शिल्पकारों, अभियन्ताओं और श्रमिकों के लिए विशेष रूप से अनिवार्य। यह उपकरणों, यन्त्रों और नए निर्माणों को आशीर्वादित करने हेतु की जाती है।
यह आरती क्यों और किसके लिए?
शिल्पकारों, अभियन्ताओं और श्रमिकों के लिए विशेष रूप से अनिवार्य। यह उपकरणों, यन्त्रों और नए निर्माणों को आशीर्वादित करने हेतु की जाती है।
आरती करने की सरल विधि
- प्रार्थना के लिए स्वच्छ, शान्त स्थान चुनें — जहाँ विघ्न न हों।
- दीप को लहराएँ।
- आरती से पूर्व अपने उपकरण / लैपटॉप / यन्त्रों को स्वच्छ करें।
- कार्य-स्थल के समीप विश्वकर्मा भगवान का चित्र रखें।
आरती: सम्पूर्ण पाठ और भावार्थ
जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा भावार्थ: सृष्टि के महान शिल्पकार की जय हो।
सकल सृष्टि के कर्ता, सत्य ज्ञान धर्मा भावार्थ: सम्पूर्ण जगत के रचयिता, सत्य, ज्ञान और धर्म के मूर्त स्वरूप।
पञ्चानन मुखधारी, दस भुज अति सोहे भावार्थ: आप पंचमुख हैं और दश भुजाओं से सुशोभित हैं।
ज्ञान अनन्त अपारा, त्रिभुवन जन मोहे भावार्थ: आपका ज्ञान अनन्त है — तीनों लोक मोहित हैं।
चक्र और त्रिशूल धारे, शिल्प कला ज्ञाता भावार्थ: चक्र और त्रिशूल धारण करते हैं — समस्त शिल्प कलाओं के ज्ञाता हैं।
भक्त जनन के त्राता, सुख सम्पत्ति दाता भावार्थ: भक्तजनों के रक्षक और सुख-सम्पत्ति के दाता।
आरती की मर्यादा — क्या करें, क्या न करें
- करें: अपने कार्य-उपकरणों पर तिलक (सिंदूर) लगाएँ।
- न करें: इस विशेष आरती के लिए जंग लगे या टूटे दीप का प्रयोग न करें।
पौराणिक संदर्भ
विश्वकर्मा ने स्वर्णमयी लंका, द्वारका नगरी और देवताओं के शस्त्रों — जिनमें इन्द्र का वज्र भी सम्मिलित है — का निर्माण किया था।
प्रसिद्ध मन्दिर
विश्वकर्मा मन्दिर, मण्डी (हिमाचल प्रदेश)।
एक-पंक्ति सार
किसी भी सृजन में सफलता के लिए दिव्य शिल्पकार का आशीर्वाद अनिवार्य है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Vishnu mantra
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
Chant before katha or aarti while praying for protection, dharma, and peace.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी व्रत का क्या महत्त्व है?
एकादशी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सर्वाधिक प्रभावी दिन है। इस दिन व्रत रखने से अनेक जन्मों के पाप क्षय होते हैं — ऐसा विश्वास है।
क्या एकादशी पर जल ले सकते हैं?
हाँ — जल की अनुमति है। पूर्ण निर्जला व्रत केवल ग्रीष्म ऋतु की निर्जला एकादशी पर होता है — वह सर्वाधिक प्रभावी किन्तु ऐच्छिक है।
एकादशी पर क्या खाया जा सकता है?
फल, दूध, सूखे मेवे, सेंधा नमक, साबूदाना और पंचामृत की अनुमति है। अनाज, दालें और कुछ मसालों से परहेज करें।
क्या आप यह पूजा अपने संकल्प के साथ करवाना चाहते हैं?
अपना नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, और प्रार्थना की भावना साझा करें। अनुभवी पंडित आपको सही सेवा की ओर मार्गदर्शन देंगे।







