यह आरती अनूठी है — यह मूर्ति के स्थान पर एक ग्रन्थ (रामायण / रामचरितमानस) की पूजा है। रामायण पाठ (अखण्ड रामायण पाठ) से पूर्व या पश्चात की जाती है। यह स्वीकार करती है कि ग्रन्थ केवल कागज़ नहीं, अपितु संतों के जीवन्त प्राण हैं।
यह आरती क्यों और किसके लिए?
यह आरती अनूठी है — यह मूर्ति के स्थान पर एक ग्रन्थ (रामायण / रामचरितमानस) की पूजा है। रामायण पाठ (अखण्ड रामायण पाठ) से पूर्व या पश्चात की जाती है। यह स्वीकार करती है कि ग्रन्थ केवल कागज़ नहीं, अपितु संतों के जीवन्त प्राण हैं।
आरती करने की सरल विधि
• स्वच्छ, विघ्न-रहित स्थान चुनें। • दीप और अगरबत्ती प्रज्वलित करें। • मूर्ति या चित्र को ताज़े पुष्प अर्पित करें। • रामायण ग्रन्थ को काष्ठ की चौकी पर स्थापित करें। • ग्रन्थ को पुष्प-माला से सज्जित करें। • ग्रन्थ की ही आरती करें — उसे जीवन्त देवता मानकर।
आरती: सम्पूर्ण पाठ और भावार्थ
आरती श्री रामायण जी की, कीरति कलित ललित सिय पी की भावार्थ: श्री रामायण की आरती — जो सीता के प्रियतम (श्रीराम) की सुन्दर कीर्ति का गान है।
गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद, वाल्मीकि विज्ञान विशारद भावार्थ: ब्रह्मा, नारद और विज्ञान-विशारद वाल्मीकि द्वारा गाई जाती है।
गावत वेद पुरान अष्टदस, छयों शास्त्र सब ग्रंथन को रस भावार्थ: वेद, अठारह पुराण और षट् शास्त्र गाते हैं — यह समस्त ग्रन्थों का रस है।
कलि-मल-हरनि विषय-रस-फीकी, सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की भावार्थ: कलियुग के पापों का हरण करती है, विषय-रसों को नीरस कर देती है — "मुक्ति" रूपी युवती का सुभग शृंगार है।
दलन रोग भव मूरि अमी की, तात मात सब विधि तुलसी की भावार्थ: भवरोग को नष्ट करने वाली अमृत-जड़ी — तुलसीदास के लिए यह सर्व प्रकार से माता-पिता समान है।
आरती की मर्यादा — क्या करें, क्या न करें
• करें: आरती के पश्चात ज्ञान के प्रति सम्मान हेतु ग्रन्थ से अपना मस्तक स्पर्श करें। • न करें: इस आरती के समय ग्रन्थ को भूमि पर कभी न रखें।
पौराणिक संदर्भ — "गावत वेद पुरान"
"गावत वेद पुरान" पंक्ति यह प्रकट करती है कि राम-कथा केवल इतिहास नहीं है — यह समस्त वेदों का सार है, जिसे मानवता के लिए सरल कथा-रूप में संकलित किया गया है।
प्रसिद्ध मन्दिर — तुलसी मानस मन्दिर, वाराणसी
तुलसी मानस मन्दिर एक आधुनिक स्थापत्य-कलाकृति है — सन् 1964 में श्वेत संगमरमर से निर्मित। यह उसी पवित्र स्थान पर स्थित है जहाँ 16वीं शताब्दी में संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की थी — ऐसी मान्यता है। इस मन्दिर की विशेषता यह है कि इसकी संगमरमर की दीवारों पर सम्पूर्ण रामचरितमानस उकेरा गया है। द्वितीय तल पर लोकप्रिय यान्त्रिक कठपुतली प्रदर्शन है, जो रामायण के विभिन्न प्रसंगों का जीवन्त दर्शन कराता है — तीर्थयात्रियों और दर्शनार्थियों का प्रिय आकर्षण।
एक-पंक्ति सार
पवित्र ग्रन्थ को जीवन की परम मार्गदर्शिका के रूप में सम्मान देना।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Ram mantra
Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram
Chant slowly with devotion for courage, truth, protection, and mental peace.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
रामनवमी और दैनिक राम व्रत में क्या अन्तर है?
रामनवमी सबसे बड़ा पर्व है — पूरे दिन का व्रत। दैनिक राम व्रत सरल है — केवल प्रार्थना और तुलसी अर्पण।
रामायण पढ़ूँ या केवल कथा?
रामायण का कोई भी अंश — एक चौपाई भी — पढ़ना शुभ है। व्रत-कथा संक्षिप्त स्वरूप है।
क्या स्त्रियाँ यह व्रत अपने पति के लिए कर सकती हैं?
हाँ — राम व्रत पुरुष और स्त्री दोनों द्वारा पारिवारिक रक्षा, साहस और धर्ममय जीवन के लिए किया जाता है।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अपना नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, और प्रार्थना की भावना साझा करें। अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







