प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





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बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा क्षेत्र, पुरी विष्णु के चार धाम की पावन भूमि है, जहाँ भगवान जगन्नाथ, कृष्ण का दारु-ब्रह्म स्वरूप, बलभद्र और सुभद्रा सहित पूजित हैं। गुंडिचा मंदिर में नौ दिन के बाद देवता नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों पर बड़ा डंडा से घर लौटते हैं, बहुड़ा यात्रा पर, वह वापसी जो महान यात्रा को पूर्ण करती है।
बहुड़ा गृह-वापसी संकल्प पुरी जगन्नाथ दरबार में आपके नाम-गोत्र में, आषाढ़ शुक्ल दशमी मुहूर्त पर संपन्न होता है जब प्रभु रथ पर घर लौटते हैं।
भक्त चाहते हैं कि संकल्प सावधानी से हो, स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और भगवान जगन्नाथ के समक्ष स्पष्ट नाम-गोत्र।
बहुड़ा रथ यात्रा, आषाढ़ शुक्ल दशमी, 24 जुलाई 2026 पर भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर से नंदीघोष रथ पर अपने पुरी गर्भगृह लौटते हैं, और निलाद्रि बिजे पर मंदिर द्वार पर देवी लक्ष्मी से प्रेमपूर्वक सुलह करते हैं। यह वर्ष में उनका खुले रथ का अंतिम दर्शन है, इसलिए इस वर्ष में एक बार आती गृह-वापसी पर आपका नाम-गोत्र लौटते रथ तक बहुड़ा गृह-वापसी संकल्प में पहुँचाया जाता है।