प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें, अपने परिवार के अनुसार पैकेज चुनें।




बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
हर की पौड़ी, हरिद्वार, हरि-द्वार है, देवलोक का द्वार, गंगा का सबसे पावन घाट जहाँ माँ गंगा जीवंत माँ रूप में उतरती हैं। यह पूर्वजों के श्राद्ध का परम पावन तीर्थ है। मातृ नवमी, माताओं के दिन, परिवार अपने वंश की स्त्रियों को विश्राम देने और घर पर मातृ-शक्ति का आशीर्वाद माँगने आते हैं।
मातृ नवमी तर्पण हर की पौड़ी के गंगा घाट पर आपके नाम-गोत्र में, मातृ नवमी, वंश की माताओं हेतु रखे दिन संपन्न होता है।
भक्त चाहते हैं कि तर्पण सावधानी से हो, स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और गंगा पर माताओं हेतु स्पष्ट नाम-गोत्र।
मातृ नवमी, अविधवा नवमी भी, पितरों के दिनों का वह एक दिन है जो माताओं, दादियों और उन विवाहित स्त्रियों को समर्पित है जो अपने पति से पहले गईं। इस मातृ नवमी, 4 अक्टूबर 2026 पर, आपके नाम-गोत्र में हर की पौड़ी, स्वर्ग के द्वार पर जहाँ माँ गंगा माँ रूप में बहती हैं, मातृ-पितर हेतु तर्पण अर्पित होता है, माताओं को विश्राम, उनके स्वर्ग-गमन और गंगा की छाया में वंश हेतु।