एकादशी को “व्रतों का राजा” कहा गया है। वर्ष की 24 एकादशियों में उत्पन्ना एकादशी विशेष है — यह स्वयं देवी एकादशी के प्राकट्य (उत्पत्ति) का दिन है। यह प्रायः नवंबर या दिसंबर में पड़ती है।
परिचय
एकादशी को “व्रतों का राजा” कहा गया है। वर्ष की 24 एकादशियों में उत्पन्ना एकादशी विशेष है क्योंकि यह स्वयं देवी एकादशी के प्राकट्य (उत्पत्ति) का दिन है। यह प्रायः मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण एकादशी को — नवंबर या दिसंबर में — पड़ती है।
व्रत कथा
सत्ययुग में मुर नामक एक भीषण असुर था। उसने इंद्र और समस्त देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। निस्सहाय देवता भगवान विष्णु की शरण में गए।
भगवान विष्णु ने मुर और उसकी सेना से हज़ार वर्षों तक युद्ध किया। मुर अत्यंत शक्तिशाली था, अतः विष्णु ने अपनी रणनीति बदलने का निश्चय किया। वे हिमालय की बद्रिकाश्रम नामक गुफा में जाकर विश्राम-निद्रा में चले गए।
मुर ने उनका पीछा किया और उन्हें गुफा में सोते पाया। यह अवसर उसे मिला — उसने सोते हुए भगवान को मारने के लिए अस्त्र उठाया।
अचानक भगवान विष्णु के शरीर से एक सुंदर और शक्तिशाली ऊर्जा देवी के रूप में प्रकट हुई। उन्होंने मुर को ललकारा और बड़े पराक्रम से युद्ध किया। उनकी गर्जना से ही असुर थरथरा उठा और देवी ने उसे उसी क्षण वध कर दिया।
जब भगवान विष्णु जागे, उन्होंने असुर को मृत पाकर आश्चर्य व्यक्त किया। देवी ने उन्हें नमन कर सारी कथा सुनाई। प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें “एकादशी” नाम दिया (क्योंकि वे ग्यारहवें दिन प्रकट हुई थीं)। उन्होंने आशीर्वाद दिया — “जो भी तुम्हारी आराधना कर इस दिन व्रत रखेगा, उसके समस्त पाप कटेंगे और उसे मोक्ष प्राप्त होगा।”
निष्कर्ष
उसी दिन से एकादशी-व्रत की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि यह व्रत पूर्व-जन्मों के पापों को नष्ट करता है और भक्त को वैकुण्ठ (विष्णु लोक) में स्थान प्रदान करता है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
चरण 1
दशमी के दिन रात्रि एक समय का सात्विक भोजन लें और संकल्प लें।
चरण 2
एकादशी को प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।
चरण 3
भगवान विष्णु और देवी एकादशी का पूजन करें — तुलसी-दल, पीले पुष्प और पंचामृत अर्पित करें।
चरण 4
उत्पन्ना एकादशी कथा पढ़ें और विष्णु सहस्रनाम अथवा “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।
चरण 5
रात्रि-जागरण कर भजन-कीर्तन करें; अगले प्रातः द्वादशी को स्नान के पश्चात पारण करें।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Vishnu mantra
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
Chant before katha or aarti while praying for protection, dharma, and peace.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्पन्ना एकादशी कब पड़ती है?
मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण एकादशी को — प्रायः नवंबर-दिसंबर में।
क्या यह निर्जल व्रत है?
परंपरागत रूप से निर्जल श्रेष्ठ है, किंतु स्वास्थ्य अनुसार फलाहार और जल ली जा सकती है।
क्यों इसे विशेष माना गया है?
यह स्वयं देवी एकादशी के प्राकट्य का दिन है — अतः सभी एकादशियों में मूल और अति शुभ।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







