नवरात्रि नौ दिनों का महापर्व है जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। व्रत कथा मुख्यतः महिषासुर-मर्दिनी की विजय-गाथा है — भय और अहंकार के राक्षसों पर शक्ति की विजय का प्रतीक।
परिचय
नवरात्रि नौ दिनों का महापर्व है जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। व्रत कथा मुख्यतः यह पावन गाथा है कि माँ ने किस प्रकार महिषासुर राक्षस का संहार किया।
व्रत कथा
महिषासुर नामक असुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया। उसे वरदान प्राप्त हुआ कि कोई पुरुष अथवा देव उसे नहीं मार सकेगा। शक्ति के अहंकार में उसने इंद्र को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।
सामर्थ्य-हीन देवताओं ने त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की शरण ली। त्रिदेवों के संयुक्त क्रोध से एक दिव्य तेज उत्पन्न हुआ, जिसने माँ दुर्गा का रूप धारण किया। प्रत्येक देव ने अपना अस्त्र माँ को अर्पित किया — शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, और हिमालय ने सिंह।
माँ ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। नौ दिनों तक युद्ध चला। महिषासुर कई बार रूप बदलता रहा — भैंसे से सिंह, सिंह से हाथी। अंततः दशवें दिन (विजयादशमी) भैंसे के रूप में परिवर्तन करते समय माँ ने उसे दबाकर उसका शिरच्छेद कर दिया।
निष्कर्ष
देवताओं ने माँ की “महिषासुर-मर्दिनी” के रूप में स्तुति की। इस कथा का पाठ अपने भीतर के भय और अहंकार के राक्षसों पर विजय पाने की शक्ति (शक्ति) प्रदान करता है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
प्रतिपदा
कलश और जवारे की स्थापना; माँ शैलपुत्री का आह्वान।
द्वितीया से अष्टमी
प्रतिदिन एक स्वरूप की आराधना — ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी।
अष्टमी/नवमी
कन्या पूजन (9 कन्याओं और एक बालक का पूजन, भोजन और दक्षिणा)।
विजयादशमी
विजय मुहूर्त में शस्त्र-पूजा, जवारे विसर्जन और व्रत का पारण।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Devi mantra
Om Dum Durgaye Namah
Chant 11, 21, or 108 times according to your time and capacity.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि में व्रत कैसे रखें?
दिन में एक समय सात्विक फलाहार (व्रत-अनुकूल आटा, फल, दूध) ग्रहण करें; कठोर व्रत में निर्जल भी संभव।
कन्या पूजन कब करें?
अष्टमी अथवा नवमी को 9 कन्याओं और एक लंगूर (बालक) का पूजन किया जाता है।
नवरात्रि कितनी बार आती है?
वर्ष में चार नवरात्रियाँ होती हैं — मुख्य रूप से चैत्र और शारदीय, तथा गुप्त रूप से आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रियाँ।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







