चढ़ावा वह है जो आप देवता के समक्ष अर्पित करते हैं — चुनरी, नारियल, सिंदूर, बेल पत्र, चोला, भोग। यह भक्ति का सबसे सरल और प्राचीन रूप है, और मंदिर पहुँचने पर अधिकांश परिवार सबसे पहले यही अर्पित करते हैं।
ऑनलाइन चढ़ावा अर्पित करने का अर्थ है कि द्रव्य उसी क्षेत्र में ताज़ा लिया जाता है, आचार्य द्वारा आपके नाम और गोत्र से देवता के समक्ष रखा जाता है, और उसकी रिकॉर्डिंग की जाती है। दिव्य चढ़ावा भारत के 24 से अधिक मंदिरों में यह व्यवस्था करता है, और अर्पण पूर्ण होने पर वीडियो आपके व्हाट्सऐप पर पहुँचता है।
हर चढ़ावा उसी द्रव्य से बनता है जो उस देवता का है। हनुमान जी के लिए सिंदूर और चोला। भोले बाबा के लिए बेल पत्र, धतूरा और गंगा जल। माँ के लिए चुनरी, नारियल और शृंगार। प्रथम पूज्य के लिए मोदक और दूर्वा। श्याम बाबा के लिए पेड़ा और चंदन।
यह किसी सामान्य सूची में से चुनना नहीं है। हर सेवा के पृष्ठ पर स्पष्ट लिखा होता है कि कौन-सा द्रव्य, किस मंदिर में, किस तिथि को अर्पित होगा।
चढ़ावा देवता के समक्ष रखा गया अर्पण है, जिसका संकल्प आपके नाम से लिया जाता है। पूजा अथवा अनुष्ठान एक दीर्घ विधि है — निर्धारित संख्या में मंत्र जप, आवश्यकता होने पर हवन, और आरंभ से अंत तक एक निश्चित क्रम जिसका आचार्य पालन करते हैं।
अनेक भक्त किसी पर्व की तिथि पर चढ़ावा से आरंभ करते हैं, और जब कोई विशेष कठिनाई सामने आती है तब पूर्ण अनुष्ठान करवाते हैं। दोनों यहाँ उपलब्ध हैं, और दोनों में वही नाम-गोत्र संकल्प तथा वही वीडियो प्रमाण रहता है।
उज्जैन में श्री महाकालेश्वर और श्री काल भैरव, सीकर में खाटू श्याम जी, कोलकाता में कालीघाट शक्ति पीठ, रामेश्वरम, हरिद्वार में हर की पौड़ी, वृंदावन में बांके बिहारी, गया में विष्णुपद, तारापीठ, नासिक में त्र्यंबकेश्वर तथा अन्य।
कुछ चढ़ावा सेवाएँ किसी पर्व की तिथि से जुड़ी होती हैं और उसी अवधि में खुलती हैं; कुछ वर्षभर उपलब्ध रहती हैं। सेवाओं का पृष्ठ बताता है कि आज क्या खुला है।
चढ़ावा रखे जाने के बाद HD वीडियो रिकॉर्ड कर आपके व्हाट्सऐप पर भेजा जाता है — प्रायः 24 घंटे के भीतर। उसमें आप अपना नाम और गोत्र संकल्प में सुनेंगे।
हम किसी मंदिर या उसके ट्रस्ट से किसी प्रत्यक्ष संबंध का दावा नहीं करते। हम यह कहते हैं कि द्रव्य आपके नाम से, उसी क्षेत्र में अर्पित हुआ, और रिकॉर्डिंग उसे दिखाती है।
चढ़ावा देवता के समक्ष रखा गया अर्पण है — वस्त्र, नारियल, सिंदूर, बेल पत्र, मिष्टान्न अथवा वह विशेष द्रव्य जो उस देवता का है। यह भक्ति का सबसे प्रत्यक्ष रूप है और मंदिर जाने पर अधिकांश परिवार यही अर्पित करते हैं।
जिस मंदिर में चाहें, वहाँ की चढ़ावा सेवा चुनें, अपना नाम और गोत्र भरें, और भुगतान पूरा करें। द्रव्य उसी क्षेत्र में ताज़ा लिया जाता है और नियत तिथि पर आचार्य द्वारा आपके नाम से देवता के समक्ष रखा जाता है।
वास्तव में अर्पित होता है। द्रव्य वस्तुतः खरीदा जाता है और देवता के समक्ष रखा जाता है, और आपके व्हाट्सऐप पर भेजा गया HD वीडियो उस अर्पण को आपके संकल्प के साथ दिखाता है।
चढ़ावा सेवाएँ अल्प राशि से आरंभ होती हैं और सम्मिलित द्रव्यों की संख्या तथा अर्पण के विस्तार के साथ बढ़ती हैं। हर सेवा का मूल्य और उसकी पूर्ण सामग्री भुगतान से पहले दिखाई जाती है।
हाँ। आप किसी भी परिवारजन का नाम और गोत्र भर सकते हैं, और संकल्प उन्हीं के नाम से लिया जाएगा। अनेक भक्त माता-पिता, संतान अथवा पूरे परिवार की ओर से अर्पित करते हैं।
भारत के तीर्थ क्षेत्रों में आज बुकिंग के लिए खुली चढ़ावा सेवाएँ देखें।