The complete Gayatri Chalisa in Devanagari with meaning, chanting method and the deep significance of Gayatri Mata, the mother of the Vedas.
Gayatri Mata is revered as Vedmata, the mother of the Vedas, embodying the light of knowledge, wisdom and purity. She is worshipped through the sacred Gayatri Mantra, considered one of the most powerful mantras in Sanatan Dharma. The Gayatri Chalisa is a devotional composition praising her many forms and powers, chanted by devotees seeking wisdom, clarity of mind, protection and spiritual growth.
Complete Gayatri Chalisa (Devanagari)
दोहा
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शक्ति बीज जगदम्ब का, करे अखण्ड ब्रह्माण्ड।
जय जय जय जगदम्ब भवानी, हम बालक तू जगत जननी। पाप काट भव सिन्धु उतारो, बेड़ा पार लगाओ हमारो।
चौपाई
भूर्भुवः स्वः ॐकारा, गायत्री तू सबकी महतारी। तू ही जग की आदि भवानी, ब्रह्मा विष्णु शंकर की रानी।
तू ही सृष्टि तू ही पालन, तू ही करती जग का संहारा। तू ही सतो रजो तमो गुण धारिणी, तू ही ज्ञान वैराग्य विधायिनी।
तू ही जननी हम सब बालक, तेरी शरण में सुख पावें झलक। तेरे बिना और सहारा नाहीं, तू ही निज बालक अपनाई।
तू ही वेद पुराणों में गाई, ऋषि मुनि करते तेरी सेवाई। संध्या वंदन में तू पूजी जाए, गायत्री मंत्र से तू ही मनाए।
तीन लोक में व्याप्त तुम्हारी, तुम बिन जग सारा भिखारी। पृथ्वी अन्तरिक्ष स्वर्ग में वासा, तेरा ही सारे जग में प्रकाशा।
तू ही सावित्री तू ही सरस्वती, तू ही लक्ष्मी तू ही पार्वती। तू ही दुर्गा तू ही काली, तू ही करती संकट टाली।
चौबीस अक्षर की माला धारे, चौबीस सिद्धि दे भक्तन तारे। गायत्री मंत्र जो जन जापे, ताके सकल पाप कट जावें।
अज्ञान तिमिर को दूर भगाओ, बुद्धि विवेक हमें सिखाओ। सत्य पथ पर हमको चलाओ, मन बुद्धि को शुद्ध बनाओ।
जो यह चालीसा नित गावे, गायत्री माँ का प्रिय हो जावे। विद्या बुद्धि की वृद्धि होई, सद्गुण संचित करे सोई।
रोग शोक सब दूर पराने, संकट में तू ही रक्षा जाने। जो तेरा ध्यान लगावे मन से, ताको कबहुं न व्याकुल तन से।
ब्रह्मचारी संध्या जो करते, गायत्री जप से पाप हरते। प्रातः मध्याह्न सायं तीन बेरा, गायत्री जप हरे अंधेरा।
तू ही देवी तू ही माता, तू ही जगत की भाग्य विधाता। तेरी महिमा अगम अपारा, वेद ना पावे तेरा पारा।
सूर्य मण्डल में तेरा वासा, तू ही करती जग में प्रकाशा। तेरे तेज से जग जगमगावे, अंधकार सब दूर भगावे।
जो साधक निशिदिन तुझे ध्यावे, ताके सकल मनोरथ पावे। धन धान्य विद्या यश पावे, गायत्री कृपा से सब सुख पावे।
तू ही ब्रह्म तू ही परमेश्वर, तू ही जग की आदि ईश्वर। तेरे बिना कछु सिद्धि न होई, तू सम दाता और न कोई।
जो नर गायत्री शरण में आवे, ताको भव भय कबहुं न सतावे। मृत्यु समय जो नाम तुम्हारा, ले ले सो पावे भवसागर पारा।
महामंत्र गायत्री तुम्हारा, जपत रहे जग सारा। तुम्हरी शरण जो आवे प्राणी, ताकी रक्षा करो भवानी।
जगदम्बे यह विनय हमारी, करो कृपा हे करुणा धारी। बुद्धि विवेक ज्ञान हमें दीजै, भक्ति शक्ति का दान करीजै।
दोहा
गायत्री माता की जय हो, जय हो जगत की माय। सद्बुद्धि दो सन्मार्ग दो, जीवन सफल बनाय।
Quick guide
Before you begin
Mantra
Surya mantra
Om Ghrinih Suryaya Namah
Chant at sunrise or during Surya arghya for energy, clarity, and discipline.
Bhav
Benefits devotees pray for
FAQ
Common questions
गायत्री चालीसा किस समय पढ़नी चाहिए?
प्रातः, मध्याह्न और सायं — तीनों संध्याओं में पढ़ना सर्वोत्तम माना जाता है, परन्तु किसी भी शुभ समय पर पढ़ा जा सकता है।
क्या स्त्रियाँ गायत्री मंत्र जप सकती हैं?
हाँ, सभी श्रद्धालु स्त्री-पुरुष श्रद्धापूर्वक गायत्री मंत्र और चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
चालीसा पढ़ने से क्या लाभ मिलता है?
बुद्धि, एकाग्रता, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति में वृद्धि होती है।
Book Gayatri Puja & Havan
Invite Divya Chadhava's pandits to perform Gayatri puja and havan for wisdom, clarity and blessings.








