The complete Annapurna Chalisa in Devanagari with meaning, benefits and the right way to chant it for food security, health and prosperity in the home.
Maa Annapurna is the goddess of food, nourishment and abundance, worshipped as a form of Adi Shakti who ensures that no household ever goes hungry. She is especially revered in Kashi (Varanasi), where the Annapurna temple stands beside Kashi Vishwanath, symbolising the eternal bond between Shiva and the giver of food. The Annapurna Chalisa is chanted by devotees who wish for a home where the kitchen never runs empty, where health and prosperity remain steady, and where gratitude for daily bread is renewed every day.
Complete Annapurna Chalisa (Devanagari)
दोहा
जय अन्नपूर्णा जगत जननि, कृपा करो महारानि। भिक्षा दे भण्डार भरो, सुनो मातु वरदानि।
चौपाई
जय जय जय अन्नपूर्णे माता, तुम हो जग की सुख की दाता। काशी पुरी में वास तुम्हारा, अन्नपूर्णे नाम तुम्हारा।
शिव शंकर की अर्धांगिनी, तुम हो जग जननी गुणखानी। भिक्षा देकर भोले भण्डारी, तुमने पाली सृष्टि सारी।
सोने का पात्र हाथ सुहावे, अन्न भरा जग को दिखलावे। दूजे कर में चम्मच सोहे, भक्तन का मन हरषित होवे।
माँ के दर्शन जो नर पावे, दुख दरिद्र सब दूर भगावे। जो घर अन्न बिना अकुलावे, वहाँ माता कृपा बरसावे।
भूखे को अन्न, प्यासे को पानी, देती हो तुम माँ भवानी। जो कोई भूखा द्वार पे आवे, बिना भोजन खाली न जावे।
तुम बिन जग में कोई न पाले, बिन अन्न सब जीव बेहाले। तुम्हरी महिमा वेद बखानें, ऋषि मुनि सब मिल गुण गानें।
काशी क्षेत्र तुम्हारा प्यारा, विश्वनाथ संग वास तुम्हारा। प्रातः काल जो दर्शन पावे, सुख समृद्धि घर में आवे।
जो नर तेरा ध्यान लगावे, अन्न वस्त्र की कमी न पावे। जो घर दरिद्र दुखी हो भारी, माता वहाँ करे रखवारी।
अकाल पड़े जब धरती ऊपर, तुम करती हो अन्न का प्रसार। धन धान्य से भरे भण्डारे, तेरी कृपा से सब सुख वारे।
नवरात्रि में पूजा होई, हर घर तेरी महिमा गोई। अन्न कूट का भोग लगावें, माता तुमको शीश नवावें।
भक्तों के दुख तुरत मिटावो, अन्न वस्त्र धन खूब बढ़ावो। जो कोई सच्चे मन से ध्यावे, तुरत उसे फल मात दिखावे।
निर्धन को धनवान बनावो, रोगी को आरोग्य दिखावो। संतनि को सुख शांति देवो, गृहस्थन को सम्पन्न करेवो।
तेरी महिमा अपरम्पारा, गावें सुर नर मुनि सब सारा। काशी में जो मरे मनुज कोई, तुम्हरी कृपा से मुक्ति होई।
अन्नपूर्णा तेरा नाम, जपत रहे जो आठों याम। सुख सम्पत्ति घर में आवे, दुख दरिद्र कभी नहीं सतावे।
तुम हो जगदम्बा जग तारिणी, दुष्ट दलन दुख हरनी। भक्तवत्सला दीनदयाला, सबकी सुनती हो तत्काला।
रसोई घर में जहाँ बिराजो, वहाँ अन्न का भण्डार सजो। जो नारी नित तुमको ध्यावे, उसका घर धन धान्य से छावे।
अन्न बिना जो व्याकुल होई, ताकी विपत्ति हरो माँ तोई। जो तुमरे शरणागत आवे, ताकी हर विपदा टल जावे।
सुबह शाम जो आरति गावे, ताके घर सुख सम्पति आवे। जो यह चालीसा नित गावे, अन्न वस्त्र की कमी न पावे।
माँ अन्नपूर्णा दया दिखाओ, संकट से हमको उबारो। निर्धनता का नाश करो माँ, घर घर अन्न का वास करो माँ।
जो कोई श्रद्धा से यह पढ़े, माँ की कृपा उस पर बरसे। मनवांछित फल पावे भारी, जय जय जय माँ अन्नपूर्णा हमारी।
दोहा
अन्नपूर्णा माँ की जय, हो जग में जयकार। भूखे को अन्न मिले सदा, यही हो पहला उपकार।
Quick guide
Before you begin
Mantra
Devi mantra
Om Dum Durgaye Namah
Chant 11, 21, or 108 times according to your time and capacity.
Bhav
Benefits devotees pray for
FAQ
Common questions
Annapurna Chalisa किस दिन पढ़नी चाहिए?
सोमवार, नवरात्रि और पूर्णिमा विशेष शुभ माने जाते हैं, परन्तु श्रद्धा से किसी भी दिन इसका पाठ किया जा सकता है।
क्या इसे रोज़ पढ़ा जा सकता है?
हाँ, नियमित रूप से प्रातःकाल इसका पाठ करना बहुत लाभकारी माना जाता है, विशेषकर घर में अन्न व धन की स्थिरता के लिए।
पाठ के बाद क्या करें?
अन्न या भोजन का दान करना, तथा अन्न की बर्बादी न करने का संकल्प लेना शुभ माना जाता है।
Book Annapurna Puja
Invite Divya Chadhava's pandits to perform Annapurna puja for food security and prosperity in your home.







