आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
विद्या प्राप्ति, परीक्षा सफलता और एकाग्रता के लिए अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें — अपने लिए उपयुक्त पैकेज चुनें।




प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री गढ़कालिका देवी मंदिर उज्जैन में शिप्रा तट पर स्थित है, अवंतिका क्षेत्र का एक देवी पीठ, और परम्परा से विक्रमादित्य-काल से पूजित। इसका विद्या-माहात्म्य कालिदास कथा है — यहाँ देवी विद्या-दायिनी रूप में पूजित हैं, जिन्होंने कवि को वाणी और बुद्धि दी, इसी कारण भक्त अपना विद्या संकल्प इस क्षेत्र में लाते हैं।
अनेक अनुभवी पंडित सरस्वती वंदना, सरस्वती गायत्री जप, अक्षर-अभ्यास, कलम-पुस्तक-अर्पण और सरस्वती हवन सम्पन्न करते हैं। हर चरण केवल आपके परिवार के नाम-गोत्र को समर्पित, आपकी चुनी हुई एक तिथि पर।
भक्त प्रायः चाहते हैं कि पूजा सावधानी से सम्पन्न हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, माँ सरस्वती के समक्ष स्पष्ट संकल्प।
आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
पूजा का हर मंत्र, हर संकल्प-जल, हर अर्पण आपके नाम-गोत्र पर सम्पन्न होता है। किसी और भक्त का नाम बीच में नहीं लिया जाता।
वीडियो भी केवल आपके परिवार के संकल्प का बनता है। किसी और भक्त के नाम के साथ नहीं।
यह सरस्वती विद्या अनुष्ठान केवल आपके परिवार के लिए सम्पन्न होता है, आपकी चुनी हुई तिथि पर। गढ़कालिका देवी मंदिर, उज्जैन पर, वह क्षेत्र जहाँ महाकवि कालिदास को वाणी का वरदान मिला, अनेक अनुभवी पंडित सरस्वती वंदना, अक्षर-अभ्यास, कलम-पुस्तक-अर्पण और सरस्वती हवन सम्पन्न करते हैं — विद्या-दायिनी माँ सरस्वती का आवाहन आपके विद्यार्थी की बुद्धि, स्मृति और वाणी के लिए, केवल आपके नाम-गोत्र पर।