महाशिवरात्रि “शिव की महान रात्रि” है। इस दिन व्रत रखना भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वाधिक प्रबल मार्ग माना गया है। सुस्वर नामक शिकारी की गाथा इस व्रत का मूल है।
परिचय
महाशिवरात्रि “शिव की महान रात्रि” है। इस दिन व्रत रखना भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वाधिक प्रबल मार्ग माना गया है।
व्रत कथा
सुस्वर नामक एक शिकारी शिकार के लिए वन में गया, किंतु उसे कोई शिकार नहीं मिला। रात्रि हो गई और वन्य-पशुओं के भय से वह एक बिल्व-वृक्ष पर चढ़ गया।
जागते रहने के लिए वह बिल्व के पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा। उसे पता नहीं था कि वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। सभी पत्ते सीधे शिवलिंग पर गिरते रहे। उसके पात्र का जल भी रिस-रिस कर शिवलिंग का अभिषेक करता रहा। वह पूरे दिन भूखा था, अतः अनजाने में ही व्रत भी कर रहा था।
रात्रि में चार हरिणियाँ वृक्ष के समीप आईं। शिकारी ने बाण साधा, किंतु प्रत्येक हरिणी ने दया की भीख माँगी — अपने परिवार से अंतिम विदा लेकर लौटने का वचन दिया। हरिणियों की ईमानदारी से द्रवित होकर शिकारी ने उन्हें जाने दिया।
प्रातः तक उसने अनजाने ही एक पूर्ण रात्रि-पूजा (अभिषेक और बिल्व-पत्र अर्पण) व्रत सहित पूर्ण कर ली थी। भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने शिकारी को साक्षात दर्शन दिए, उसके समस्त पापों को क्षमा किया और उसे मोक्ष प्रदान किया।
निष्कर्ष
यह कथा सिखाती है कि महाशिवरात्रि को अनजाने में की गई शिव-आराधना भी विशाल पुण्य देती है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
पूजा विधि
यह पूजा कैसे करें
चरण 1
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिव का ध्यान करें।
चरण 2
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी और पंचामृत से अभिषेक करें।
चरण 3
बिल्व-पत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित करें।
चरण 4
रात्रि में चार पहरों में “ॐ नमः शिवाय” का निरंतर जप करें।
चरण 5
अगले प्रातः (चतुर्दशी समाप्ति पर) स्नान कर पारण करें।
सामग्री
व्रत के लिए सामग्री
मंत्र
Shiva mantra
Om Namah Shivaya
Chant with a quiet mind, especially on Monday, Pradosh, or during Shiva puja.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
सावधानी
इन भूलों से बचें
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
महाशिवरात्रि कब मनाई जाती है?
फाल्गुन (अथवा माघ) मास की कृष्ण चतुर्दशी को — फरवरी/मार्च में।
क्या यह निर्जल व्रत है?
परंपरागत रूप से निर्जल व्रत श्रेष्ठ है; स्वास्थ्य अनुसार फल और दूध ग्रहण की जा सकती है।
रात्रि-जागरण क्यों?
माना जाता है कि महाशिवरात्रि की रात शिव-पार्वती का पावन विवाह हुआ था; रात्रि-जागरण से शिव अति प्रसन्न होते हैं।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







