आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें — अपने लिए उपयुक्त पैकेज चुनें।




प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री गौरी केदारेश्वर वाराणसी में काशी का संयुक्त गौरी-केदार लिङ्ग हैं स्कंद पुराण के काशी खण्ड के अनुसार — पार्वती और शिव एक ही क्षेत्र में अभिन्न, वैवाहिक सामंजस्य के कैनोनिकल देव।
आचार्य संयुक्त गौरी-केदार अभिषेक बिल्व, पंचामृत और लाल-वस्त्र अर्पण सहित आपके परिवार के नाम-गोत्र पर सम्पन्न करते हैं। हर अर्पण केवल आपके संकल्प के लिए।
भक्त चाहते हैं कि पूजा सावधानी से हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और संयुक्त लिङ्ग के समक्ष स्पष्ट संकल्प।
आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
पूजा का हर मंत्र, हर संकल्प-जल, हर अर्पण आपके नाम-गोत्र पर सम्पन्न होता है। किसी और भक्त का नाम बीच में नहीं लिया जाता।
वीडियो भी केवल आपके परिवार के संकल्प का बनता है। किसी और भक्त के नाम के साथ नहीं।
गौरी केदारेश्वर वैवाहिक सामंजस्य अनुष्ठान श्री गौरी केदारेश्वर तीर्थ क्षेत्र, वाराणसी में सम्पन्न होता है। स्कंद पुराण के काशी खण्ड में इस संयुक्त गौरी-केदार लिङ्ग का वर्णन — पार्वती और शिव एक ही अर्चना में अभिन्न, यही भक्त के विवाह में प्रतिबिम्बित। बिल्व-अर्पण पंचामृत अभिषेक सहित दम्पति का साझा नाम-गोत्र सीधे वहन करती। आपका नाम-गोत्र हर चक्र में आता, अन्य भक्त का नाम साझा नहीं, और पूजा आपकी चुनी हुई तिथि पर।