छठ एक प्रबल पर्व है जहाँ भक्त जल में खड़े होकर उदय और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह परिवार के स्वास्थ्य और दीर्घायु हेतु पालन किया जाता है — राजा प्रियव्रत और छठी मैया की गाथा इसका मूल है।
परिचय
छठ एक महान पर्व है जिसमें भक्त जल में खड़े होकर अस्त होते और उदय होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह व्रत परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और दीर्घायु हेतु पालन किया जाता है।
व्रत कथा
राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी सन्तान-विहीन थे और अत्यंत दुःखी रहते। महर्षि कश्यप ने उनके लिए एक यज्ञ किया और रानी गर्भवती हुई। किंतु जन्म के समय संतान मृत उत्पन्न हुई।
असह्य वेदना में राजा श्मशान गए और स्वयं का जीवन त्याग देने को उद्यत हुए। उसी क्षण आकाश से एक दिव्य रथ में एक देवी प्रकट हुईं। वे बोलीं — “मैं ब्रह्मा की मानस-पुत्री षष्ठी देवी (छठी मैया) हूँ। मैं सब बालकों की रक्षा करती हूँ और निःसंतानों को संतान का आशीर्वाद देती हूँ।”
उन्होंने राजा को अपनी आराधना का निर्देश दिया। राजा लौटे और कार्तिक मास की षष्ठी को पूर्ण शुद्धता से छठ व्रत किया। फलस्वरूप उन्हें एक स्वस्थ और सुंदर पुत्र प्राप्त हुआ।
निष्कर्ष
तब से छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को संतान व स्वास्थ्य के आशीर्वाद के लिए धन्यवाद स्वरूप मनाई जाती है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
नहाय-खाय
प्रथम दिन व्रती स्नान कर सात्विक शाकाहारी भोजन (चना दाल, कद्दू) ग्रहण करते हैं।
खरना
द्वितीय दिन व्रती दिनभर निर्जल रहते हैं; संध्या में गुड़ की खीर और रोटी से व्रत की आधिकारिक शुरुआत होती है।
संध्या अर्घ्य
तृतीय दिन अस्त होते सूर्य को बाँस के सूप में ठेकुआ, फल और दीप रखकर जल में खड़े होकर अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
उषा अर्घ्य
चतुर्थ दिन उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होता है।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Surya mantra
Om Ghrinih Suryaya Namah
Chant at sunrise or during Surya arghya for energy, clarity, and discipline.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
छठ पूजा कब मनाई जाती है?
कार्तिक शुक्ल षष्ठी के समय — दीपावली के लगभग 6 दिन पश्चात; यह चार-दिवसीय पर्व है।
छठी मैया कौन हैं?
वे ब्रह्मा की मानस-पुत्री षष्ठी देवी हैं — जिन्हें बालकों की रक्षक और संतान-दायिनी देवी माना गया है।
क्या यह व्रत केवल स्त्रियाँ ही रखती हैं?
नहीं, यह व्रत पुरुष और स्त्रियाँ दोनों रख सकते हैं — परिवार के स्वास्थ्य की कामना से।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







