देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव की धन-समृद्धि व आर्थिक स्थिरता हेतु सम्पूर्ण आरती।
कुबेर देव को सनातन धर्म में देवताओं के कोषाध्यक्ष तथा धन, समृद्धि व भौतिक सुख के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। धनतेरस व दीपावली पर विशेष रूप से, प्रायः देवी लक्ष्मी के साथ, उनकी आराधना की जाती है, तथा गृहस्थ व व्यापारी वर्ग आर्थिक स्थिरता व ऋण-मुक्ति हेतु उन्हें आवाहित करते हैं।
सम्पूर्ण कुबेर देव आरती (देवनागरी)
ॐ जय यक्षराज कुबेर, स्वामी जय यक्षराज कुबेर धन के तुम अधिपति हो, हरते दुख क्लेश ॐ जय यक्षराज कुबेर
उत्तर दिशा के स्वामी, नवनिधि तुम दाता लक्ष्मी संग विराजो, धन वैभव दाता ॐ जय यक्षराज कुबेर
निर्धनता को हरते, देते सुख भंडार भक्तन के घर आकर, बरसाओ धन-धार ॐ जय यक्षराज कुबेर
तिजोरी भरपूर करो प्रभु, कर्ज उतारो सारे व्यापार वृद्धि करो हे, संकट सब टारे ॐ जय यक्षराज कुबेर
जो कोई अर्चन करता, कुबेर जी तेरा पावे धन वैभव सारा, मिटे कष्ट घनेरा ॐ जय यक्षराज कुबेर
धूप दीप नैवेद्य चढ़ाऊं, आरती उतारूं भक्त हृदय की जानो, विनती स्वीकारो ॐ जय यक्षराज कुबेर
ॐ जय यक्षराज कुबेर, स्वामी जय यक्षराज कुबेर जो यह आरती गावे, पावे सुख अपार ॐ जय यक्षराज कुबेर
अर्थ
आरती में कुबेर को यक्षों के राजा तथा धन के अधिपति के रूप में नमन किया गया है, जो अपने भक्तों के दुख-क्लेश हरते हैं। उन्हें उत्तर दिशा का स्वामी तथा नवनिधि का दाता बताया गया है, जो देवी लक्ष्मी के साथ विराजमान होकर भक्तों के घर धन-वैभव की वर्षा करते हैं।
भक्त उनसे तिजोरी भरने, कर्ज उतारने, व्यापार बढ़ाने तथा आर्थिक संकट दूर करने की प्रार्थना करते हैं। अंतिम पंक्तियों में कहा गया है कि जो धूप-दीप-नैवेद्य से श्रद्धापूर्वक कुबेर देव की पूजा करता है, उसे अपार धन-वैभव व कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है।
कुबेर देव की पूजा क्यों की जाती है
पौराणिक मान्यता के अनुसार कठोर तपस्या के पश्चात ब्रह्मा जी ने कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। वे कैलाश पर्वत के उत्तरी भाग तथा अलकापुरी नगरी से दिव्य धन-भंडार की रक्षा करते हैं तथा उत्तर दिशा के दिक्पाल भी माने जाते हैं। व्यापारी, गृहस्थ व संस्थान उन्हें विशेष रूप से अपनी वर्तमान संपत्ति की सुरक्षा तथा धर्मपूर्ण, स्थायी समृद्धि हेतु आवाहित करते हैं — लोभ के लिए नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवनयापन व धर्म-पालन के साधन हेतु।
विधि और समय
उत्तम दिन: प्रत्येक दिन उपयुक्त है, परंतु धनतेरस, दीपावली (लक्ष्मी-कुबेर पूजा), तथा प्रत्येक बुधवार व शुक्रवार विशेष शुभ माने जाते हैं।
उत्तम समय: प्रदोष काल अथवा घर या कार्यस्थल पर लक्ष्मी-कुबेर पूजा के समय।
विधि: पूजा स्थान में कुबेर की प्रतिमा अथवा यंत्र उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्थापित करें, यथासंभव देवी लक्ष्मी के साथ। घी का दीपक जलाएं, श्वेत अथवा पीले पुष्प, अक्षत व मिठाई अर्पित करें। हाथ जोड़कर आरती का पाठ करें, फिर दक्षिणावर्त दिशा में दीपक घुमाकर आरती उतारें। व्यापारी वर्ग में इस पूजा के समय अपनी नकदी पेटी, बही-खाता अथवा तिजोरी को वेदी के निकट रखने की प्रथा प्रचलित है।
कुबेर देव आरती के लाभ
नियमित पाठ से आय में स्थिरता व वृद्धि होती है, बकाया ऋण उतरने में सहायता मिलती है, वर्तमान बचत व संपत्ति सुरक्षित रहती है, तथा आर्थिक असुरक्षा से जुड़ा भय व चिंता दूर होकर संतोष व समृद्धि का भाव जागृत होता है।
करणीय और अकरणीय
पूजा स्थान व नकदी रखने के स्थान को स्वच्छ व व्यवस्थित रखें, क्योंकि कहा जाता है कि कुबेर वहीं निवास करते हैं जहाँ स्वच्छता व अनुशासन हो। भक्ति के साथ ईमानदार परिश्रम भी करें — प्रार्थना से आमंत्रित धन तभी फलता-फूलता है जब उसके साथ सच्चा परिश्रम हो।
केवल लोभवश अथवा दूसरों की हानि के लिए कुबेर की पूजा न करें; यह आरती धर्मपूर्ण समृद्धि की प्रार्थना है, नैतिक परिश्रम का विकल्प नहीं। कृतज्ञता की उपेक्षा न करें — अपनी आय का कुछ अंश दान करना परंपरागत रूप से कुबेर को प्रिय माना गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या कुबेर देव आरती केवल व्यापारियों के लिए है? उत्तर: नहीं, आर्थिक स्थिरता, ऋण-मुक्ति अथवा सामान्य समृद्धि चाहने वाला कोई भी गृहस्थ इसे पढ़ सकता है, केवल व्यापारी वर्ग ही नहीं।
प्रश्न: क्या इसे लक्ष्मी आरती के साथ पढ़ा जा सकता है? उत्तर: हाँ, धनतेरस व दीपावली पूजा में दोनों को साथ पढ़ने की व्यापक परंपरा है, क्योंकि कुबेर व लक्ष्मी की संयुक्त पूजा धन व उसके सदुपयोग हेतु की जाती है।
प्रश्न: कुबेर देव को कौन-सा भोग प्रिय है? उत्तर: घी का दीपक, श्वेत अथवा पीले पुष्प, अक्षत व मिठाई स्वच्छ व ईमानदार हृदय से अर्पित करना उन्हें सर्वाधिक प्रिय माना जाता है, साथ ही अपने आर्थिक व्यवहार को व्यवस्थित रखना।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Lakshmi mantra
Om Shreem Mahalakshmyai Namah
Chant on Friday or during Lakshmi puja for prosperity, grace, and sattvic abundance.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कुबेर देव आरती केवल व्यापारियों के लिए है?
नहीं, आर्थिक स्थिरता चाहने वाला कोई भी गृहस्थ इसे पढ़ सकता है।
क्या इसे लक्ष्मी आरती के साथ पढ़ा जा सकता है?
हाँ, धनतेरस व दीपावली पर दोनों साथ पढ़ने की परंपरा है।
कुबेर देव को कौन-सा भोग प्रिय है?
घी का दीपक, श्वेत/पीले पुष्प, अक्षत व मिठाई ईमानदारी से अर्पित करना प्रिय है।
आर्थिक स्थिरता चाहिए?
विधिवत पूजा द्वारा कुबेर देव व देवी लक्ष्मी का संयुक्त आवाहन करें और स्थायी समृद्धि व मानसिक शांति पाएं।







