आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
हारे का सहारा और मानसिक तनाव के लिए अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें — अपने लिए उपयुक्त पैकेज चुनें।




प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री रामनाथस्वामी रामेश्वरम में दक्षिणतम ज्योतिर्लिंग है — वह क्षेत्र जहाँ श्रीराम ने लंका-यात्रा से पूर्व लिङ्ग-स्थापन किया था रामायण युद्ध कांड के अनुसार। युगल देविपत्तिनम् केतु-अर्चना का कैनोनिकल स्थल है पद्म पुराण के अनुसार।
आचार्य सप्त-धान्य केतु-अर्चना देविपत्तिनम् में रामनाथस्वामी पंचामृत-स्नान के साथ सम्पन्न करते हैं, हर अर्पण आपके परिवार के नाम-गोत्र पर।
भक्त चाहते हैं कि पूजा सावधानी से हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और देवता के समक्ष स्पष्ट संकल्प।
आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
पूजा का हर मंत्र, हर संकल्प-जल, हर अर्पण आपके नाम-गोत्र पर सम्पन्न होता है। किसी और भक्त का नाम बीच में नहीं लिया जाता।
वीडियो भी केवल आपके परिवार के संकल्प का बनता है। किसी और भक्त के नाम के साथ नहीं।
केतु शान्ति अनुष्ठान श्री रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग तीर्थ क्षेत्र, रामेश्वरम में सम्पन्न होता है, पद्म पुराण के अनुसार देविपत्तिनम् केतु-अर्चना के साथ युगल विधि। रामायण के युद्ध कांड में श्रीराम का लिङ्ग-स्थापन लंका-यात्रा से पूर्व सम्पन्न वर्णित है। दक्षिण-दिशा केतु की मोक्ष-मार्ग परम्परा से जुड़ी। विशेष पूजा में आपका नाम-गोत्र हर चक्र में आता है, किसी और भक्त का नाम साझा नहीं, और पूजा आपकी चुनी हुई तिथि पर ही होती है।