दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा उस पावन घटना की स्मृति है जब भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया था।
परिचय
दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला यह पर्व उस पावन अवसर की स्मृति है जब भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन के ग्रामवासियों की वर्षा से रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था।
व्रत कथा
वृंदावन के लोग प्रत्येक वर्ष भगवान इंद्र (वर्षा देवता) को प्रसन्न करने के लिए एक विशाल यज्ञ करते थे। बाल-कृष्ण ने अपने पिता नंद से पूछा — “हम इंद्र की पूजा क्यों करते हैं?” नंद बोले — “क्योंकि वे हमें वर्षा देते हैं।”
कृष्ण ने तर्क प्रस्तुत किया — “जो हमारी गायों को घास देता है, जो हमारी आजीविका के वन देता है — वह तो गोवर्धन पर्वत है। हमें दूर बैठे अभिमानी देव के स्थान पर पर्वत की पूजा करनी चाहिए।”
संमतिपूर्वक ग्रामवासियों ने गोवर्धन पर्वत का पूजन किया। इंद्र इस अपमान से अत्यंत क्रुद्ध हुए। उन्होंने वृंदावन को डुबाने के लिए भयंकर मेघ और प्रलयंकारी वर्षा भेजी।
लोगों की रक्षा हेतु कृष्ण ने सम्पूर्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर छत्र की भाँति उठा लिया। सात दिन और सात रातों तक ग्रामवासी उसके नीचे आश्रय में रहे। कृष्ण की परम शक्ति का साक्षात्कार पाकर इंद्र ने समर्पण कर क्षमा माँगी।
निष्कर्ष
यह पूजा हमें सिखाती है कि प्रकृति (पर्वत/पृथ्वी) का आदर करें और सच्ची भक्ति हर तूफ़ान से हमारी रक्षा कर सकती है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
चरण 1
प्रातः गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति आंगन अथवा पूजा-स्थल पर बनाएँ।
चरण 2
पर्वत की आकृति पर पुष्प, दूर्वा और दीप अर्पित करें तथा 56 अथवा 108 प्रकार के अन्नकूट का भोग लगाएँ।
चरण 3
गोवर्धन और गौ-माता की पूजा करें, सात परिक्रमा करें और कथा का पाठ करें।
चरण 4
प्रसाद का वितरण करें और गौ-सेवा-दान के रूप में अन्न दान करें।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Krishna mantra
Om Kleem Krishnaya Namah
Chant with love and surrender, especially before Krishna katha, aarti, or bhog.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
गोवर्धन पूजा क्यों करें?
यह प्रकृति, पर्वत और गौ-माता के प्रति कृतज्ञता का पर्व है और श्रीकृष्ण की रक्षक कृपा का स्मरण है।
अन्नकूट क्या है?
“अन्न का पर्वत” — विविध प्रकार के पकवानों का समूह जो गोवर्धन को भोग रूप में अर्पित किया जाता है।
यह पर्व कब मनाया जाता है?
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को — दीपावली के ठीक अगले दिन।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







