बर्बरीक ने महाभारत युद्ध से पूर्व जीतने वाले पक्ष की ओर से लड़ने के बजाय अपना शीश दान कर दिया। कृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें अपना ही नाम — श्याम — दिया और वरदान दिया कि कलियुग में वे हारे का सहारा कहलाकर पूजे जाएँगे।
यही वरदान भक्तों को खींच लाता है। कोई व्यापार जो चला नहीं, कोई मुकदमा जो विपरीत गया, कोई वर्ष जिसमें कुछ न बना। दिव्य चढ़ावा सीकर के खाटू श्याम जी धाम में चढ़ावा और अनुष्ठान आपके नाम-गोत्र से सम्पन्न कराता है।
1 सेवाएँ, 1 तीर्थ क्षेत्रों में, इस समय बुकिंग के लिए खुली हैं।
पेड़ा, चंदन, निशान (भक्तों द्वारा ले जाई जाने वाली ध्वजा), इत्र और पोशाक सर्वाधिक अर्पित किए जाते हैं। एकादशी उनकी तिथि है, और खाटू का फाल्गुन मेला उनके वर्ष का सबसे बड़ा समागम है।
नीचे दी गई 1 सेवाओं में से एक चुनें, अपना नाम और गोत्र भरें, और भुगतान पूरा करें। निर्धारित तिथि पर आचार्य आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर विधि सम्पन्न करते हैं, और पूर्ण होने पर व्हाट्सऐप पर HD वीडियो भेजा जाता है।
वर्तमान में ये सेवाएँ भारत के 1 तीर्थ क्षेत्रों में सम्पन्न की जाती हैं। हर सेवा के पृष्ठ पर लिखा होता है कि वह किस क्षेत्र में और किस तिथि को होगी।