"मर्यादा" (अनुशासन) और मानसिक शान्ति के विकास के लिए अनिवार्य। परम पुरुष (पुरुषोत्तम) के गुणों का आह्वान करने हेतु गाई जाती है।
यह स्तुति क्यों और किसके लिए?
"मर्यादा" (अनुशासन) और मानसिक शान्ति के विकास के लिए अनिवार्य। परम पुरुष (पुरुषोत्तम) के गुणों का आह्वान करने हेतु गाई जाती है।
पाठ करने की सरल विधि
- स्वच्छ, शान्त स्थान चुनें — जहाँ विघ्न न हों।
- दीप लहराएँ।
- सीधे खड़े होकर दीप को धीमी, तालबद्ध वृत्ताकार गति में लहराएँ।
स्तुति: सम्पूर्ण पाठ और भावार्थ
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्। भावार्थ: हे मन — कृपालु श्रीरामचन्द्र का भजन कर — जो भवभय के दारुण को हरते हैं।
नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्॥ भावार्थ: उनके नेत्र, मुख, कर और पद नव-कमल के समान अरुण हैं।
कंदर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्। भावार्थ: उनकी छवि असंख्य कामदेवों से परे है — नव नील मेघ के समान सुन्दर।
पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥ भावार्थ: उनके पीत वस्त्र विद्युत के समान शुभ्र प्रतीत होते हैं — मैं जनक-कन्या के प्रभु को नमन करता हूँ।
इति वदित तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। भावार्थ: तुलसीदास कहते हैं — वे शंकर, शेष और मुनियों के मन को रंजित करने वाले हैं।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥ भावार्थ: हे प्रभु — मेरे हृदय-कमल में निवास कीजिए और काम आदि दुष्ट-दल का नाश कीजिए।
पाठ की मर्यादा — क्या करें, क्या न करें
- करें: "भाव" (समर्पण की अनुभूति) पर केन्द्रित रहें।
- न करें: पंक्तियों में शीघ्रता न करें — यह स्तुति धीमी, ध्यानमग्न गति चाहती है।
पौराणिक संदर्भ
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित — यह स्तुति कुछ ही श्लोकों में रामायण का सार पकड़ लेती है।
प्रसिद्ध मन्दिर
राम जन्मभूमि मन्दिर, अयोध्या।
एक-पंक्ति सार
अन्तर्-अहंकार पर विजय ही राम की सच्ची विजय है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Ram mantra
Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram
Chant slowly with devotion for courage, truth, protection, and mental peace.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
रामनवमी और दैनिक राम व्रत में क्या अन्तर है?
रामनवमी सबसे बड़ा पर्व है — पूरे दिन का व्रत। दैनिक राम व्रत सरल है — केवल प्रार्थना और तुलसी अर्पण।
रामायण पढ़ूँ या केवल कथा?
रामायण का कोई भी अंश — एक चौपाई भी — पढ़ना शुभ है। व्रत-कथा संक्षिप्त स्वरूप है।
क्या स्त्रियाँ यह व्रत अपने पति के लिए कर सकती हैं?
हाँ — राम व्रत पुरुष और स्त्री दोनों द्वारा पारिवारिक रक्षा, साहस और धर्ममय जीवन के लिए किया जाता है।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अपना नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, और प्रार्थना की भावना साझा करें। अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







