शनि देव न्याय के देवता हैं। भक्त उनसे भयभीत रहते हैं, किंतु वे केवल बुरे कर्मों को ही दंड देते हैं और धैर्य को पुरस्कृत करते हैं। यह व्रत साढ़े साती अथवा शनि दोष के प्रभाव को कम करने हेतु रखा जाता है।
परिचय
शनि देव न्याय के देवता हैं। भक्त उनसे भयभीत रहते हैं, किंतु वे केवल बुरे कर्मों को ही दंड देते हैं और धैर्य को पुरस्कृत करते हैं। यह व्रत साढ़े साती अथवा शनि दोष के प्रभाव को कम करने हेतु रखा जाता है।
व्रत कथा
एक बार नवग्रह (नौ ग्रह) इस पर विवाद करने लगे कि कौन सबसे महान है। निर्णय के लिए राजा विक्रमादित्य को चुना गया। उन्होंने कूटनीति से दूसरे ग्रहों को ऊँचे आसन दिए, किंतु शनि देव को सबसे नीचा आसन देकर उन्हें “क्रूर” कह दिया।
शनि देव अपमानित हुए और उन्होंने राजा को पाठ पढ़ाने का संकल्प लिया। जब राजा की साढ़े साती (शनि के साढ़े सात वर्ष) आरंभ हुई, उन पर दुर्भाग्य टूट पड़ा। राजा पड़ोसी राज्य में पहुँचे, जहाँ हार की चोरी का झूठा आरोप उन पर लगा। वहाँ के शासक ने राजा के हाथ-पैर कटवा देने का आदेश दिया।
अपंग राजा को एक तेली के यहाँ काम पर लगाया गया। कष्ट सहते हुए भी वे धैर्य-पूर्वक रहे। एक रात उन्होंने दीपक राग इतना अद्भुत गाया कि नगर के दीपक स्वयं प्रज्वलित हो उठे।
शनि देव उनके धैर्य और कर्म-स्वीकार से प्रसन्न हुए। उन्होंने राजा के अंग और राज्य पुनर्स्थापित किए। राजा ने घोषणा की — “शनि देव सर्व-शक्तिमान हैं और सम्मान के पात्र हैं।”
निष्कर्ष
शनिवार को सरसों के तेल और काले तिल से शनि देव की आराधना अकस्मात आने वाले दुर्भाग्यों से रक्षा करती है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
चरण 1
प्रातः स्नान कर काले अथवा नीले वस्त्र धारण करें।
चरण 2
शनि देव की प्रतिमा अथवा पीपल वृक्ष के मूल में सरसों का तेल अर्पित करें।
चरण 3
काले तिल, उड़द और नीले पुष्प चढ़ाएँ।
चरण 4
“ॐ शं शनैश्चराय नमः” अथवा “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः” का 108 बार जप करें।
चरण 5
संध्या में एक समय उड़द-खिचड़ी अथवा नमक-रहित सात्विक भोजन लें।
चरण 6
किसी निर्धन व्यक्ति अथवा मज़दूर को काले वस्त्र, उड़द अथवा अन्न-दान करें।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Shani mantra
Om Sham Shanaishcharaya Namah
Chant on Saturday with patience, honesty, and a commitment to right action.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
शनि व्रत कौन रखे?
साढ़े साती, ढैय्या अथवा कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव से पीड़ित कोई भी भक्त यह व्रत रख सकते हैं।
कितने शनिवार व्रत रखें?
कम-से-कम 7, 11, 21 अथवा 40 शनिवारों का संकल्प लिया जाता है।
क्या सरसों के तेल से अभिषेक सुरक्षित है?
हाँ, यह परंपरागत और सुरक्षित उपाय है — मंदिर में अथवा घर पर शनि प्रतिमा पर थोड़ा तेल अर्पित करें।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







