आरती श्री रामचन्द्र जी की का संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व और सांध्य आरती की सही विधि।
आरती श्री रामचन्द्र जी की भगवान विष्णु के सातवें अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम — रामायण के आदर्श नायक — की स्तुति में गाई जाने वाली पारंपरिक आरती है। यह उत्तर भारत के राम मंदिरों में प्रतिदिन सायं, रामलीला के आयोजनों में, तथा रामचरितमानस पाठ एवं सुंदरकांड पाठ की समाप्ति पर गाई जाती है।
संपूर्ण आरती श्री रामचन्द्र जी की (देवनागरी)
आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की। सिया सहित सिंहासन सोहत, दशरथ के घर आनंद जी की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
रत्न जड़ित सिंहासन साजत, चंवर ढुरावत लक्ष्मण जी की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
धूप दीप फल भोग लगावत, जय-जयकार करत सब जन की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
निशिचर वंश विदारन कारण, दुष्ट दलन भव-भय हरने की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
सिया हरण पर सागर बांधे, लंका दहन कपीश दल की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
रावण मारि विभीषण राज्य दियो, जय जय कार भई त्रिभुवन की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
अवध पुरी में राज्य विराजत, हनुमत सेवा चरण कमल की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
जो यह आरती राम की गावे, सुख सम्पत्ति पावे भव भय हरने की। आरती कीजै श्री रामचन्द्र जी की।
भावार्थ
आरती के आरंभ में आह्वान है — "श्री रामचन्द्र जी की आरती करें," जो सीता सहित सिंहासन पर विराजमान हैं, दशरथ के घर के आनंद हैं। लक्ष्मण जी रत्नजड़ित सिंहासन के पास खड़े होकर चंवर डुला रहे हैं, जबकि सभी भक्त धूप-दीप और फल का भोग अर्पित करते हुए जय-जयकार कर रहे हैं।
आगे के पदों में श्री राम के महान कार्यों का स्मरण है — जिन्होंने राक्षस कुल का विनाश किया, दुष्टों का दमन कर संसार का भय हरा। जब सीता का हरण हुआ, तब उन्होंने वानर सेना के साथ समुद्र पर सेतु बांधा, लंका दहन कराई, और रावण वध के पश्चात विभीषण को लंका का राज्य दिया, जिससे तीनों लोकों में जय-जयकार हुई। तत्पश्चात वे अयोध्या लौटकर राज्य करने लगे, जहाँ हनुमान जी सदैव उनके चरण कमलों की सेवा करते हैं।
अंतिम पद में कहा गया है कि जो कोई भी श्री राम की यह आरती गाता है, उसे सुख, सम्पत्ति और संसार के भय से मुक्ति प्राप्त होती है।
यह आरती क्यों गाई जाती है
यह आरती मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम — आदर्श मनुष्य, आदर्श राजा और धर्म के रक्षक — का सम्मान करने के लिए गाई जाती है। यह कुछ ही भक्तिपूर्ण पदों में संपूर्ण रामायण का सार समेटती है — श्री राम का जन्म, सीता विवाह, वनवास, रावण के साथ युद्ध और अयोध्या में उनका धर्मयुक्त शासन। इसका गायन भक्त को सत्य, कर्तव्य, साहस और भक्ति (जैसा हनुमान जी में प्रकट होती है) के उन मूल्यों से जोड़ता है जो रामायण सिखाती है।
कैसे और कब करें
श्री राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष घी या तेल का दीपक जलाएँ। तुलसी दल, पुष्प, धूप और नैवेद्य (फल या मिष्ठान) अर्पित करें। दीपक को हाथ जोड़कर धीरे-धीरे गोलाकार घुमाते हुए आरती गाएँ, और अंत में दीपक की ऊष्मा अपने नेत्रों व मस्तक से स्पर्श करें। यह आरती सामान्यतः प्रतिदिन संध्या में, रामचरितमानस या सुंदरकांड पाठ के अंत में, राम नवमी, विजयादशमी (दशहरा), और दीपावली पर गाई जाती है जब श्री राम के अयोध्या आगमन का उत्सव मनाया जाता है।
लाभ
नियमित पाठ से साहस, मानसिक स्थिरता, बाधाओं से रक्षा तथा घर में धर्म एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है — वही गुण जो स्वयं श्री राम ने संपूर्ण रामायण में प्रकट किए।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Ram mantra
Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram
Chant slowly with devotion for courage, truth, protection, and mental peace.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
आरती श्री रामचन्द्र जी की कब गाई जाती है?
यह प्रतिदिन सायं राम मंदिरों में गाई जाती है, विशेषकर रामचरितमानस या सुंदरकांड पाठ की समाप्ति पर, राम नवमी, दशहरा और दीपावली पर।
क्या यह आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ, श्री राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्ति के समक्ष दीपक जलाकर हाथ जोड़कर इसे गाया जा सकता है; पंडित आवश्यक नहीं है।
इस आरती में क्या वर्णित है?
इसमें सीता सहित सिंहासन पर विराजमान श्री राम, लक्ष्मण जी की सेवा, रावण वध, विभीषण का राज्याभिषेक तथा अयोध्या में श्री राम के धर्मयुक्त शासन का वर्णन है।
राम आरती में हनुमान जी का उल्लेख क्यों है?
हनुमान जी श्री राम के परम भक्त सेवक हैं, और यह आरती उनकी चरण-सेवा को शुद्ध भक्ति के आदर्श के रूप में सम्मानित करती है।
अपने घर में श्री राम का आशीर्वाद आमंत्रित करें
श्री राम को समर्पित पूजा बुक करें या दिव्य छढ़ावा पर और भी पवित्र ग्रंथ पढ़ें।








