संतोषी माता सन्तोष की देवी हैं। यह आरती शुक्रवार को भक्तों द्वारा "सोलह शुक्रवार व्रत" (16 शुक्रवार उपवास) में गाई जाती है। वैवाहिक सुख, घरेलू विवादों के निवारण और सन्तोष की प्राप्ति के लिए अनिवार्य।
यह आरती क्यों और किसके लिए?
संतोषी माता सन्तोष की देवी हैं। यह आरती शुक्रवार को भक्तों द्वारा "सोलह शुक्रवार व्रत" (16 शुक्रवार उपवास) में गाई जाती है। वैवाहिक सुख, घरेलू विवादों के निवारण और सन्तोष की प्राप्ति के लिए अनिवार्य।
आरती करने की सरल विधि
• स्वच्छ, शान्त स्थान चुनें — जहाँ विघ्न न हों। • पवित्र वातावरण बनाने हेतु दीप (तेल) और अगरबत्ती प्रज्वलित करें। • गुड़-चना (गुड़ और भुने चने) अर्पित करें — यह अति महत्वपूर्ण है। • इस दिन खट्टी वस्तुएँ (नींबू, इमली आदि) न अर्पित करें, न ही ग्रहण करें। • जो कुछ आपके पास है, उसके प्रति कृतज्ञता के भाव से गाएँ।
आरती: सम्पूर्ण पाठ और भावार्थ
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता भावार्थ: माता संतोषी की जय हो।
अपने सेवक जन की, सुख सम्पति दाता भावार्थ: आप अपने सेवकों को सुख और सम्पत्ति देती हैं।
सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो भावार्थ: आप सुन्दर स्वर्णिम साड़ी धारण करती हैं।
हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो भावार्थ: हीरे और पन्ने चमकते हैं — आप पूर्ण शृंगार में सुशोभित हैं।
गेरू लाल छटा छबि, बदन कमल सोहे भावार्थ: आपकी लाल आभा सुन्दर है — मुख कमल-सा शोभित।
मंद हंसत करुणामयी, त्रिभुवन जन मोहे भावार्थ: आपकी मन्द हास्य-मुद्रा करुणा-पूर्ण है — तीनों लोकों को मोहित करती है।
स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरे प्यारे भावार्थ: आप स्वर्ण-सिंहासन पर विराजित हैं — चँवर ढुलते हैं।
धूप दीप मधुमेवा, भोग धरे न्यारे भावार्थ: धूप, दीप, मधु और मेवा आपको अर्पित हैं।
गुड़ अरु चना परम प्रिय, ता में संतोष कियो भावार्थ: गुड़ और चना आपके परम प्रिय हैं — आप इससे सन्तुष्ट होती हैं।
संतोषी कहती हो, भक्तन कष्ट लियो भावार्थ: आप "संतोषी" कहलाती हैं — भक्तों के कष्ट हर लेती हैं।
शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही भावार्थ: शुक्रवार आपका प्रिय दिन है — आज वही दिवस है।
भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही भावार्थ: भक्त-मण्डली एकत्र है — आपकी कथा सुनकर मोहित।
मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई भावार्थ: मन्दिर ज्योतियों से देदीप्यमान है — मंगल ध्वनि गूँज रही है।
विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई भावार्थ: हम बालक विनय करते हैं — चरणों में सिर नवाते हैं।
भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै भावार्थ: भक्ति-भाव से की गई इस पूजा को स्वीकार कीजिए।
जो मन बसे हमारे, इच्छित फल दीजै भावार्थ: जो हमारे मन में हो — इच्छित फल दीजिए।
आरती की मर्यादा — क्या करें, क्या न करें
• करें: गुड़-चना प्रसाद बालकों में वितरित करें। • न करें: संतोषी माता के भक्त शुक्रवार को खट्टी वस्तुएँ (खटाई) कठोरतापूर्वक न लें।
पौराणिक संदर्भ — संतोषी माता
संतोषी माता को भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है — यह प्रतीक है कि जहाँ बुद्धि (गणेश) और समृद्धि (रिद्धि-सिद्धि) होती है, वहीं सन्तोष (संतोषी) भी होता है।
प्रसिद्ध मन्दिर — संतोषी माता मन्दिर, जोधपुर (राजस्थान)
संतोषी माता मन्दिर सन्तोष की देवी को समर्पित सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थलों में से एक माना जाता है। मन्दिर में एक गुफा-सी गर्भ-गृह के भीतर देवी की प्राचीन, प्राकृतिक शिला-प्रतिमा विराजित है — विशेषतः शुक्रवार को सहस्रों भक्त यहाँ एकत्र होते हैं। भक्त यहाँ प्रसिद्ध 16-सप्ताह व्रत मनोकामना-पूर्ति हेतु करते हैं — गुड़ और भुने चने अर्पित करते हुए, खट्टी वस्तुओं से कठोर परहेज करते हुए।
एक-पंक्ति सार
एक सरल प्रार्थना जो सिखाती है — सच्चा सुख सन्तोष में है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Santoshi Mata mantra
Om Shri Santoshi Matayai Namah
Chant on Friday or during the vrat with a calm and grateful heart.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पुरुष भी नवरात्रि व्रत कर सकते हैं?
हाँ — किसी भी लिंग का भक्त नवरात्रि व्रत कर सकता है; यह सभी के लिए खुला है।
व्रत के दौरान क्या खाया जा सकता है?
नवरात्रि व्रत में फल, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक और दुग्ध-उत्पाद खाए जा सकते हैं।
यदि मैं पूरे 9 दिन व्रत न रख सकूँ तो?
आप केवल प्रथम और अन्तिम दिन (प्रतिपदा और नवमी) व्रत कर सकते हैं — यह भी सम्पूर्ण व्रत के समान माना गया है।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अपना नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, और प्रार्थना की भावना साझा करें। अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







