आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
बुरी नज़र के लिए अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें — अपने लिए उपयुक्त पैकेज चुनें।




प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री कालीघाट मंदिर कोलकाता में प्राचीन आदि गंगा के तट पर स्थित है, बंगाल शाक्त परम्परा का सर्वोच्च काली क्षेत्र। परम्परा इसे उन शक्तिपीठों में गिनती है जहाँ सती के दाहिने चरण की अंगुलियाँ गिरीं, और यहाँ शक्ति करुणामयी माता दक्षिणा काली रूप में पूजित हैं, नकुलेश्वर महादेव उनके भैरव।
अनेक अनुभवी आचार्य उग्र दक्षिणा काली का आवाहन एक ही संकल्प में लाल-जबा और कुमकुम अर्पण सहित शाक्त विधि में करते हैं। हर आवाहन केवल आपके परिवार के नाम-गोत्र को समर्पित।
भक्त प्रायः चाहते हैं कि पूजा सावधानी से सम्पन्न हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, देवी के समक्ष स्पष्ट संकल्प।
आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
पूजा का हर मंत्र, हर संकल्प-जल, हर अर्पण आपके नाम-गोत्र पर सम्पन्न होता है। किसी और भक्त का नाम बीच में नहीं लिया जाता।
वीडियो भी केवल आपके परिवार के संकल्प का बनता है। किसी और भक्त के नाम के साथ नहीं।
यह दक्षिणा काली रक्षा अनुष्ठान केवल आपके परिवार के लिए सम्पन्न होता है, आपकी चुनी हुई तिथि पर। कोलकाता के कालीघाट शक्तिपीठ पर अनेक अनुभवी आचार्य उग्र दक्षिणा काली का आवाहन एक ही संकल्प में करते हैं, केवल आपका नाम-गोत्र उनके रक्षा-कवच में लेते, जब तंत्र-बाधा, काला-जादू भय या बुरी नज़र पूरे परिवार पर छा जाए।