आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
ऋण-चक्र, ऋण का बोझ और वित्तीय रुकावट के लिए अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें, अपने परिवार के अनुसार पैकेज चुनें।




प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री ऋणमुक्तेश्वर महादेव उज्जैन में शिप्रा-तट के वाल्मीकि धाम में स्थित हैं — सनातन धर्म का मूल कर्ज-मुक्ति क्षेत्र। स्कन्द पुराण के अनुसार यह वही स्थान है जहाँ अयोध्या के राजा हरिश्चंद्र — त्रेता युग के सबसे सत्य-निष्ठ राजा — ने पीली पूजा विधि सम्पन्न की थी जब वे ऋषि विश्वामित्र के ऋण में आ गए थे। वे अपना राज्य, रानी तारामती, पुत्र रोहित पहले ही खो चुके थे। आत्मा खोने ही वाले थे। महादेव इस लिंग में प्रकट हुए; उनका ऋण उतरा; राज्य लौटा। मन्दिर का नाम स्वयं — ऋण-मुक्त-ईश्वर — का अर्थ है कर्ज-मुक्ति के स्वामी।
आचार्य पूर्ण वैदिक विधि के साथ पीली पूजा सम्पन्न करते हैं — पीली चना दाल अर्पण, हल्दी-गुड़ अभिषेक, लिंग पर पीला पुष्प, फिर महालक्ष्मी आवाहन और सप्त-ऋण-मुक्ति मंत्र पाठ। हर चरण केवल आपके परिवार के नाम-गोत्र में शनिवार मुहूर्त पर सम्पन्न।
भक्त प्रायः चाहते हैं कि पूजा सावधानी से सम्पन्न हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, देवता के समक्ष स्पष्ट संकल्प।
आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
पूजा का हर मंत्र, हर संकल्प-जल, हर अर्पण आपके नाम-गोत्र पर सम्पन्न होता है। किसी और भक्त का नाम बीच में नहीं लिया जाता।
वीडियो भी केवल आपके परिवार के संकल्प का बनता है। किसी और भक्त के नाम के साथ नहीं।
श्री ऋणमुक्तेश्वर महादेव की पीली पूजा सनातन धर्म की मूल कर्ज-मुक्ति विधि है — वही विधि जो राजा हरिश्चंद्र ने ऋषि विश्वामित्र के ऋण में आत्मा-संकट के समय की थी। विधि में पीली चना दाल, हल्दी, गुड़, और पीले पुष्प का अभिषेक लिंग पर, फिर महालक्ष्मी आवाहन और सप्त-ऋण-मुक्ति मंत्र पाठ — केवल आपके नाम-गोत्र पर, चुनी शनिवार मुहूर्त पर।