खाटू श्याम (बर्बरीक) — कृष्ण का अपना नाम और रूप, हारे का सहारा
सीकर का खाटू श्याम मंदिर खाटू श्याम का धाम है — बर्बरीक, भीम के पौत्र, जिन्हें कृष्ण ने अपना ही नाम दिया और यह वरदान दिया कि वे हारे का सहारा कहलाकर पूजे जाएँगे।
यही वरदान भक्तों को यहाँ खींच लाता है। कोई व्यापार जो चला नहीं, कोई मुकदमा जो विपरीत गया, कोई वर्ष जिसमें कुछ न बना — श्याम बाबा उन्हीं के देवता हैं जो एक बार हार चुके हैं। यहाँ का चढ़ावा आपके नाम-गोत्र से अर्पित होता है और वीडियो व्हाट्सऐप पर भेजा जाता है।
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बर्बरीक ने महाभारत युद्ध से पूर्व जीतने वाले पक्ष की ओर से लड़ने के बजाय अपना शीश दान कर दिया। कृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें अपना ही नाम — श्याम — दिया और वरदान दिया कि कलियुग में वे हारे हुए जनों के सहारे के रूप में पूजे जाएँगे। पराजय से जूझ रहे भक्त इसी कारण उनकी शरण आते हैं।
नीचे दी गई 1 सेवाओं में से एक चुनें, अपना नाम और गोत्र भरें, और भुगतान पूरा करें। निर्धारित तिथि पर क्षेत्र के आचार्य आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर विधि सम्पन्न करते हैं।
हाँ। सेवा पूर्ण होने के बाद, प्रायः 24 घंटे के भीतर, आपके व्हाट्सऐप नंबर पर HD वीडियो भेजा जाता है, जिसमें आपका नाम और गोत्र संकल्प में सुना जा सकता है।
दिव्य चढ़ावा पारंपरिक क्षेत्रीय पंडितों के साथ कार्य करता है जो पीढ़ियों से इन क्षेत्रों में भक्तों की सेवा करते आए हैं। हम किसी मंदिर अथवा उसके ट्रस्ट से किसी प्रत्यक्ष संबंध का दावा नहीं करते।