हरतालिका तीज सुहागिन स्त्रियाँ वैवाहिक सुख और अविवाहित कन्याएँ उत्तम वर की प्राप्ति हेतु रखती हैं। “हरतालिका” अर्थात् “सखी ने हर लिया” — पार्वती की सखी द्वारा उन्हें अनिच्छित विवाह से बचाने की पावन कथा इसका मूल है।
परिचय
हरतालिका तीज सुहागिन स्त्रियाँ वैवाहिक सुख और अविवाहित कन्याएँ उत्तम वर की प्राप्ति हेतु रखती हैं। “हरतालिका” दो शब्दों से मिलकर बना है — “हरत्” (हरण) और “आलिका” (सखी)। यह उस समय का संकेत है जब माँ पार्वती की सखी उन्हें अनिच्छित विवाह से बचाने वन में ले गई थी।
व्रत कथा
माँ पार्वती (शैलपुत्री) हिमवान की पुत्री थीं। बाल्यकाल से ही उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में स्वीकार कर लिया था और उनकी प्राप्ति हेतु वर्षों तक कठोर तपस्या की।
किंतु उनके पिता ने उनका विवाह भगवान विष्णु से निश्चित कर दिया। पार्वती अत्यंत व्यथित हुईं क्योंकि उन्होंने मन से शिव को ही पति स्वीकार कर लिया था। उन्होंने अपनी अंतरंग सखी से सारा हाल कहा।
सखी ने सहायता का निश्चय किया। उसने पार्वती को “हरण” कर गहन वन में नदी किनारे ले गई, जहाँ पिता तक पहुँच न सकें। वहाँ पार्वती ने बालू से शिवलिंग बनाया और बिना अन्न-जल के कठोर तप आरंभ किया।
उनकी भक्ति ने भगवान शिव के आसन को हिला दिया। उनके अटूट प्रेम और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
बाद में पार्वती के पिता ने उन्हें खोज लिया। पार्वती ने कहा कि वे तभी लौटेंगी जब विवाह शिव से होगा। पिता ने उनके संकल्प के आगे समर्पण कर दिया।
निष्कर्ष
जो स्त्रियाँ यह निर्जल व्रत रखकर इस कथा को सुनती हैं, उन्हें शिव-पार्वती जैसा सुखद वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
चरण 1
प्रातः स्नान कर सुहाग-वस्त्र (लाल/हरी साड़ी, चूड़ियाँ, मेहंदी, सिंदूर) धारण करें।
चरण 2
रेत अथवा मिट्टी से शिव, पार्वती और गणेश की मूर्तियाँ बनाकर पूजा-स्थल पर स्थापित करें।
चरण 3
बेल-पत्र, धतूरा, पुष्प और सुहाग-सामग्री अर्पित करें।
चरण 4
हरतालिका तीज कथा पढ़ें अथवा सुनें और “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
चरण 5
रातभर निर्जल जागरण कर भजन-कीर्तन करें और प्रातः पारण करें।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Shiva mantra
Om Namah Shivaya
Chant with a quiet mind, especially on Monday, Pradosh, or during Shiva puja.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
यह व्रत कौन रखता है?
सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु और अविवाहित कन्याएँ उत्तम वर की प्राप्ति हेतु यह व्रत रखती हैं।
क्या यह निर्जल व्रत अनिवार्य है?
परंपरागत रूप से यह निर्जल और निराहार व्रत है। स्वास्थ्य अनुसार छूट ली जा सकती है।
पारण कब किया जाए?
रातभर जागरण के बाद चतुर्थी के प्रातः पूजा कर व्रत का पारण किया जाता है।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







