महाकाल — स्वयंभू, दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग, जो स्वयं काल के रूप में पूजे जाते हैं
उज्जैन का श्री महाकालेश्वर तीर्थ क्षेत्र महाकाल का धाम है — स्वयंभू, दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग, जो स्वयं काल के स्वामी और प्राचीन अवंतिका नगरी के अधिपति के रूप में पूजे जाते हैं। बारह ज्योतिर्लिंगों में यही एक दक्षिणमुखी है, और यहाँ प्रातःकाल होने वाली भस्म आरती इस रूप में अन्यत्र कहीं नहीं होती।
भक्त महाकाल की शरण तब आते हैं जब समय ही विपरीत जान पड़े — कोई विलंब जो टूटता नहीं, कोई रोग जो जाता नहीं, अकाल मृत्यु का भय। यहाँ सबसे अधिक रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप की सेवाएँ ली जाती हैं, और दोनों क्षेत्र के आचार्य द्वारा आपके नाम-गोत्र से सम्पन्न होती हैं।
12 सेवाएँ इस समय बुकिंग के लिए खुली हैं।
महाकाल स्वयं काल के रूप में पूजे जाते हैं — समय, और उससे परे रहने वाले। यहाँ का ज्योतिर्लिंग स्वयंभू और दक्षिणमुखी है, और दक्षिण दिशा यम से जुड़ी है। इसी कारण महामृत्युंजय जाप और अपमृत्यु-निवारण हेतु रुद्राभिषेक परंपरा से इसी क्षेत्र में लिए जाते हैं।
नीचे दी गई 12 सेवाओं में से एक चुनें, अपना नाम और गोत्र भरें, और भुगतान पूरा करें। निर्धारित तिथि पर क्षेत्र के आचार्य आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर विधि सम्पन्न करते हैं।
हाँ। सेवा पूर्ण होने के बाद, प्रायः 24 घंटे के भीतर, आपके व्हाट्सऐप नंबर पर HD वीडियो भेजा जाता है, जिसमें आपका नाम और गोत्र संकल्प में सुना जा सकता है।
दिव्य चढ़ावा पारंपरिक क्षेत्रीय पंडितों के साथ कार्य करता है जो पीढ़ियों से इन क्षेत्रों में भक्तों की सेवा करते आए हैं। हम किसी मंदिर अथवा उसके ट्रस्ट से किसी प्रत्यक्ष संबंध का दावा नहीं करते।