत्पत्ति की कथा और वसंत पंचमी पर उनकी पूजा से विद्या, वाणी व कला में मिलने वाली कृपा का वर्णन।

व्रत कथा एवं त्योहारदेवी पार्वती की 108 जन्मों की तपस्या की कथा, जिसके फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव पति रूप में प्राप्त हुए, जिसे प्रतिवर्ष हरियाली तीज पर सुहागिन व कुंवारी कन्याएं मनाती हैं।

व्रत कथा एवं त्योहारदेव उठनी एकादशी की वह पावन कथा, जिसमें भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं और समस्त मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है।

व्रत कथा एवं त्योहारहनुमान जयंती की संपूर्ण जन्म कथा, व्रत कथा और पूजा विधि, जो भक्ति और शक्ति के परम प्रतीक भगवान हनुमान के प्राकट्य का उत्सव है।

व्रत कथा एवं त्योहारराम नवमी की संपूर्ण व्रत कथा, जन्म कथा और पूजा विधि, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के प्राकट्य का उत्सव है।

व्रत कथा एवं त्योहारमकर संक्रांति की संपूर्ण कथा, आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि, जो सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण के आरंभ का प्रतीक है।

व्रत कथा एवं त्योहाररक्षाबंधन की संपूर्ण कथा, अर्थ और पूजा विधि, जो भाई-बहन को रक्षा और स्नेह के पवित्र धागे में बांधती है।

व्रत कथा एवं त्योहारजानिए माता पार्वती से भगवान गणेश के दिव्य जन्म, गजमुख प्राप्ति और गणेश चतुर्थी की सम्पूर्ण पूजा विधि की पूरी कथा।

व्रत कथा एवं त्योहारजानिए भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा के कारागार में हुए दिव्य जन्म की सम्पूर्ण जन्माष्टमी व्रत कथा, तथा मध्यरात्रि में की जाने वाली सम्पूर्ण पूजा विधि।

व्रत कथा एवं त्योहारपढ़िए होलिका दहन की सम्पूर्ण कथा, भक्त प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति अटूट भक्ति की कहानी, और इस पावन रात्रि पर की जाने वाली पारंपरिक पूजा विधि।

व्रत कथा एवं त्योहारजानिए दीपावली लक्ष्मी पूजा की सम्पूर्ण विधि, माता लक्ष्मी के आगमन की कथा और कैसे इस दीपोत्सव पर अपने घर में सुख-समृद्धि का स्वागत करें।

व्रत कथा एवं त्योहारमहाकाल की प्रचंड कृपा और राहु की गूढ़ ऊर्जा का संयुक्त आह्वान विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करता है। अमावस्या/शनिवार को रखा जाने वाला यह व्रत वैवाहिक सौहार्द्र और समय-सिद्ध विवाह का द्वार खोलता है।
विवाह आशीर्वाद, बाधा-निवारण और सौहार्द्र
व्रत कथा एवं त्योहारमार्गशीर्ष मास के गुरुवारों को रखा जाने वाला महालक्ष्मी व्रत घर में शांति, धन और समृद्धि का प्रबल आह्वान है। राजा भद्रश्रवा, रानी सुरतचंद्रिका और राजकुमारी शांबला की गाथा इस व्रत का मूल है।
धन, समृद्धि, शांति और विनम्रता
व्रत कथा एवं त्योहारसोलह सोमवार व्रत हिन्दू धर्म के सबसे प्रबल व्रतों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि शुद्ध हृदय से यह व्रत करने पर कोई भी कामना — विशेषकर विवाह और स्वास्थ्य-संबंधी — पूर्ण हो सकती है।
विवाह, स्वास्थ्य, संतान और सर्व-मनोकामना सिद्धि
व्रत कथा एवं त्योहारमाँ संतोषी व्रत 16 लगातार शुक्रवारों तक रखा जाता है। स्त्रियाँ पति की कुशलता और पारिवारिक सौहार्द्र के लिए यह व्रत श्रद्धा से करती हैं। सबसे महत्वपूर्ण नियम — इस दिन खट्टी वस्तुओं (नींबू, इमली) का सेवन अथवा स्पर्श नहीं।
पारिवारिक शांति, संतोष और पति की समृद्धि
व्रत कथा एवं त्योहारसत्यनारायण पूजा हिन्दू घरों में पूर्णिमा अथवा गृह-प्रवेश/विवाह जैसे शुभ अवसरों पर किया जाने वाला सबसे सामान्य और पूज्य अनुष्ठान है। यह भगवान विष्णु के “सत्य के स्वरूप” का पूजन है।
गृह-मंगल, पारिवारिक सौहार्द्र और शुभ कार्य-आरंभ
व्रत कथा एवं त्योहारसंकष्टी चतुर्थी प्रत्येक मास की पूर्णिमा के चौथे दिन आती है। “संकष्टी” अर्थात् “संकट से मुक्ति”। भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखते हैं। माना जाता है कि गणेश जी इस व्रत करने वाले भक्तों की समस्त बाधाओं (विघ्न) का हरण करते हैं।
संकट-निवारण, विघ्न-हरण, बुद्धि और संतान-कल्याण
व्रत कथा एवं त्योहारएकादशी को “व्रतों का राजा” कहा गया है। वर्ष की 24 एकादशियों में उत्पन्ना एकादशी विशेष है — यह स्वयं देवी एकादशी के प्राकट्य (उत्पत्ति) का दिन है। यह प्रायः नवंबर या दिसंबर में पड़ती है।
पाप-क्षय, मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति
व्रत कथा एवं त्योहारकरवा चौथ उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध पर्व है, जिसे सुहागिन स्त्रियाँ अपने पतियों की दीर्घायु और सुरक्षा के लिए रखती हैं। रानी वीरावती की पावन गाथा इस व्रत का मूल है।
पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख
व्रत कथा एवं त्योहारहरतालिका तीज सुहागिन स्त्रियाँ वैवाहिक सुख और अविवाहित कन्याएँ उत्तम वर की प्राप्ति हेतु रखती हैं। “हरतालिका” अर्थात् “सखी ने हर लिया” — पार्वती की सखी द्वारा उन्हें अनिच्छित विवाह से बचाने की पावन कथा इसका मूल है।
वैवाहिक सुख, पति की दीर्घायु और उत्तम वर प्राप्ति
व्रत कथा एवं त्योहारअहोई अष्टमी दीपावली से 8 दिन पूर्व मनाई जाती है। माताएँ अपनी संतानों की दीर्घायु और कल्याण हेतु यह कठोर व्रत रखती हैं और संध्या में तारों के दर्शन के पश्चात ही पारण करती हैं।
संतान की दीर्घायु, रक्षा और कल्याण
व्रत कथा एवं त्योहारवट सावित्री ज्येष्ठ मास की अमावस्या अथवा पूर्णिमा को मनाया जाता है। सुहागिन स्त्रियाँ वट (बरगद) वृक्ष के चारों ओर पावन धागा बाँधकर पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। वट वृक्ष त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) का प्रतीक है।
पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और अकाल-मृत्यु से रक्षा
व्रत कथा एवं त्योहारऋषि पंचमी गणेश चतुर्थी के पाँचवें दिन आती है। यह व्रत धन अथवा विवाह की सामान्य कामनाओं के लिए नहीं, बल्कि विशेष रूप से अनजाने में किए गए पाप-कर्मों — परंपरागत रूप से मासिक-शुद्धि संबंधी नियमों — के क्षमायाचन हेतु पालन किया जाता है।
पाप-शुद्धि, मासिक-धर्म दोष निवारण और आत्मा का परिष्कार
व्रत कथा एवं त्योहारप्रदोष व्रत शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की त्रयोदशी को रखा जाता है। प्रदोष अर्थात् गोधूलि समय — इस वेला में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर ब्रह्मांडीय नृत्य (तांडव) करते हैं। इस व्रत से नकारात्मक कर्म कटते और सफलता मिलती है।
कर्म-शुद्धि, सफलता, बाधा-निवारण और संतान-कल्याण
व्रत कथा एवं त्योहारगुरुवार का व्रत देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु को समर्पित है। भक्त पीले वस्त्र धारण कर पीला (नमक-रहित) आहार लेते हैं — विवेक, शिक्षा और धन के लिए यह व्रत विख्यात है।
विवेक, शिक्षा, धन और वैवाहिक सौख्य
व्रत कथा एवं त्योहाररविवार सूर्य देव को समर्पित दिन है। यह व्रत त्वचा-रोगों के निवारण, स्वास्थ्य-प्राप्ति और समाज में मान-सम्मान हेतु रखा जाता है। भक्त सूर्यास्त से पूर्व एक समय — गेहूँ-गुड़ से बना नमक-रहित — भोजन ग्रहण करते हैं।
त्वचा-रोग निवारण, स्वास्थ्य, मान-सम्मान और करियर-स्पष्टता
व्रत कथा एवं त्योहारमंगलवार हनुमान जी का दिन है। यह व्रत बल, साहस, रक्षा और पुत्र-प्राप्ति के इच्छुक भक्तों द्वारा रखा जाता है। हनुमान जी के एक परम भक्त दम्पति और “मंगल” नामक पुत्र की पावन गाथा इस व्रत का मूल है।
बल, साहस, रक्षा, पुत्र-प्राप्ति और गृह-कलह निवारण
व्रत कथा एवं त्योहारबुधवार का व्रत बुध ग्रह की शांति और गणेश जी की कृपा के लिए रखा जाता है। इससे बुद्धि, व्यापार में सफलता और बाधा-निवारण होता है। भक्त हरे वस्त्र धारण कर मूँग-दाल का भोजन लेते हैं।
बुद्धि, व्यापार सफलता, बाधा-निवारण और गृह-शांति
व्रत कथा एवं त्योहारशनि देव न्याय के देवता हैं। भक्त उनसे भयभीत रहते हैं, किंतु वे केवल बुरे कर्मों को ही दंड देते हैं और धैर्य को पुरस्कृत करते हैं। यह व्रत साढ़े साती अथवा शनि दोष के प्रभाव को कम करने हेतु रखा जाता है।
साढ़े साती, शनि दोष और कर्म-शुद्धि
व्रत कथा एवं त्योहारबिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की माताओं द्वारा संतान की सुरक्षा हेतु रखा जाने वाला यह कठोर निर्जल व्रत जीवित-पुत्रिका (जितिया) कहलाता है। चील और सियार की गाथा इसका मूल है।
संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और रक्षा
व्रत कथा एवं त्योहारछठ एक प्रबल पर्व है जहाँ भक्त जल में खड़े होकर उदय और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह परिवार के स्वास्थ्य और दीर्घायु हेतु पालन किया जाता है — राजा प्रियव्रत और छठी मैया की गाथा इसका मूल है।
परिवार का स्वास्थ्य, दीर्घायु और संतान कल्याण
व्रत कथा एवं त्योहारदीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा उस पावन घटना की स्मृति है जब भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया था।
अन्नकूट, प्रकृति-पूजन और पशुधन कल्याण
व्रत कथा एवं त्योहारइस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता। लोग “बासोड़ा” (एक दिन पूर्व बना ठंडा भोजन) ग्रहण करते हैं। यह व्रत परिवार को शीतला अथवा चेचक जैसे ताप-जन्य रोगों से रक्षित रखने हेतु पालन किया जाता है।
चेचक, ताप-रोग निवारण और परिवार का स्वास्थ्य
व्रत कथा एवं त्योहारगणगौर राजस्थान का रंग-बिरंगा पर्व है। “गण” अर्थात् शिव और “गौर” अर्थात् गौरी। स्त्रियाँ यह व्रत अपने पति की दीर्घायु हेतु पालन करती हैं — माँ पार्वती के भक्त-जन-प्रिय आशीर्वादों की गाथा इसका मूल है।
सुहाग की रक्षा, पति की दीर्घायु और वैवाहिक सौख्य
व्रत कथा एवं त्योहारनाग पंचमी पर सर्पों को दूध अर्पित कर पूजा की जाती है। यह श्रावण मास में पड़ती है और माना जाता है कि इससे सर्प-दंश का भय तथा काल सर्प दोष दूर होता है।
सर्प-भय निवारण, काल सर्प दोष और परिवार-वंश रक्षा
व्रत कथा एवं त्योहारभाई दूज भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व है — दीपावली के दूसरे दिन बहनें भाइयों को तिलक कर दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। यमराज और यमुना की पावन गाथा इस पर्व का मूल है।
भाई की दीर्घायु, रक्षा और भाई-बहन का प्रेम
व्रत कथा एवं त्योहारमहाशिवरात्रि “शिव की महान रात्रि” है। इस दिन व्रत रखना भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वाधिक प्रबल मार्ग माना गया है। सुस्वर नामक शिकारी की गाथा इस व्रत का मूल है।
पाप-क्षमा, मोक्ष, पति की दीर्घायु और अविवाहित कन्याओं के लिए उत्तम वर
व्रत कथा एवं त्योहारसोमवती अमावस्या पितृ दोष के शमन और पति की दीर्घायु के लिए अत्यंत प्रबल दिन मानी जाती है। सुहागिन स्त्रियाँ व्रत रखकर पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करती हैं और पावन धागा बाँधती हैं।
पति की दीर्घायु, पितृ दोष निवारण और पारिवारिक मंगल
व्रत कथा एवं त्योहारअक्षय तृतीया अर्थात् “जिसका क्षय न हो” — वह दिन जब किया गया पुण्य, दान और नया आरंभ अक्षय फल देते हैं। सुदामा-कृष्ण प्रसंग और द्रौपदी के अक्षय पात्र की कथा इस पर्व का मूल है।
अक्षय धन, दान, शुभारंभ और समृद्धि
व्रत कथा एवं त्योहारतुलसी विवाह वर्षा ऋतु के समापन और हिन्दू विवाह-ऋतु के आरंभ का प्रतीक है। यह तुलसी-पौधे और शालिग्राम (भगवान विष्णु) के पावन विवाह-अनुष्ठान का पर्व है। वृंदा और जालंधर की कथा इसका मूल है।
गृह-मंगल, कन्यादान-पुण्य और विवाह-ऋतु का आरंभ
व्रत कथा एवं त्योहारगणेश चतुर्थी के दस दिन पश्चात मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। भक्त 14 गाँठों वाला अनंत-सूत्र धारण करते हैं — अनंत की कृपा और अहंकार के त्याग की सीख।
समृद्धि, मान-सम्मान की पुनर्स्थापना और अहंकार का त्याग
व्रत कथा एवं त्योहारनवरात्रि नौ दिनों का महापर्व है जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। व्रत कथा मुख्यतः महिषासुर-मर्दिनी की विजय-गाथा है — भय और अहंकार के राक्षसों पर शक्ति की विजय का प्रतीक।
शक्ति, रक्षा, विजय और आंतरिक शुद्धि
व्रत कथा एवं त्योहारदेवी व्रत कथा शाक्त भक्ति की सबसे हृदयस्पर्शी परंपराओं में से एक है। सम्पूर्ण कथा, विधि और सामग्री — माँ के साथ अटूट संवाद के रूप में निभाया जाने वाला यह व्रत।
शाक्त भक्ति, रक्षा, आंतरिक स्पष्टता और माँ-संवाद