यह संभवतः विश्व की सर्वाधिक प्रसिद्ध हिन्दू प्रार्थना है। यह सार्वभौमिक है और प्रायः किसी भी देवता की पूजा के अन्त में समापन-आरती के रूप में गाई जाती है। पारिवारिक एकता, शान्ति और अहंकार के परम पालक (विष्णु) को समर्पण हेतु अनिवार्य।
यह आरती क्यों और किसके लिए?
यह सम्भवतः विश्व की सर्वाधिक प्रसिद्ध हिन्दू प्रार्थना है। यह सार्वभौमिक है और प्रायः किसी भी देवता की पूजा के अन्त में समापन-आरती के रूप में गाई जाती है। पारिवारिक एकता, शान्ति और परम पालक (विष्णु) को अहंकार-समर्पण हेतु अनिवार्य।
आरती करने की सरल विधि
- स्वच्छ, विघ्न-रहित स्थान चुनें।
- दीप और अगरबत्ती प्रज्वलित करें।
- मूर्ति या चित्र को ताज़े पुष्प अर्पित करें।
- यह आरती सामान्यतः पूरे संगत अथवा परिवार द्वारा एक स्वर में गाई जाती है।
- यहाँ लय बनाए रखने के लिए ताली बजाना अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
- थाली को बड़े वृत्तों में घुमाएँ — सम्पूर्ण वेदी को समेटते हुए, केवल एक मूर्ति पर नहीं।
- अन्त में आरती-ज्योति उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को आशीर्वाद-रूप में दी जाती है।
आरती: सम्पूर्ण पाठ और भावार्थ
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे भावार्थ: हे जगदीश — आपकी जय हो।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे भावार्थ: आप भक्तजनों के संकट क्षण भर में दूर कर देते हैं।
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का भावार्थ: जो आपका ध्यान करता है, वह फल पाता है — मन के दुःख मिट जाते हैं।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का भावार्थ: सुख-सम्पत्ति घर आती है; शरीर के कष्ट मिट जाते हैं।
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी भावार्थ: आप ही मेरे माता-पिता हैं — किसकी शरण लूँ?
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी भावार्थ: आपके अतिरिक्त कोई दूजा नहीं — जिससे मैं आशा कर सकूँ।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी भावार्थ: आप पूर्ण परमात्मा हैं — अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी भावार्थ: परब्रह्म परमेश्वर — आप सबके स्वामी।
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता भावार्थ: आप करुणा के सागर, सबके पालक।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता भावार्थ: मैं मूर्ख, दुष्ट और कामी हूँ — हे प्रभु, कृपा करें।
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा भावार्थ: विषय-विकार मिटाइए और पापों का हरण कीजिए।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा भावार्थ: श्रद्धा-भक्ति बढ़ाइए — संतों की सेवा का सौभाग्य दीजिए।
आरती की मर्यादा — क्या करें, क्या न करें
- करें: "तेरा तुझको अर्पण" पंक्ति को अहंकार और सम्पत्ति के समर्पण के विशिष्ट भाव से गाएँ।
- न करें: लय में शीघ्रता न करें — यह एक धीमा, मधुर भजन है जो गहरे चिन्तन के लिए है।
पौराणिक संदर्भ — "तुम पूरण परमात्मा"
"तुम पूरण परमात्मा" पंक्ति वेदान्त दर्शन के साथ संरेखित है — कि ईश्वर प्रत्येक जीव में "अन्तर्यामी" के रूप में निवास करते हैं, केवल बाह्य मूर्ति नहीं।
प्रसिद्ध मन्दिर — श्री जगन्नाथ मन्दिर, पुरी (ओडिशा)
पुरी, ओडिशा में स्थित जगन्नाथ मन्दिर एक पवित्र चार-धाम स्थल है — भगवान जगन्नाथ को समर्पित। 12वीं शताब्दी में निर्मित, यह मन्दिर वार्षिक रथ यात्रा, अद्वितीय काष्ठ-मूर्तियों और पवित्र महाप्रसाद के लिए विश्व-प्रसिद्ध है। इसके रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध — जैसे वायु के विपरीत दिशा में लहराती ध्वजा और मुख्य गुम्बद की छाया कभी भूमि पर न पड़ना।
एक-पंक्ति सार
परिवार की शान्ति और अपनी चिन्ताओं को परमात्मा के चरणों में समर्पित करने की परम प्रार्थना।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Vishnu mantra
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
Chant before katha or aarti while praying for protection, dharma, and peace.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी व्रत का क्या महत्त्व है?
एकादशी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सर्वाधिक प्रभावी दिन है। इस दिन व्रत से अनेक जन्मों के पाप क्षय होते हैं।
क्या एकादशी पर जल ले सकते हैं?
हाँ — जल की अनुमति है। पूर्ण निर्जला व्रत केवल ग्रीष्म ऋतु की निर्जला एकादशी पर होता है — सर्वाधिक प्रभावी किन्तु ऐच्छिक।
एकादशी पर क्या खाया जा सकता है?
फल, दूध, सूखे मेवे, सेंधा नमक, साबूदाना और पंचामृत की अनुमति है। अनाज, दालें और कुछ मसालों से परहेज करें।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अपना नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, और प्रार्थना की भावना साझा करें। अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







