गणगौर राजस्थान का रंग-बिरंगा पर्व है। “गण” अर्थात् शिव और “गौर” अर्थात् गौरी। स्त्रियाँ यह व्रत अपने पति की दीर्घायु हेतु पालन करती हैं — माँ पार्वती के भक्त-जन-प्रिय आशीर्वादों की गाथा इसका मूल है।
परिचय
गणगौर राजस्थान का रंग-बिरंगा पर्व है। “गण” अर्थात् शिव और “गौर” अर्थात् गौरी। यह व्रत स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु हेतु पालन करती हैं।
व्रत कथा
एक बार भगवान शिव और माँ पार्वती भ्रमण पर निकले। वे एक गाँव पहुँचे। गाँव की निर्धन स्त्रियाँ शीघ्र ही उनके स्वागत के लिए जल और वन-फलों की साधारण भेंट लेकर दौड़ी चली आईं। पार्वती उनकी तात्कालिक भक्ति से प्रसन्न हुईं। उन्होंने उन पर “सुहाग-रस” (आशीर्वादित जल) की वर्षा की — शाश्वत वैवाहिक सौख्य का वरदान।
कुछ समय पश्चात नगर की धनी स्त्रियाँ रजत-थाल में विशेष मिष्ठान्न लेकर पहुँचीं। शिव ने पार्वती से पूछा — “तुमने तो सम्पूर्ण आशीर्वाद निर्धन स्त्रियों पर बरसा दिया। इन समृद्ध स्त्रियों को क्या दोगी?”
पार्वती मुस्कुराईं और अपनी अंगुली को हल्के से क्षति-ग्रस्त कर अपने रक्त से धनी स्त्रियों का अभिषेक किया। उन्होंने समझाया — “निर्धन स्त्रियों ने पहले अपनी भक्ति दी, अतः उन्हें स्थिरता का आशीर्वाद मिला। इन स्त्रियों को भी वरदान मिलेगा — वे अपने पतियों के साथ ऐश्वर्य का सुख भोगेंगी।”
निष्कर्ष
यह कथा उजागर करती है कि माँ को सादगी-पूर्ण और शीघ्र भक्ति सर्वाधिक प्रिय है — किंतु जो भी शरण में आता है, उसे वे आशीर्वाद अवश्य देती हैं।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
चरण 1
होली के अगले दिन से 18 दिनों तक ईसर (शिव) और गणगौर (पार्वती) की मिट्टी-मूर्तियाँ सजाएँ।
चरण 2
प्रतिदिन ताज़े पुष्प, हल्दी, सिंदूर और मेंहदी अर्पित करें।
चरण 3
विशेष दिन पर सुहाग-सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर) पूजा-स्थल पर चढ़ाएँ।
चरण 4
कन्याएँ और सुहागिनें समूह में गणगौर-गीत गाती हुई प्रतिमा को जल-स्थल तक ले जाकर विसर्जन करती हैं।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Ganga mantra
Om Gange Namah
Chant while praying for purity, forgiveness, and inner cleansing.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
गणगौर व्रत कौन रखता है?
राजस्थान और उत्तर भारत की सुहागिन स्त्रियाँ तथा विवाह-इच्छुक कन्याएँ यह व्रत रखती हैं।
यह व्रत कितने दिनों का होता है?
होली के अगले दिन से आरंभ होकर 16 से 18 दिनों तक चलता है; अंतिम दिन गणगौर विसर्जन होता है।
क्या अविवाहित कन्याएँ भी यह व्रत कर सकती हैं?
हाँ, उत्तम वर की प्राप्ति हेतु कन्याएँ भी श्रद्धा से गणगौर व्रत रखती हैं।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







