साहस, भूमि-संपत्ति के कार्यों और मांगलिक दोष की शांति के लिए मंगल ग्रह के बीज, वैदिक और गायत्री मंत्र का सम्पूर्ण संग्रह।
वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, भूमि-संपत्ति, भाई-बहन तथा वैवाहिक सामंजस्य का कारक माना जाता है। जब कुंडली में मंगल शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता, शारीरिक बल, अनुशासन तथा भूमि व घर अर्जित करने का साहस प्राप्त होता है। किंतु जब मंगल पीड़ित हो अथवा व्यक्ति मांगलिक हो (मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो), तो संपत्ति संबंधी विवाद, दुर्घटना, क्रोध, विवाह में विलंब अथवा संबंधों में तनाव जैसी कठिनाइयाँ आ सकती हैं।
इस अग्निमय ग्रह को शांत करने, साहस व सुरक्षा जैसे शुभ गुणों को सशक्त करने, तथा पीड़ित अथवा मांगलिक स्थिति की कठिनाइयों को कोमल करने के लिए मंगल मंत्र का जाप किया जाता है। नीचे मंत्र के तीन सर्वाधिक प्रचलित स्वरूप दिए गए हैं — नित्य जाप हेतु लघु बीज मंत्र, ग्रह शांति पूजा में प्रयुक्त वैदिक मंत्र, तथा पूर्ण आवाहन हेतु मंगल गायत्री मंत्र।
बीज मंत्र (सम्पूर्ण)
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
यह बीज मंत्र नित्य जाप हेतु सरलतम व अत्यंत प्रभावशाली स्वरूप है। ॐ आदि सृष्टि की ध्वनि है; क्रां, क्रीं, क्रौं मंगल के बीज अक्षर हैं जो उनकी ऊर्जा को जाग्रत करते हैं; सः सुरक्षा का आवाहन करता है; भौमाय नमः का अर्थ है "भौम को नमन," जो पृथ्वी-पुत्र मंगल का ही एक नाम है।
वैदिक मंत्र (सम्पूर्ण)
ॐ अं अंगारकाय नमः
यह सरल आगम मंत्र मंदिरों में तथा मंगलवार की पूजा में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है। अंगारक मंगल के दीप्तिमान, लाल अंगारे-सम स्वरूप का सूचक है। यह मंत्र सरल होने के कारण बिना किसी औपचारिक दीक्षा के भी कोई भी श्रद्धालु जप सकता है।
मंगल गायत्री मंत्र (सम्पूर्ण)
ॐ अंगारकाय विद्महे शक्ति हस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्
अर्थ: हम उस अग्निस्वरूप अंगारक का ध्यान करते हैं, जिनके हाथ में शक्ति (शूल/बल) है; वह भौम (मंगल) हमारी बुद्धि को प्रकाशित करें तथा सन्मार्ग पर प्रेरित करें। यह स्वरूप विशेषकर मंगलवार को पूर्ण, ध्यानपूर्ण आवाहन हेतु जपा जाता है।
बीज मंत्र का अर्थ
ॐ सृष्टि की मूल ध्वनि है। क्रां, क्रीं, क्रौं मंगल के अपने बीज अक्षर हैं, जिनके विषय में कहा जाता है कि ये सीधे उनकी ऊर्जामय, रक्षक तथा भूमि-दायक शक्तियों को जागृत करते हैं। सः कई ग्रह मंत्रों में पाया जाने वाला सुरक्षात्मक बीज है। भौमाय नमः मंगल को सादर समर्पण है, उन्हें साहस, बल तथा भौतिक सुरक्षा के दाता के रूप में स्वीकार करते हुए यह प्रार्थना कि उनकी अग्निमय ऊर्जा साधक के हित में कार्य करे, न कि संघर्ष अथवा हानि का कारण बने।
मंगल मंत्र क्यों जपें
मंगल भूमि, संपत्ति, अचल संपत्ति के लेन-देन, भाई-बहन, साहस, शारीरिक बल तथा अनेक कुंडलियों में विवाह के समय का भी कारक है। श्रद्धापूर्वक इस मंत्र के जाप को परंपरागत रूप से निम्न प्रकार सहायक माना गया है।
संपत्ति व भूमि संबंधी कार्य: जिन्हें संपत्ति खरीदने, बेचने अथवा रजिस्ट्री कराने में बार-बार विलंब या विवाद का सामना करना पड़ता है, वे प्रायः ऐसे कार्य आरंभ करने से पूर्व मंगल की बाधा-निवारक कृपा हेतु इस मंत्र का जाप करते हैं।
साहस व आत्मविश्वास: विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, रक्षा व पुलिस सेवा के अभ्यर्थियों तथा शारीरिक सहनशक्ति, अनुशासन या कठिन निर्णय लेने का साहस चाहने वाले सभी के लिए।
मांगलिक दोष शांति: जिनकी कुंडली में मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो, उनके लिए उचित उपायों के साथ नियमित जाप विवाह व संबंधों की संबंधित कठिनाइयों को कोमल करने का एक सौम्य, धार्मिक मार्ग है।
क्रोध व उतावलापन: मंगल की अग्नि कभी-कभी शीघ्र क्रोध अथवा जल्दबाज़ी में लिए निर्णयों के रूप में भी प्रकट होती है; यह मंत्र उस अग्नि को रचनात्मक साहस की दिशा में मोड़ने में सहायक है।
ऋण व रक्त-संबंधी स्वास्थ्य: परंपरा में इसे दीर्घकालिक ऋण से राहत तथा रक्त-संबंधी या दुर्घटना-प्रवृत्ति की समस्याओं के लिए भी जपा जाता है, सदैव उचित चिकित्सकीय व आर्थिक सावधानी के साथ।
जाप कैसे और कब करें
सर्वोत्तम दिन: मंगलवार, जो स्वयं मंगल का दिन है, इस साधना को आरंभ व निरंतर करने के लिए सर्वाधिक शुभ है।
सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात, पूर्व अथवा दक्षिण दिशा (मंगल की दिशा) की ओर मुख करके, यथासंभव सूर्योदय से पूर्व अथवा सूर्योदय के दो घंटे के भीतर।
माला: रक्तचंदन की माला अथवा यदि मूंगा रत्न धारण करते हों तो मूंगे की माला उपयुक्त है; अन्यथा कोई भी शुद्ध माला चल सकती है।
संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक पूर्ण माला) जाप करें; विशेष उपाय हेतु 40 दिनों में 11,000 अथवा 21,000 जाप का संकल्प परंपरागत है, जिसे यथासंभव किसी मंगलवार को पूर्ण करें।
आसन व दिशा: लाल आसन (कपड़ा अथवा चटाई) पर बैठें, तथा संभव हो तो पास में एक छोटा लाल पुष्प, लाल वस्त्र अथवा सरसों के तेल का दीपक अर्पण स्वरूप रखें।
पूर्व तैयारी: स्नान करें, स्वच्छ (यथासंभव लाल) वस्त्र धारण करें, तथा अपना नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, एवं प्रयोजन बताते हुए संक्षिप्त संकल्प से आरंभ करें।
करणीय व अकरणीय
शांत, एकाग्र मन से जाप करें, संख्या पूरी करने की जल्दबाज़ी न करें। इस अभ्यास को केवल एक बार करके न छोड़ें, अपितु लगातार कई मंगलवारों तक निरंतर रखें। मंत्र जाप के साथ सरल धार्मिक कार्य भी जोड़ें, जैसे मंगलवार को मसूर दाल आवश्यकतामंदों को दान करना, अथवा गुड़ व लाल वस्त्र का दान करना। इस अवधि में अपना आचरण अनुशासित रखें — अनावश्यक क्रोध, संपत्ति संबंधी विवाद अथवा उतावले निर्णयों से बचें, क्योंकि यह मंत्र उचित कर्म के साथ ही सर्वोत्तम फल देता है।
क्रोध, अन्यमनस्कता अथवा अशुद्ध अवस्था में जाप न करें; रुककर तब लौटें जब श्रद्धापूर्वक जप सकें। इसे किसी जादुई शॉर्टकट के रूप में न लें जो प्रयास का स्थान ले ले — साहस, संपत्ति में सफलता तथा वैवाहिक सामंजस्य के लिए फिर भी आपके स्वयं के प्रयास, धैर्य तथा संपत्ति संबंधी विधिक सतर्कता आवश्यक है। विधिक, आर्थिक अथवा चिकित्सकीय मामलों में योग्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना न छोड़ें — यह मंत्र आध्यात्मिक सहारा है, विकल्प नहीं।
संक्षिप्त महात्म्य
मंगल को भूमि देवी (पृथ्वी माता) के पुत्र के रूप में पूजा जाता है, कुछ पौराणिक वृत्तांतों के अनुसार भगवान विष्णु के साथ उनके संबंध से जन्मे, इसीलिए वे भूमि व संपत्ति के कारक हैं। उन्हें अंगारक के रूप में भी पूजा जाता है, तथा कुछ परंपराओं में हनुमान जी से भी उनका घनिष्ठ संबंध बताया जाता है, जिनकी अग्निमय भक्ति व साहस मंगल के गुणों से मेल खाते हैं — इसीलिए मंगल मंत्र जपने वाले अनेक श्रद्धालु मंगलवार को हनुमान मंदिर भी जाते हैं। परंपरागत रूप से राजा व योद्धा युद्ध से पूर्व साहस व सुरक्षा हेतु मंगल का आवाहन करते थे; आज श्रद्धालु भूमि, कैरियर जोखिम अथवा व्यक्तिगत संकल्प से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों से पूर्व उनका आवाहन करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंगल मंत्र किसे जपना चाहिए? संपत्ति संबंधी कार्यों में विलंब, आत्मविश्वास व साहस की कमी, भाई-बहन या साथी से बार-बार विवाद, अथवा जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष हो, वे सभी श्रद्धापूर्वक इस मंत्र के जाप से लाभ पा सकते हैं।
क्या यह मंत्र अकेले मांगलिक दोष समाप्त कर सकता है? मांगलिक दोष कुंडली-विशेष स्थिति है जिसका वास्तविक प्रभाव व्यक्ति-व्यक्ति में बहुत भिन्न होता है, तथा प्रायः कुंडली के अन्य तत्वों से निरस्त अथवा कम भी हो जाता है। यह मंत्र वास्तविक आध्यात्मिक सहारा है तथा मंगल की कृपा पाने का मार्ग है, किंतु अपनी कुंडली की निश्चित समीक्षा हेतु किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें।
क्या यह मंत्र केवल मंगलवार को ही जपा जा सकता है? मंगलवार सर्वाधिक शक्तिशाली दिन है, किंतु बीज व वैदिक मंत्र नित्य साधना के भाग स्वरूप प्रतिदिन जपे जा सकते हैं; केवल 40-दिवसीय अथवा 11,000-संख्या का गहन संकल्प किसी मंगलवार से आरंभ करना श्रेष्ठ है।
क्या इस मंत्र के जाप हेतु किसी विशेष दीक्षा की आवश्यकता है? इन मंत्रों के लिए किसी औपचारिक दीक्षा की आवश्यकता नहीं है; ये सभी श्रद्धालुओं के लिए खुले हैं। श्रद्धा, स्वच्छता व सम्मान के साथ जाप करें।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Devi mantra
Om Dum Durgaye Namah
Chant 11, 21, or 108 times according to your time and capacity.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
मंगल मंत्र किसे जपना चाहिए?
संपत्ति में विलंब, आत्मविश्वास की कमी, भाई-बहन विवाद अथवा मांगलिक कुंडली वाले श्रद्धापूर्वक इसे जप सकते हैं।
क्या यह मंत्र अकेले मांगलिक दोष समाप्त कर सकता है?
प्रभाव कुंडली अनुसार भिन्न होता है व अन्य तत्वों से प्रायः कम भी होता है; निश्चित राय हेतु योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें।
क्या यह केवल मंगलवार को ही जपा जा सकता है?
मंगलवार श्रेष्ठ है, किंतु बीज व वैदिक स्वरूप प्रतिदिन जपे जा सकते हैं; गहन संकल्प मंगलवार से आरंभ करें।
क्या विशेष दीक्षा आवश्यक है?
नहीं, श्रद्धा व स्वच्छता के साथ कोई भी जप सकता है।
मंगल ग्रह का आशीर्वाद पाएँ
साहस, संपत्ति संबंधी कार्यों व मांगलिक दोष शांति हेतु पूर्ण वैदिक विधि से मंगल ग्रह शांति पूजा बुक करें।







