प्रातः और सायं की आरतियाँ, पूर्ण पाठ, लिप्यांतर और पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ।
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आरतीराम दरबार आरती का सम्पूर्ण पाठ देवनागरी में, उसका अर्थ और घर पर आरती करने की विधि।

आरतीपंचमुखी हनुमान के पंच-मुखी रक्षक स्वरूप की आराधना हेतु सम्पूर्ण पारंपरिक हनुमान आरती, अर्थ व विधि सहित।

आरतीभगवान शिव के बाल-स्वरूप बटुक भैरव की साहस, रक्षा व विघ्न-निवारण हेतु सम्पूर्ण आरती।

आरतीदेवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव की धन-समृद्धि व आर्थिक स्थिरता हेतु सम्पूर्ण आरती।

आरतीसूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — नवग्रहों की शांति और कृपा हेतु सम्पूर्ण नवग्रह आरती।

स्तोत्र एवं पाठवेदमाता गायत्री की महिमा वर्णित सम्पूर्ण गायत्री चालीसा, अर्थ, पाठ विधि तथा महत्व सहित।

आरतीसंपूर्ण जय अम्बे गौरी दुर्गा आरती, साथ ही नवरात्रि के नौ दिनों में पूजी जाने वाली माँ दुर्गा की नौ स्वरूपों की जानकारी।

आरतीछठ पूजा में उदय और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते समय गाई जाने वाली संपूर्ण सूर्य देव आरती, अर्थ और विधि सहित।

आरतीआरती करने की सही विधि, प्रत्येक चरण का अर्थ, थाली की तैयारी और बचने योग्य सामान्य भूलों की संपूर्ण जानकारी।

आरतीसंपूर्ण कर्पूरगौरं संस्कृत श्लोक और सम्पूर्ण ॐ जय शिव ओंकारा आरती अर्थ व विधि सहित।

आरतीसर्वाधिक प्रचलित दुर्गा जी की संपूर्ण आरती (जय अम्बे गौरी) अर्थ, महत्व और विधि सहित।

आरतीगायत्री माता की संपूर्ण आरती, अर्थ सहित, तथा वेदमाता की उपासना का महत्व।
44 भक्तिपूर्ण मार्गदर्शिकाएँ

आरतीराम दरबार आरती का सम्पूर्ण पाठ देवनागरी में, उसका अर्थ और घर पर आरती करने की विधि।

आरतीपंचमुखी हनुमान के पंच-मुखी रक्षक स्वरूप की आराधना हेतु सम्पूर्ण पारंपरिक हनुमान आरती, अर्थ व विधि सहित।

आरतीभगवान शिव के बाल-स्वरूप बटुक भैरव की साहस, रक्षा व विघ्न-निवारण हेतु सम्पूर्ण आरती।

आरतीदेवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव की धन-समृद्धि व आर्थिक स्थिरता हेतु सम्पूर्ण आरती।

आरतीसूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — नवग्रहों की शांति और कृपा हेतु सम्पूर्ण नवग्रह आरती।

आरतीसंपूर्ण जय अम्बे गौरी दुर्गा आरती, साथ ही नवरात्रि के नौ दिनों में पूजी जाने वाली माँ दुर्गा की नौ स्वरूपों की जानकारी।

आरतीछठ पूजा में उदय और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते समय गाई जाने वाली संपूर्ण सूर्य देव आरती, अर्थ और विधि सहित।

आरतीआरती करने की सही विधि, प्रत्येक चरण का अर्थ, थाली की तैयारी और बचने योग्य सामान्य भूलों की संपूर्ण जानकारी।

आरतीसंपूर्ण कर्पूरगौरं संस्कृत श्लोक और सम्पूर्ण ॐ जय शिव ओंकारा आरती अर्थ व विधि सहित।

आरतीसर्वाधिक प्रचलित दुर्गा जी की संपूर्ण आरती (जय अम्बे गौरी) अर्थ, महत्व और विधि सहित।

आरतीगायत्री माता की संपूर्ण आरती, अर्थ सहित, तथा वेदमाता की उपासना का महत्व।

आरतीब्रज की प्रियतमा राधा रानी की संपूर्ण आरती देवनागरी में अर्थ, महत्व व सही पूजन विधि सहित।

आरतीश्री कृष्ण की संपूर्ण आरती — आरती कुंजबिहारी की — देवनागरी में अर्थ व घर पर आरती करने की सही विधि सहित।

आरतीपुरी के भगवान जगन्नाथ, जगत के स्वामी व कृष्ण स्वरूप, की सम्पूर्ण आरती, अर्थ, विधि व उनकी पूजा के आशीर्वाद सहित।

आरतीआदि शक्ति जगदम्बा को समर्पित सम्पूर्ण जय आद्य शक्ति आरती, अर्थ, विधि व उनकी कृपा से मिलने वाले आशीर्वाद सहित।

आरतीभगवान शिव के उग्र रक्षक स्वरूप काल भैरव की सम्पूर्ण आरती, अर्थ, विधि व उनकी आराधना से मिलने वाली सुरक्षा सहित।

आरतीतिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की सम्पूर्ण आरती, अर्थ, विधि व नित्य पूजन के लाभ सहित।

आरतीहर हिन्दू घर के लिए चार आवश्यक आरतियों का संपूर्ण पाठ: ॐ जय जगदीश हरे, जय गणेश देवा, ॐ जय शिव ओंकारा और जय अम्बे गौरी।

आरतीसत्यनारायण भगवान की आरती का संपूर्ण पाठ, अर्थ, सत्यनारायण कथा में इसका स्थान और सही पूजा विधि।

आरतीआरती श्री रामचन्द्र जी की का संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व और सांध्य आरती की सही विधि।

आरतीआरती कुंज बिहारी की का संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व और इसे प्रतिदिन सायं गाने की सही विधि।

आरतीविद्या, वाणी और कला की देवी माता सरस्वती की सर्वप्रसिद्ध संपूर्ण आरती, अर्थ, विधि और विद्यार्थियों के लिए महत्व सहित।

आरतीलगभग हर हिंदू घर में गाई जाने वाली माता लक्ष्मी की सर्वप्रसिद्ध संपूर्ण आरती, अर्थ, विधि और महत्व सहित।

आरतीत्रिकुटा पर्वत की गुफा में काली, लक्ष्मी और सरस्वती के संयुक्त स्वरूप में विराजमान माता वैष्णो देवी की संपूर्ण आरती, अर्थ और विधि सहित।

आरतीबर्बरीक स्वरूप खाटू श्याम बाबा की संपूर्ण आरती, अर्थ और विधि सहित, जिन्हें हारे का सहारा कहा जाता है।

आरतीभगवान गणेश — विघ्नहर्ता और बुद्धि-दाता — शिक्षा और आर्थिक उन्नति चाहने वाले भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखते हैं। उनकी आरती भक्ति-पूर्वक गाने से मानसिक अवरोध दूर होते हैं और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।
बुद्धि, समृद्धि, शिक्षा और शुभ आरम्भ
आरतीयह भगवान गणेश की सर्वाधिक प्रसिद्ध हिन्दी आरती है। किसी भी शुभारम्भ — नया व्यवसाय, गृह-प्रवेश या दैनिक प्रार्थना — के लिए अनिवार्य। यह गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में आह्वान करती है और बुद्धि माँगती है।
कॅरिअर उन्नति, नए आरम्भ और विघ्न-निवारण
आरतीयह संभवतः विश्व की सर्वाधिक प्रसिद्ध हिन्दू प्रार्थना है। यह सार्वभौमिक है और प्रायः किसी भी देवता की पूजा के अन्त में समापन-आरती के रूप में गाई जाती है। पारिवारिक एकता, शान्ति और अहंकार के परम पालक (विष्णु) को समर्पण हेतु अनिवार्य।
पारिवारिक शान्ति, समर्पण और सार्वभौमिक समापन-आरती
आरतीप्रायः "सुखकर्ता दुःखहर्ता" के तुरंत पश्चात गाई जाने वाली यह आरती श्री गणेश के सिन्दूर (लाल) रूप पर केन्द्रित है। आध्यात्मिक बुद्धि (विद्या) और अष्ट सिद्धियों के स्वामी के रूप में गणेश जी को पहचानने के लिए अनिवार्य।
सफलता, धन-अनुशासन और विघ्न-निवारण
आरतीयह आरती भगवान श्रीकृष्ण (बांके बिहारी) को समर्पित है। जन्माष्टमी पर्व और दैनिक कृष्ण पूजा के लिए अनिवार्य। यह ईश्वर की प्रेम-पूर्ण और रसात्मक सुन्दरता पर केन्द्रित है — भय से नहीं, प्रेम से भक्ति जगाती है।
अन्तर्मन की शान्ति, आनन्द और कृष्ण-प्रेम भक्ति
आरतीयह आरती अनूठी है — यह मूर्ति के स्थान पर एक ग्रन्थ (रामायण / रामचरितमानस) की पूजा है। रामायण पाठ (अखण्ड रामायण पाठ) से पूर्व या पश्चात की जाती है। यह स्वीकार करती है कि ग्रन्थ केवल कागज़ नहीं, अपितु संतों के जीवन्त प्राण हैं।
शास्त्र-सम्मान, राम-भक्ति और गृह-धर्म
आरतीयह देवी दुर्गा की निश्चित आरती है। नवरात्रि, देवी की दैनिक पूजा और नकारात्मकता से रक्षा चाहने के लिए अनिवार्य। यह उनके विभिन्न स्वरूपों (महिषासुर मर्दिनी, काली, उमा) की वन्दना करती है और उन्हें परम शक्ति के रूप में स्वीकार करती है।
नवरात्रि शक्ति-उपासना, रक्षा और पारिवारिक आशीर्वाद
आरतीसंतोषी माता सन्तोष की देवी हैं। यह आरती शुक्रवार को भक्तों द्वारा "सोलह शुक्रवार व्रत" (16 शुक्रवार उपवास) में गाई जाती है। वैवाहिक सुख, घरेलू विवादों के निवारण और सन्तोष की प्राप्ति के लिए अनिवार्य।
सन्तोष, सुख और शान्तिपूर्ण पारिवारिक जीवन
आरतीयह भगवान शिव की प्रमुख आरती है। सोमवार (शिव का दिन) और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से अनिवार्य। यह "त्रिमूर्ति" के सिद्धांत को प्रकट करती है — शिव, विष्णु और ब्रह्मा अन्ततः एक ही ऊर्जा हैं (एकानन चतुरानन)। यह गहरी मानसिक शांति और आध्यात्मिक स्थिरता लाती है।
शांति, वैराग्य, शुद्धिकरण और शिव भक्ति
आरतीयह आरती भगवान हनुमान की है — परम भक्त। मंगलवार और शनिवार के लिए विशेष रूप से अनिवार्य, यह भय दूर करने, शत्रुओं (नकारात्मकता) का नाश करने और शारीरिक तथा मानसिक बल पाने के लिए गाई जाती है। कहा जाता है कि यह घर को बुरी नज़र से बचाती है।
शक्ति, रक्षा, साहस और तत्काल सहायता
आरतीयह मानक धीमी "ॐ जय" लय में नहीं गाई जाती। यह तीव्र गति की, तालबद्ध प्रार्थना है — माता की चौकी या जागरण में लोक-शैली में गाई जाती है। काली पूजा और विलम्बित कार्यों में शीघ्र फल पाने के लिए अनिवार्य।
उग्र रक्षा, बल और भक्ति-तीव्रता
आरतीयह आरती अनूठी है — यह एक पौधे को अर्पित की जाती है। पवित्र तुलसी को देवी रूप में पूजा जाता है। तुलसी विवाह पर्व और दैनिक सन्ध्या के आँगन-अनुष्ठान — तुलसी पौधे के निकट दीप जलाने — के लिए अनिवार्य है।
गृह-पवित्रता, विष्णु-भक्ति और दैनिक आँगन भक्ति
आरतीशनि (शनैश्चर) कर्म के न्यायाधीश हैं। यह आरती प्रेम/शृंगार की नहीं — कठोर न्यायाधीश को प्रसन्न करने की आरती है। यह शनिवार को गाई जाती है — साढ़ेसाती (7.5 वर्ष का शनि-चक्र) के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए।
न्याय, धैर्य, कर्म-अनुशासन और रक्षा
आरतीयह हिन्दी आरतियों से संरचनात्मक रूप से भिन्न है — माधव अडकर द्वारा रचित एक पारम्परिक मराठी अभंग। बृहस्पतिवार की पूजा और शिरडी साई बाबा के भक्तों के लिए अनिवार्य। यह "सेवा" और "उदी" (पवित्र भस्म) पर केन्द्रित है।
आस्था, धैर्य, आरोग्य-आशा और गुरु-भक्ति
आरतीयह मानक धीमी "ॐ जय" लय में नहीं गाई जाती। यह तीव्र गति की, तालबद्ध प्रार्थना है — माता की चौकी या जागरण में लोक-शैली में गाई जाती है। काली पूजा और शीघ्र फल (सफलता में विलम्ब दूर करने) के लिए अनिवार्य।
निर्भयता, रक्षा और उग्र शक्ति-भक्ति
आरतीयह आरती सूर्य देव को समर्पित है। रविवार के लिए, दीर्घकालिक रोग (विशेषतः नेत्र अथवा चर्म-रोग) से मुक्ति चाहने वालों के लिए, और सामान्य जीवन-शक्ति के लिए अनिवार्य। अन्य देवताओं के विपरीत सूर्य "प्रत्यक्ष देवता" हैं — जिन्हें आप प्रतिदिन साक्षात् देख सकते हैं।
स्वास्थ्य, स्पष्टता, आत्मविश्वास और सौर अनुशासन
आरतीआध्यात्मिक शुद्धि और "संचित कर्म" (संचित पापों) के नाश के लिए अनिवार्य। यह जीवनदायिनी जल-तत्त्व के सम्मान हेतु की जाती है।
पवित्रता, क्षमा और पवित्र नदी के प्रति कृतज्ञता
आरतीशिल्पकारों, अभियन्ताओं और श्रमिकों के लिए विशेष रूप से अनिवार्य। यह उपकरणों, यन्त्रों और नए निर्माणों को आशीर्वादित करने हेतु की जाती है।
उपकरण, शिल्प, अभियान्त्रिकी, यन्त्र और कार्य-स्थल आशीर्वाद
आरतीकिसी भी नए कार्य के आरम्भ के लिए अत्यावश्यक। यह "आनन्द की आरती" है — ध्वनि और कंपन से विघ्नों को दूर करने के लिए गाई जाती है।
आनन्द, शुभ आरम्भ और विघ्न-निवारण21 भक्तिपूर्ण मार्गदर्शिकाएँ

स्तोत्र एवं पाठवेदमाता गायत्री की महिमा वर्णित सम्पूर्ण गायत्री चालीसा, अर्थ, पाठ विधि तथा महत्व सहित।

स्तोत्र एवं पाठश्री सूक्तम पंद्रह ऋचाओं का एक पवित्र वैदिक सूक्त है, जो देवी श्री (लक्ष्मी) को समर्पित है और समृद्धि, प्रचुरता, शुद्धता तथा दरिद्रता-दुर्भाग्य के निवारण हेतु आवाहन करता है।

स्तोत्र एवं पाठकनकधारा स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा माँ लक्ष्मी की स्तुति में रचित इक्कीस श्लोकों का स्तोत्र है, जो एक निर्धन ब्राह्मणी के प्रति उनकी करुणा से उत्पन्न हुआ, और दरिद्रता निवारण के लिए सर्वाधिक प्रभावशाली स्तोत्रों में गिना जाता है।

स्तोत्र एवं पाठलिंगाष्टकम शिवलिंग की स्तुति में रचित आठ श्लोकों का अत्यंत प्रिय संस्कृत स्तोत्र है, जिसे मंदिरों और घरों में भगवान शिव के निराकार-साकार प्रतीक की वंदना हेतु गाया जाता है।

स्तोत्र एवं पाठदेवी कवच दुर्गा सप्तशती का वह पवित्र सुरक्षा-स्तोत्र है जिसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों तथा शस्त्रधारी शक्तियों का आवाहन कर शरीर के हर अंग और हर दिशा की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

स्तोत्र एवं पाठअर्गला स्तोत्र का संपूर्ण पाठ, अर्थ, लाभ एवं दुर्गा सप्तशती पाठ में इसे पढ़ने की सही विधि।

स्तोत्र एवं पाठश्रीमद्भागवत में वर्णित नारायण कवच एक पवित्र सुरक्षा-कवच है, जो शरीर के हर अंग और हर दिशा की रक्षा हेतु भगवान विष्णु के स्वरूपों व आयुधों का आह्वान करता है।

स्तोत्र एवं पाठगोस्वामी तुलसीदास द्वारा एक कठिन रोगकाल में रचित हनुमान बाहुक, शरीर के हर अंग और हर प्रकार के कष्ट पर भगवान हनुमान की रक्षा का आह्वान करने वाला दीर्घ स्तोत्र है।

स्तोत्र एवं पाठआदि शंकराचार्य रचित संपूर्ण भज गोविन्दम (मोहमुद्गर) — क्षणभंगुर सांसारिक मोह से हटकर गोविन्द भक्ति की ओर मुड़ने का शाश्वत संदेश देने वाले श्लोक।

स्तोत्र एवं पाठगोस्वामी तुलसीदास रचित संपूर्ण रुद्राष्टकम — भगवान शिव के स्वरूप, कृपा और रक्षा का वर्णन करने वाले आठ शक्तिशाली श्लोक।

स्तोत्र एवं पाठआदि शंकराचार्य रचित सम्पूर्ण काल भैरव अष्टकम, अर्थ, लाभ और भय-मुक्ति के लिए इसके पाठ की सही विधि सहित।

स्तोत्र एवं पाठयुद्ध से पूर्व महर्षि अगस्त्य द्वारा श्रीराम को सिखाया गया आदित्य हृदय स्तोत्र सूर्य देव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो शक्ति, विजय और आंतरिक तेज प्रदान करता है।

स्तोत्र एवं पाठरावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव के तांडव नृत्य की स्तुति में रचा गया सनातन धर्म का सबसे शक्तिशाली और लयबद्ध स्तोत्रों में से एक है।

स्तोत्र एवं पाठविष्णु सहस्रनाम महाभारत से लिया गया भगवान विष्णु के एक हज़ार नामों का पावन स्तोत्र है, जिसका पाठ शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है।

स्तोत्र एवं पाठसुंदरकांड रामचरितमानस का पाँचवाँ सोपान है, जिसमें हनुमान जी के लंका गमन का वर्णन है और इसका पाठ साहस, सुरक्षा तथा बाधा-निवारण के लिए किया जाता है।

स्तोत्र एवं पाठसंपूर्ण महामृत्युंजय मंत्र व उसका विस्तारित जाप रूप, पूर्ण शब्दार्थ, लाभ और जाप की सही विधि सहित।

स्तोत्र एवं पाठ700 श्लोकों वाले दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ) की संरचना, उसके सबसे पवित्र श्लोक और श्रद्धापूर्वक पाठ करने की विधि का परिचय।

स्तोत्र एवं पाठऋषि बुधकौशिक द्वारा रचित संपूर्ण राम रक्षा स्तोत्र, जो साधक के हर अंग को श्री राम की सुरक्षा में मानता है।

स्तोत्र एवं पाठमाँ सरस्वती को समर्पित यह आरती विद्यार्थियों, कलाकारों और संगीतज्ञों के लिए अनिवार्य है। बसन्त पंचमी पर, परीक्षा या प्रस्तुति से पूर्व मन, वाणी और सृजन-शक्ति की स्पष्टता के लिए की जाती है।
ज्ञान, वाणी, संगीत और विद्या
स्तोत्र एवं पाठ"मर्यादा" (अनुशासन) और मानसिक शान्ति के विकास के लिए अनिवार्य। परम पुरुष (पुरुषोत्तम) के गुणों का आह्वान करने हेतु गाई जाती है।
साहस, सत्य, मर्यादा और राम-भक्ति
स्तोत्र एवं पाठआन्तरिक बल, साहस और अवसाद या प्रबल शत्रुओं पर विजय के लिए अनिवार्य।
बल, साहस और नकारात्मकता पर विजय