लगभग हर हिंदू घर में गाई जाने वाली माता लक्ष्मी की सर्वप्रसिद्ध संपूर्ण आरती, अर्थ, विधि और महत्व सहित।
ॐ जय लक्ष्मी माता संसार भर के हिंदू घरों, मंदिरों और उत्सवों में गाई जाने वाली माता लक्ष्मी की सबसे प्रसिद्ध आरती है। धन, समृद्धि, सौंदर्य और मंगल की देवी की भक्ति में रचित यह आरती हर शुक्रवार, दीपावली के पाँचों दिन, शरद पूर्णिमा तथा लगभग हर लक्ष्मी पूजा के समापन पर गाई जाती है। इसमें देवी को विष्णुप्रिया, जगत जननी, क्षीर सागर से प्रकट हुई तथा धन, अन्न, वस्त्र, साहस और कृपा - हर प्रकार के सौभाग्य की दाता के रूप में वर्णित किया गया है।
संपूर्ण ॐ जय लक्ष्मी माता आरती (देवनागरी)
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॐ जय लक्ष्मी माता
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॐ जय लक्ष्मी माता
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॐ जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॐ जय लक्ष्मी माता
जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॐ जय लक्ष्मी माता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॐ जय लक्ष्मी माता
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॐ जय लक्ष्मी माता
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता उर आनंद समाता, पाप उतर जाता ॐ जय लक्ष्मी माता
अर्थ
हे लक्ष्मी माता, आपकी जय हो। हर (शिव), विष्णु और विधाता (ब्रह्मा) भी दिन-रात आपकी सेवा करते हैं।
आप ही उमा, रमा और ब्रह्माणी हैं, आप ही समस्त जगत की माता हैं। सूर्य और चंद्रमा आपका ध्यान करते हैं, नारद ऋषि आपका गुणगान करते हैं।
आप निर्मल दुर्गा स्वरूपा हैं, सुख-सम्पत्ति की दाता हैं - जो भी आपका ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि सहित धन की प्राप्ति होती है।
आप पाताल में निवास करती हैं, आप ही शुभता की दाता हैं। आप कर्मों के प्रभाव को प्रकाशित करती हैं और भवसागर से पार उतारने वाली त्राता हैं।
जिस घर में आप निवास करती हैं, वहाँ सभी सद्गुण आ जाते हैं, सब कुछ सम्भव हो जाता है और मन कभी नहीं घबराता।
आपके बिना कोई यज्ञ पूर्ण नहीं होता, कोई वस्त्र भी नहीं पाता। खान-पान का समस्त वैभव आपसे ही आता है।
आप शुभ गुणों की सुंदर मंदिर हैं, क्षीरसागर से प्रकट हुई हैं। आपके बिना चौदह रत्नों में से कोई भी प्राप्त नहीं होता।
जो भी नर महालक्ष्मी जी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद समा जाता है और उसके पाप उतर जाते हैं।
आरती करने की विधि और सही समय
लक्ष्मी माता की मूर्ति या चित्र के सामने, संभव हो तो गणेश जी के साथ, घी का दीपक जलाकर, लाल फूल, कुमकुम और कुछ चावल के दाने अर्पित करें और गाते समय धीरे-धीरे घंटी बजाएं। अंतिम पंक्ति पर दीपक को देवी के सामने दक्षिणावर्त घुमाएं, फिर हाथों को लौ के ऊपर से गुजारकर आँखों और मस्तक से स्पर्श करें।
यह आरती प्रतिदिन पूजा के समापन पर गाई जाती है, परंतु शुक्रवार, दीपावली के पाँचों दिन (विशेषकर लक्ष्मी पूजा की रात्रि), शरद पूर्णिमा तथा नवरात्रि में लक्ष्मी पूजा के दिन इसका विशेष महत्व है।
लाभ
श्रद्धापूर्वक यह आरती गाने से माना जाता है कि माता लक्ष्मी की स्थिर एवं कृपामयी उपस्थिति घर में बनी रहती है - केवल धन ही नहीं, बल्कि शांति, स्वास्थ्य, अन्न-सुरक्षा और निर्भय मन जैसी गहरी समृद्धि भी प्राप्त होती है। किसी भी शुभ अनुष्ठान, व्यापार-शुभारंभ या गृहप्रवेश के समापन पर कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भी यह गाई जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ॐ जय लक्ष्मी माता किसने लिखी? यह एक पारंपरिक भक्ति रचना है जो पीढ़ियों से हिंदू घरों में गाई जाती रही है; इसका सटीक रचयिता आरती परंपरा के भक्त कवियों को माना जाता है और अब यह एक सर्वकालिक, सामूहिक रूप से अपनाई गई प्रार्थना मानी जाती है।
इसे गाने का सबसे उत्तम समय क्या है? प्रतिदिन संध्या पूजा में, तथा विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली की लक्ष्मी पूजा और शरद पूर्णिमा पर।
क्या इसे गणेश आरती के साथ गाया जा सकता है? हाँ, परंपरा है कि पहले गणेश आरती गाई जाए (क्योंकि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का आवाहन होता है) और फिर लक्ष्मी आरती, क्योंकि दोनों को धन-प्राप्ति और विघ्न-नाश हेतु साथ पूजा जाता है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Lakshmi mantra
Om Shreem Mahalakshmyai Namah
Chant on Friday or during Lakshmi puja for prosperity, grace, and sattvic abundance.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
ॐ जय लक्ष्मी माता किसने लिखी?
यह एक पारंपरिक भक्ति रचना है जो पीढ़ियों से हिंदू घरों में गाई जाती रही है; इसका सटीक रचयिता आरती परंपरा के भक्त कवियों को माना जाता है और अब यह एक सर्वकालिक, सामूहिक रूप से अपनाई गई प्रार्थना मानी जाती है।
इसे गाने का सबसे उत्तम समय क्या है?
प्रतिदिन संध्या पूजा में, तथा विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली की लक्ष्मी पूजा और शरद पूर्णिमा पर।
क्या इसे गणेश आरती के साथ गाया जा सकता है?
हाँ, परंपरा है कि पहले गणेश आरती गाई जाए और फिर लक्ष्मी आरती, क्योंकि दोनों को धन-प्राप्ति और विघ्न-नाश हेतु साथ पूजा जाता है।
माता लक्ष्मी को अपनी पूजा अर्पित करें
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