बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की माताओं द्वारा संतान की सुरक्षा हेतु रखा जाने वाला यह कठोर निर्जल व्रत जीवित-पुत्रिका (जितिया) कहलाता है। चील और सियार की गाथा इसका मूल है।
परिचय
जीवित-पुत्रिका (जितिया) एक कठोर निर्जल व्रत है जो बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की माताएँ अपनी संतान की सुरक्षा हेतु रखती हैं।
व्रत कथा
नर्मदा नदी के तट पर एक चीलनी (मादा चील) और एक सियारिन (मादा सियार) रहती थीं। वे परस्पर सखी थीं। कुछ स्त्रियों को जितिया व्रत करते देख उन्होंने भी यह व्रत रखने का निश्चय किया।
उस रात सियारिन को अत्यंत भूख लगी। वह स्वयं पर नियंत्रण न रख सकी और गुप्त रूप से भोजन खाकर अपना व्रत भंग कर दिया। किंतु चीलनी अडिग रही और बिना जल के व्रत पूर्ण किया।
अगले जन्म में दोनों मानव-रूप में बहनें बनीं। चीलनी वाली बहन (जो अब रानी थी) के अनेक स्वस्थ पुत्र हुए। सियारिन वाली बहन (जो अब एक मंत्री की पत्नी थी) के भी पुत्र हुए, किंतु वे सभी बाल्यावस्था में ही काल-कवलित हो गए।
ईर्ष्या-वश सियारिन वाली बहन ने रानी के पुत्रों को श्राप देने का प्रयास किया, किंतु पूर्व जन्म के जितिया व्रत के पुण्य से रानी के पुत्र सुरक्षित रहे। अंततः रानी ने अपनी बहन को उनके पशु-रूप के जीवन और व्रत-भंग की याद दिलाई। बहन ने पश्चात्ताप किया और विधिवत व्रत रखना आरंभ किया।
निष्कर्ष
यह कथा उजागर करती है कि माँ का अनुशासित व्रत संतान के जीवन के लिए एक रक्षा-कवच के रूप में काम करता है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
नहाय-खाय
प्रथम दिन स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करें — प्रायः मंड-भात और नोनी साग।
खुर-जितिया
द्वितीय दिन पूर्ण निर्जल व्रत आरंभ करें और जीमूतवाहन की पूजा करें।
चरण 3
कुश की आकृति (चील-सियार) बनाकर धूप, पुष्प और प्रसाद अर्पित करें।
चरण 4
जितिया कथा पढ़ें अथवा सुनें और संतान की कुशलता की प्रार्थना करें।
पारण
तृतीय दिन स्नान कर व्रत का विधिवत पारण करें।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Vishnu mantra
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
Chant before katha or aarti while praying for protection, dharma, and peace.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
जितिया व्रत कौन रख सकता है?
माताएँ अपनी संतानों की दीर्घायु हेतु यह व्रत रखती हैं।
व्रत कितने दिनों का होता है?
तीन दिनों का क्रम — नहाय-खाय, खुर-जितिया (निर्जल व्रत) और पारण।
क्या बीमार स्त्रियाँ यह व्रत रख सकती हैं?
स्वास्थ्य अनुसार चिकित्सकीय सलाह से व्रत रखें; सच्ची श्रद्धा ही मुख्य है।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







