आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
न्यायालय के मामले के लिए अपने वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण करें — अपने लिए उपयुक्त पैकेज चुनें।




प्रत्येक अर्पण आपके नाम-गोत्र के साथ मंदिर में उसी अनुष्ठान में चढ़ाया जाता है।





बहुत से भक्त पूजा के साथ इनमें से एक अवश्य जोड़ते हैं, कृतज्ञता के रूप में, पितरों की स्मृति में, या केवल सहज दान के भाव से।
असली पूजा और चढ़ावा वीडियो देखें, पूजा-पूर्ण होने के बाद भक्तों को WhatsApp पर भेजे जाते हैं।
श्री हरसिद्धि रुद्र सागर तट, उज्जैन में 51 शक्तिपीठों में एक हैं देवी भागवत के अनुसार — सती की कोहनी यहीं गिरी — और विक्रमादित्य की कुलदेवी सम्राज्य-वृद्धि के लिए।
आचार्य देवी लाल-पुष्प अर्चना कुमकुम, चुनरी और अक्षत-अर्पण सहित आपके परिवार के नाम-गोत्र पर सम्पन्न करते हैं। हर अर्पण केवल आपके संकल्प के लिए।
भक्त चाहते हैं कि पूजा सावधानी से हो — स्पष्ट विधि, स्पष्ट वीडियो, और देवी के समक्ष स्पष्ट संकल्प।
आप अपनी शुभ तिथि चुनते हैं। पंडित जी उसी दिन मंदिर में आपके नाम का संकल्प उठाते हैं।
पूजा का हर मंत्र, हर संकल्प-जल, हर अर्पण आपके नाम-गोत्र पर सम्पन्न होता है। किसी और भक्त का नाम बीच में नहीं लिया जाता।
वीडियो भी केवल आपके परिवार के संकल्प का बनता है। किसी और भक्त के नाम के साथ नहीं।
हरसिद्धि वंश-समृद्धि अनुष्ठान श्री हरसिद्धि शक्तिपीठ, रुद्र सागर तट, उज्जैन में सम्पन्न होता है। देवी भागवत में हरसिद्धि 51 शक्तिपीठों में एक — सती की कोहनी यहीं गिरी — और स्कंद पुराण के अवंतिका खण्ड में वे महिषासुर-मर्दिनी स्वरूप, विक्रमादित्य की कुलदेवी, सम्राज्य-वृद्धि के लिए। लाल-पुष्प अर्चना चुनरी सहित परिवार का नाम-गोत्र सीधे वहन करती। आपका नाम-गोत्र हर चक्र में आता, अन्य भक्त का नाम साझा नहीं, और पूजा आपकी चुनी हुई तिथि पर।