बांके बिहारी — निधिवन से स्वयं प्रकट हुए कृष्ण
वृंदावन का श्री बांके बिहारी मंदिर बांके बिहारी का धाम है — कृष्ण का वह स्वयं-प्रकट स्वरूप जो भक्त हरिदास के लिए निधिवन से प्रकट हुआ, और जिनका दर्शन बार-बार खींचे जाते पर्दे के पीछे से झलक रूप में दिया जाता है।
भक्त यहाँ प्रेम, गृह-कलह की शांति, तथा कृष्ण पर्वों — जन्माष्टमी, रक्षाबंधन और ब्रज की तिथियों — पर सेवाएँ लेते हैं। अर्पण आपके नाम-गोत्र से होता है और रिकॉर्डिंग आपको भेजी जाती है।
5 सेवाएँ इस समय बुकिंग के लिए खुली हैं।
दर्शन के समय पर्दा बार-बार खींचा और गिराया जाता है। परंपरा कहती है कि बांके बिहारी की दृष्टि प्रेम से इतनी परिपूर्ण है कि अखंड दर्शन सहज नहीं होता, इसलिए वह झलकों में दिया जाता है। यह इस मंदिर की विशिष्ट परंपराओं में से एक है।
नीचे दी गई 5 सेवाओं में से एक चुनें, अपना नाम और गोत्र भरें, और भुगतान पूरा करें। निर्धारित तिथि पर क्षेत्र के आचार्य आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर विधि सम्पन्न करते हैं।
हाँ। सेवा पूर्ण होने के बाद, प्रायः 24 घंटे के भीतर, आपके व्हाट्सऐप नंबर पर HD वीडियो भेजा जाता है, जिसमें आपका नाम और गोत्र संकल्प में सुना जा सकता है।
दिव्य चढ़ावा पारंपरिक क्षेत्रीय पंडितों के साथ कार्य करता है जो पीढ़ियों से इन क्षेत्रों में भक्तों की सेवा करते आए हैं। हम किसी मंदिर अथवा उसके ट्रस्ट से किसी प्रत्यक्ष संबंध का दावा नहीं करते।