सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — नवग्रहों की शांति और कृपा हेतु सम्पूर्ण नवग्रह आरती।
सनातन धर्म में नवग्रह — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — को केवल खगोलीय पिंड नहीं बल्कि साक्षात देवता माना गया है, जो प्रत्येक जीव के कर्मों का फल निर्धारित करते हैं। नवग्रह आरती इन सभी नौ ग्रहों की सम्मिलित कृपा, संतुलन और अनिष्ट-निवारण हेतु गाई जाती है।
सम्पूर्ण नवग्रह आरती (देवनागरी)
ॐ जय नवग्रह देवा, प्रभुजी जय नवग्रह देवा सूर्य चन्द्र मंगल बुध, गुरु शुक्र शनि सेवा ॐ जय नवग्रह देवा
राहु केतु सहित तुम, नवधा रूप धरे हो जगत नियन्ता स्वामी, कर्मफलदाता हो ॐ जय नवग्रह देवा
सूर्यदेव तुम प्रकट, तेज प्रताप दिखाओ चन्द्रमा शीतलता दे, मन को शांत बनाओ ॐ जय नवग्रह देवा
मंगल बल साहस दो, बुध बुद्धि विवेका गुरुदेव ज्ञान सिखाओ, शुक्र सुख देवा एका ॐ जय नवग्रह देवा
शनिदेव न्याय करो प्रभु, कर्म अनुसार फल दो राहु केतु की माया से, हमको तुम रख लो ॐ जय नवग्रह देवा
जो नवग्रह गुण गावे, संकट सब टारे मन इच्छित फल पावे, भव सागर तारे ॐ जय नवग्रह देवा
ॐ जय नवग्रह देवा, प्रभुजी जय नवग्रह देवा जो कोई श्रद्धा से भजे, पावे सुख सेवा ॐ जय नवग्रह देवा
अर्थ
आरती के आरम्भ में सभी नवग्रहों को एक साथ प्रणाम किया गया है — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि तथा छाया ग्रह राहु-केतु — जिन्हें समस्त जगत का नियंता और प्रत्येक जीव के कर्मफल का दाता कहा गया है।
इसके बाद प्रत्येक ग्रह से पृथक-पृथक प्रार्थना की गई है। सूर्यदेव से तेज व प्रताप, चन्द्रमा से मन की शीतलता, मंगल से बल व साहस, बुध से बुद्धि व विवेक, गुरु से ज्ञान, शुक्र से सुख-समृद्धि तथा शनिदेव से न्यायपूर्ण फल की कामना की गई है। राहु-केतु से मोह-माया एवं अनजाने संकटों से रक्षा की प्रार्थना है।
अंतिम पंक्तियों में कहा गया है कि जो श्रद्धापूर्वक नवग्रहों का गुणगान करता है, उसके समस्त संकट दूर होते हैं, मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है, और वह भवसागर से पार हो जाता है।
नवग्रह आरती क्यों की जाती है
ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक जातक की कुंडली जन्म के समय ग्रहों की स्थिति से बनती है। यदि कोई ग्रह कमजोर, पीड़ित हो या उसकी अशुभ दशा-अंतर्दशा चल रही हो, तो जीवन के संबंधित क्षेत्र में विलंब, बाधा, स्वास्थ्य समस्या अथवा मानसिक अशांति उत्पन्न हो सकती है। सनातन परंपरा भय के बजाय भक्ति द्वारा ग्रहों को प्रसन्न करने की शिक्षा देती है — नवग्रह आरती इसका सबसे सरल व सुलभ माध्यम है।
विधि और समय
उत्तम दिन: शनिवार नवग्रह पूजन के लिए विशेष शुभ माना जाता है (क्योंकि शनि नवग्रहों में सबसे कठोर न्यायाधीश माने जाते हैं), परंतु आरती किसी भी दिन, विशेषकर सूर्योदय या सूर्यास्त के समय गाई जा सकती है।
उत्तम समय: प्रदोष काल, ग्रहण के समय की पूजा, नवग्रह शांति पूजा अथवा किसी नए कार्य के आरंभ से पूर्व।
विधि: नवग्रह यंत्र अथवा प्रतिमा के समक्ष घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाएं। पुष्प, अक्षत तथा धूप अर्पित करें। हाथ जोड़कर आरती का पाठ करें, फिर दीपक को दक्षिणावर्त घुमाकर आरती उतारें और अंत में दीपक की ज्योति से हाथ सेंककर प्रसाद स्वरूप नेत्रों पर लगाएं।
आरती के साथ अनेक भक्त प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का नौ अथवा ग्यारह बार जाप भी करते हैं, अथवा गहन उपाय हेतु नवग्रह स्तोत्र का पाठ करते हैं, विशेषकर किसी कठिन दशा के समय।
नवग्रह आरती के लाभ
नियमित पाठ से कुंडली में कमजोर अथवा परस्पर विरोधी ग्रहों में संतुलन आता है, साढ़ेसाती, कालसर्प दोष अथवा मंगल दोष जैसी बाधाओं की तीव्रता घटती है, मन में स्पष्टता व निर्णय-क्षमता बढ़ती है, तथा करियर, स्वास्थ्य, संबंध व धन में निरंतर प्रगति होती है।
करणीय और अकरणीय
श्रद्धा और शांत मन से आरती करें, न कि भय से। पूर्व अथवा उत्तर दिशा में दीपक रखें, स्थान स्वच्छ रखें। किसी ज्ञानी ज्योतिषी अथवा पुरोहित के मार्गदर्शन में अपनी कुंडली के कमजोर ग्रह के अनुरूप सामान्य दान भी करें।
ग्रहों को शत्रु समझकर भय से पूजा न करें — सनातन धर्म में वे देवता हैं जो विनम्रता से किए गए सत्कर्म पर कृपा करते हैं। किसी विशेष तिथि के अंधविश्वास में आरती छोड़ें नहीं; निरंतरता ही सबसे महत्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या नवग्रह आरती कोई भी, अपनी कुंडली की परवाह किए बिना, गा सकता है? उत्तर: हाँ। यह एक सार्वभौमिक कृतज्ञता व रक्षा प्रार्थना है, जिसे कोई भी प्रतिदिन गा सकता है, चाहे उसकी कुंडली में कौन-सा ग्रह बलवान या कमजोर हो।
प्रश्न: क्या नवग्रह आरती किसी गंभीर दोष के लिए ज्योतिषी परामर्श का विकल्प है? उत्तर: नहीं। आरती शांति व कृपा प्रदान करने वाली भक्ति है; किसी गंभीर ग्रह-पीड़ा हेतु योग्य ज्योतिषी से परामर्श के साथ भक्ति जारी रखना उचित है।
प्रश्न: नवग्रह पूजा के लिए कौन-सा दिन श्रेष्ठ है? उत्तर: परंपरागत रूप से शनिवार सर्वाधिक शुभ माना जाता है, यद्यपि रविवार (सूर्य हेतु) भी व्यापक रूप से मनाया जाता है, और श्रद्धापूर्वक किया गया कोई भी दिन स्वीकार्य है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Navagraha mantra
Om Navagrahebhyo Namah
Chant with a calm sankalp while praying for balanced graha shanti and guidance.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या नवग्रह आरती कोई भी गा सकता है?
हाँ, यह एक सार्वभौमिक प्रार्थना है जिसे कोई भी प्रतिदिन गा सकता है।
क्या यह ज्योतिषीय उपाय का विकल्प है?
नहीं, यह उसका पूरक है — गंभीर दोष हेतु ज्योतिषी परामर्श भी लें।
नवग्रह पूजा के लिए कौन-सा दिन श्रेष्ठ है?
शनिवार सर्वाधिक शुभ माना जाता है, पर श्रद्धा से किया कोई भी दिन स्वीकार्य है।
ग्रह शांति चाहिए?
यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह पीड़ित है, तो विधिवत नवग्रह पूजा स्थायी शांति व संतुलन ला सकती है।







