आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
दीर्घायु और पारिवारिक कलह के लिए अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें, अपने परिवार के अनुसार पैकेज चुनें।




प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री विष्णुपद मंदिर गया में कैनोनिकल वैदिक-स्तर का पितृ-तीर्थ है वायु पुराण गया महात्म्य के अनुसार। विष्णुपद शिला स्वयं विष्णु के चरण-चिह्न से अंकित है, गयासुर-उद्धार के समय की परम्परा।
आचार्य तीन-पिण्ड संकल्प विष्णुपद शिला पर आपके परिवार के नाम-गोत्र में सम्पन्न करते हैं, पिता-पितामह-प्रपितामह के लिए पृथक पिण्ड पितृ-वंश में।
भक्त चाहते हैं कि पूजा सावधानी से हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और देवता के समक्ष स्पष्ट संकल्प।
आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
पूजा का हर मंत्र, हर संकल्प-जल, हर अर्पण आपके नाम-गोत्र पर सम्पन्न होता है। किसी और भक्त का नाम बीच में नहीं लिया जाता।
वीडियो भी केवल आपके परिवार के संकल्प का बनता है। किसी और भक्त के नाम के साथ नहीं।
त्रिपिण्डी श्राद्ध अनुष्ठान श्री विष्णुपद मंदिर तीर्थ क्षेत्र, गया में सम्पन्न होता है — वायु पुराण गया महात्म्य के अनुसार कैनोनिकल वैदिक-स्तर का पितृ-तीर्थ। तीन-पीढ़ी पिण्ड-दान (पिता, पितामह, प्रपितामह) विष्णुपद शिला पर। महाभारत में पाण्डवों का यहाँ श्राद्ध कुरुक्षेत्र के बाद वर्णित है। आपका नाम-गोत्र हर चक्र में आता है, और पूजा आपकी चुनी हुई तिथि पर ही होती है।