प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





संतान सुख के लिए अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें, अपने परिवार के अनुसार पैकेज चुनें।




बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री विष्णुपद मंदिर, गया को गया परम्परा में सर्वोच्च पिण्ड-दान क्षेत्र माना जाता है, जहाँ विष्णु के चरण-चिह्न विष्णुपद शिला पर अंकित हैं। यहाँ पिण्ड-दान और तर्पण पूरे वंश के पितरों को मुक्ति देने वाले माने जाते हैं।
तिल-पिण्ड तर्पण और तीन-पीढ़ी पिण्ड-दान विष्णुपद शिला पर आपके पितृ नाम-गोत्र में, भौमवती अमावस्या मुहूर्त पर संपन्न होते हैं।
भक्त चाहते हैं कि संकल्प सावधानी से हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और देवता के समक्ष स्पष्ट पितृ नाम-गोत्र।
14 जुलाई 2026 को भौमवती अमावस्या पड़ती है — मंगलवार की अमावस्या, मंगल देव का दिन। श्री विष्णुपद मंदिर, गया में, जो सर्वोच्च पिण्ड-दान क्षेत्र माना जाता है, यह दुर्लभ योग मंगल को ऋण-हर्ता ऋण-निवारक के रूप में पितरों की अमावस्या से जोड़ता है, जिससे एक ही तर्पण सांसारिक कर्ज़ और पितृ-ऋण दोनों उतार सकता है। भक्त अपने पितृ नाम-गोत्र पर पिण्ड-दान और तिल-तर्पण हेतु विष्णुपद शिला के समक्ष एकत्र होते हैं।