किसी भी नए कार्य के आरम्भ के लिए अत्यावश्यक। यह "आनन्द की आरती" है — ध्वनि और कंपन से विघ्नों को दूर करने के लिए गाई जाती है।
यह आरती क्यों और किसके लिए?
किसी भी नए कार्य के आरम्भ के लिए अत्यावश्यक। यह "आनन्द की आरती" है — ध्वनि और कंपन से विघ्नों को दूर करने के लिए गाई जाती है।
आरती करने की सरल विधि
- प्रार्थना के लिए स्वच्छ, शान्त स्थान चुनें — जहाँ विघ्न न हों।
- घंटी और मंजीरा अधिक मात्रा में प्रयोग करें।
- इस लय में ताली बजाना शुभ माना गया है।
आरती: सम्पूर्ण पाठ और भावार्थ
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची भावार्थ: सुखों के कर्ता, दुःखों के हर्ता और विघ्न-समाचार को टालने वाले।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची भावार्थ: जो हमारे जीवन को प्रेम और कृपा से भर देते हैं।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची भावार्थ: जिनका सम्पूर्ण शरीर सिंदूर के उबटन से सुन्दर सुशोभित है।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची भावार्थ: जिनके कण्ठ में शुद्ध मोतियों की माला चमकती है।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती भावार्थ: जय हो प्रभु, जय हो — मंगलमूर्ति की जय हो।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती भावार्थ: केवल दर्शनमात्र से ही मन की समस्त कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।
आरती की मर्यादा — क्या करें, क्या न करें
- करें: ऊँचे स्वर में और उत्साह के साथ गाएँ।
- न करें: दीप को स्थिर न रखें — उसे भारी ताल के साथ लहराना चाहिए।
पौराणिक संदर्भ
यह आरती 17वीं शताब्दी के संत समर्थ रामदास ने मयूरेश्वर में गणेश प्रतिमा के दर्शन के पश्चात रची थी।
प्रसिद्ध मन्दिर
श्री सिद्धिविनायक मन्दिर, मुम्बई।
एक-पंक्ति सार
दिव्य की उपस्थिति हर विघ्न को अवसर में बदल देती है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Ganesh mantra
Om Gam Ganapataye Namah
Chant before beginning the puja, aarti, study, business, or any new work.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश जी को मोदक क्यों अर्पित किया जाता है?
मोदक गणेश जी का सर्वप्रिय भोग माना गया है — यह आध्यात्मिक ज्ञान की मधुरता का प्रतीक है।
क्या बालक यह व्रत कर सकते हैं?
हाँ — बालक सरल रूप में सहभागी हो सकते हैं, जैसे दीप के साथ पुष्प और मिठाई अर्पित करना।
यदि दूर्वा उपलब्ध न हो तो?
दूर्वा सर्वप्रमुख अर्पण है, परन्तु गणेश जी श्रद्धापूर्वक अर्पित किसी भी हरित पत्र को स्वीकार कर लेते हैं।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अपना नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, और प्रार्थना की भावना साझा करें। अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







