प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





अपने लिए उपयुक्त पैकेज चुनें।




बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री बड़े गणेशजी का मंदिर उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास है, और नगर यहीं पहले शीश नवाता है: महाकाल का दर्शन बड़े गणेश के प्रणाम के बिना आरम्भ नहीं होता। इन्हें बड़े इसलिए कहते हैं कि भारत में इनसे विशाल गणेश प्रतिमा नहीं। कहते हैं गुरु महाराज पंडित नारायण व्यास ने यह स्वरूप स्वप्न में देखा और ढाई वर्ष लगाकर इसे खड़ा किया, पत्थर से नहीं, ईंट, चूना, गुड़ और मैथीदाने से, और उस मिश्रण में अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, काँची, उज्जैन तथा द्वारका, सातों मोक्षपुरियों का जल और माटी मिलाई गई। सात मोक्षपुरियाँ इसी मूर्ति में विराजती हैं। आँगन में आज भी संस्कृत और ज्योतिष सिखाई जाती है, इसीलिए वेद व्यास का दिन गुरु पूर्णिमा यहीं का है।
विघ्नहर्ता यज्ञ और आपका नाम-गोत्र संकल्प बड़े गणेश दरबार में, आषाढ़ पूर्णिमा मुहूर्त पर, वेद व्यास और गणेश के दिन संपन्न होते हैं।
भक्त चाहते हैं कि संकल्प सावधानी से हो, स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और बड़े गणेश के समक्ष स्पष्ट नाम-गोत्र।
ॐ गुरवे नमः। इन्हें बड़े गणेश इसलिए कहते हैं क्योंकि भारत में इनसे विशाल गणेश प्रतिमा नहीं, और यह पत्थर से गढ़ी नहीं गई। ईंट, चूना, गुड़ और सात मोक्षपुरियों का जल मिलाकर यह स्वरूप उठा, और यह महाकाल के द्वार पर विराजते हैं। गुरु पूर्णिमा, 29 जुलाई 2026, जिस दिन व्यास बोले और गणेश ने लिखा, आपका नाम-गोत्र इनके समक्ष रखा जाता है और विघ्नहर्ता यज्ञ आपके बुध को दृढ़ करता है।