खाटू श्याम चालीसा का सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित — बर्बरीक, शीश के दानी, जो खाटू श्याम बाबा के रूप में शीघ्र आशीर्वाद व रक्षा हेतु पूजे जाते हैं।
खाटू श्याम बाबा बर्बरीक का लोकप्रिय नाम है, जो महाबली भीम के पौत्र तथा घटोत्कच के पुत्र थे। महाभारत में बर्बरीक को भगवान शिव से तीन अमोघ बाण प्राप्त हुए थे, जो इतने शक्तिशाली थे कि वे अकेले ही किसी भी युद्ध को एक क्षण में समाप्त कर सकते थे। कुरुक्षेत्र के महायुद्ध से पूर्व अपने भक्त की परीक्षा लेने हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश धारण कर बर्बरीक से उनका शीश दान में मांगा। बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश काटकर कृष्ण जी को अर्पित कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर कृष्ण जी ने उन्हें वरदान दिया: कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे तथा "हारे का सहारा" कहलाएंगे — निराश एवं पराजित लोगों का सहारा। उनका शीश राजस्थान के सीकर जिले के खाटू नगर में स्थापित है, जो भारत के सर्वाधिक भ्रमित तीर्थ स्थलों में से एक है, विशेषकर फाल्गुन मेले के दौरान।
सम्पूर्ण खाटू श्याम चालीसा (देवनागरी)
दोहा
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार। वर्णौं श्याम बाबा यश, जो दायक फल चार।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं श्याम कृपाल। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विशाल।।
चौपाई
जय जय श्री खाटू के राजा। पूरण करो हमारे काजा।। बाबा श्याम हरो दुःख भारी। जय हो श्याम कृपा अवतारी।।
बाबा तेरो नाम भरोसा। कष्ट मिटे तेरे दर पर आसा।। भीम पुत्र घटोत्कच नंदन। बर्बरीक कहलाए वंदन।।
तीन बाण शिव वर से पाए। जिनसे तीनों लोक कंपाए।। जब महाभारत रण ठाना। कृष्ण जी ने भेद पहचाना।।
बर्बरीक कह्यो रण देखन आयो। जिस पर विजय, उसी संग जाऊं।। कृष्ण जी ने ब्राह्मण रूप बनाया। शीश दान का वचन कराया।।
बिना संकोच शीश कटायो। कृष्ण चरणों में अर्पण पायो।। प्रसन्न भए तब श्याम मुरारी। वर दीन्हों तुम भक्त हितकारी।।
कलियुग में पूजे जाओगे। श्याम नाम से जाने जाओगे।। हारे का सहारा नाम कहाओगे। भक्तन के मन भाओगे।।
खाटू नगरी में शीश समाया। मोरवी नदी तट सुख पाया।। अरावली पर्वत की छाया। शीश प्रकट भक्तन सुख छाया।।
फाल्गुन मास लगे मेला। भक्त करें हर्षित खेला।। दूर दूर से आवें भक्ता। शीश झुकावें हो शुभ रक्षा।।
निष्काम भाव से जो आवे। मन वांछित फल शीघ्र पावे।। जिनका कोई नहीं सहारा। श्याम बाबा तिनको उबारा।।
द्रोपदी की लाज बचाई। महाभारत में कीर्ति पाई।। भक्तवत्सल तुम दीनदयाला। सेवक जान करो प्रतिपाला।।
निशदिन ध्यान धरे जो कोई। ता पर कृपा श्याम की होई।। रोगी निरोगी होई जाई। दुःखी सुखी मन वांछित पाई।।
निर्धन को धन-धान्य प्रदाता। संकटमोचन तुम ही त्राता।। भक्तन के तुम काज संवारो। हारे को सहारा तुम्हारो।।
लख्खी मेला भरे बसंता। दूर करो जन के सब चिंता।। कोटि कोटि भक्त शीश नवावें। मनवांछित वरदान ते पावें।।
तुम्हरी महिमा अगम अपारा। वर्णन करि सकहीं न पारा।। जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर कृपा श्याम की छाई।।
सुख सम्पत्ति सुत सबहीं पावे। दुःख दरिद्र निकट नहिं आवे।। अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। श्याम बाबा जग विख्याता।।
अंत समय रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।। जय श्री श्याम सुनहु अरजाई। करहु कृपा अपनो जन जाई।।
दोहा
श्याम चालीसा पाठ जो, करहिं ध्यान लगाय। खाटू नाथ कृपा करैं, हारे का सहारा पाय।।
अर्थ
आरंभिक दोहे: भक्त खाटू श्याम बाबा की महिमा वर्णन हेतु बुद्धि एवं स्पष्टता की प्रार्थना करता है, अपनी सीमाओं को स्वीकारते हुए देवता की कृपा मांगता है।
परिचय छंद: चालीसा में बर्बरीक को भीम के पौत्र तथा घटोत्कच के पुत्र के रूप में स्थापित किया गया है, जिन्हें भगवान शिव से तीन अमोघ बाण प्राप्त हुए जो किसी भी युद्ध को तत्क्षण समाप्त करने में सक्षम थे।
शीश दान प्रसंग: महाभारत युद्ध से पूर्व बर्बरीक ने घोषणा की कि वे हारने वाली सेना की ओर से युद्ध करेंगे — यह वरदान इतना निर्णायक था कि युद्ध अनुचित रूप से शीघ्र समाप्त हो जाता। कृष्ण जी ने ब्राह्मण वेश में उनकी भक्ति की परीक्षा लेते हुए उनका शीश दान में मांगा। बर्बरीक ने बिना संकोच अपना शीश काटकर अर्पित कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर कृष्ण जी ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे, "हारे का सहारा" कहलाएंगे।
खाटू एवं मेला वर्णन: स्तोत्र में वर्णन है कि बर्बरीक का शीश अरावली पर्वत तथा मोरवी नदी के निकट खाटू में स्थापित है, जहां विशेषकर प्रसिद्ध फाल्गुन मेले (लक्खी मेला) में लाखों भक्त आते हैं तथा शीघ्र कृपा हेतु शीश झुकाते हैं।
कृपा छंद: जो भी निष्काम भाव से खाटू श्याम बाबा के पास आता है उसकी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं; रोगी स्वस्थ होते हैं, दुःखी सुख पाते हैं, तथा निर्धन को समृद्धि मिलती है — क्योंकि वे संकटमोचन हैं, बाधाओं को दूर करने वाले तथा जिनका कोई सहारा नहीं उनके शरणदाता हैं।
समापन छंद: सच्चे मन से नियमित पाठ करने से सुख, समृद्धि, संतान कल्याण तथा दुःख-दारिद्र्य से मुक्ति मिलती है, साथ ही खाटू श्याम बाबा की रक्षक कृपा का वचन दिया गया है।
खाटू श्याम चालीसा का पाठ क्यों करें
निराशाजनक परिस्थितियों में शीघ्र राहत मिलती है, जहां अन्य सभी प्रयास असफल रहे हों — इसीलिए उन्हें "हारे का सहारा" कहा जाता है।
कार्य, व्यवसाय, स्वास्थ्य तथा संबंधों में बाधाएं दूर होती हैं।
बर्बरीक के परम त्याग के उदाहरण से साहस एवं निष्काम भक्ति की प्रेरणा मिलती है।
शुद्ध, विनम्र हृदय से मांगी गई सच्ची, धर्मपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पाठ विधि एवं समय
उत्तम दिन: एकादशी तथा मंगलवार खाटू श्याम बाबा पूजा हेतु विशेष शुभ हैं, साथ ही संपूर्ण फाल्गुन मास (खाटू मेले तक)।
उत्तम समय: प्रातः स्नान के पश्चात् अथवा संध्या आरती के समय, खाटू श्याम बाबा की प्रतिमा के सम्मुख।
विधि: प्रतिमा के सम्मुख शांत मन से बैठें, घी का दीपक जलाएं, पुष्प माला अर्पित करें, तथा इस विश्वास के साथ पाठ करें कि वे किसी सच्चे भक्त को कभी निराश नहीं करते, चाहे परिस्थिति कितनी भी निराशाजनक क्यों न हो।
अर्पण: पंजीरी (आटे, घी व शक्कर से बनी मिठाई), पान के पत्ते तथा पुष्प परम्परागत रूप से अर्पित किए जाते हैं; भक्त एकादशी को उनके सम्मान में सादा व्रत भी रखते हैं।
करणीय एवं अकरणीय
विनम्रता एवं निष्काम भाव से उनकी शरण में जाएं, जैसा कि स्वयं बर्बरीक ने परम त्याग का उदाहरण प्रस्तुत किया।
दैनिक आचरण में ईमानदारी एवं सरलता बनाए रखें।
अधर्मपूर्ण अथवा स्वार्थी उद्देश्यों हेतु उनका आशीर्वाद न मांगें, क्योंकि वे केवल सच्ची, धर्मपूर्ण मनोकामनाओं को आशीर्वाद देने हेतु जाने जाते हैं।
पूजा के दिनों में, विशेषकर फाल्गुन मेले के समय, मांसाहार तथा मदिरा से बचें।
महात्म्य
बर्बरीक के शीश दान की कथा महाभारत से जुड़े सबसे मार्मिक प्रसंगों में से एक है — एक भक्त जिसने बिना एक क्षण भी हिचकिचाए, केवल भक्ति एवं कर्तव्य के लिए अपना शीश अर्पित कर दिया। कृष्ण जी के इस वरदान से कि बर्बरीक कलियुग में श्याम रूप में पूजे जाएंगे, आज खाटू श्याम बाबा उत्तर भारत के सर्वाधिक प्रिय देवताओं में से एक बन गए हैं, हर वर्ष लाखों भक्त राजस्थान के खाटू नगर आते हैं, इस विश्वास के साथ कि जब अन्य सभी द्वार बंद प्रतीत होते हैं, तब भी वे सबसे निराशाजनक प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: खाटू श्याम बाबा कौन हैं? उत्तर: वे भीम के पौत्र बर्बरीक हैं, जिन्होंने महाभारत युद्ध से पूर्व भगवान कृष्ण को अपना शीश अर्पित किया तथा उन्हें कलियुग में श्याम रूप में, हारे का सहारा, पूजे जाने का वरदान मिला।
प्रश्न: खाटू जाने अथवा इस चालीसा का पाठ करने का उत्तम समय कब है? उत्तर: फाल्गुन मेला (सामान्यतः फरवरी-मार्च) सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय है, यद्यपि एकादशी एवं मंगलवार वर्षभर नियमित पूजा हेतु शुभ हैं।
प्रश्न: खाटू श्याम बाबा को "हारे का सहारा" क्यों कहा जाता है? उत्तर: क्योंकि माना जाता है कि वे विशेषकर उन परिस्थितियों में भक्तों को आशीर्वाद एवं सहारा देते हैं जो निराशाजनक प्रतीत होती हैं, जब अन्य सभी प्रयास असफल हो चुके हों।
प्रश्न: क्या कोई भी, परंपरा से परे, खाटू श्याम चालीसा का पाठ कर सकता है? उत्तर: हां, खाटू श्याम बाबा उत्तर भारत में विभिन्न समुदायों एवं परंपराओं में व्यापक रूप से पूजे जाते हैं; केवल सच्ची भक्ति ही आवश्यक है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Khatu Shyam mantra
Om Shri Shyam Devaya Namah
Chant with love and surrender, especially before Shyam Baba katha, aarti, or bhog.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
खाटू श्याम बाबा कौन हैं?
वे भीम के पौत्र बर्बरीक हैं जिन्होंने कृष्ण को शीश अर्पित कर श्याम रूप में पूजे जाने का वरदान पाया।
पाठ का उत्तम समय क्या है?
फाल्गुन मेला सर्वाधिक शुभ है, साथ ही एकादशी व मंगलवार भी।
उन्हें 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वे निराशाजनक स्थितियों में भी भक्तों का सहारा बनते हैं।
क्या कोई भी इसे पढ़ सकता है?
हां, सच्ची भक्ति ही आवश्यक है।
खाटू श्याम बाबा की शीघ्र कृपा चाहते हैं?
कठिन समय में बाबा के आशीर्वाद हेतु विधिवत खाटू श्याम पूजा बुक करें।








