बर्बरीक स्वरूप खाटू श्याम बाबा की संपूर्ण आरती, अर्थ और विधि सहित, जिन्हें हारे का सहारा कहा जाता है।
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम में पूजित खाटू श्याम बाबा, भीम के पौत्र बर्बरीक का ही स्वरूप हैं, जिन्होंने महाभारत युद्ध में स्वयं का शीश भगवान कृष्ण को दान कर दिया था। उनकी इस निःस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न होकर कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे, और जो भी हार, दुःख या निराशा में उनकी शरण में आएगा, उसे सहारा मिलेगा। इसीलिए भक्त उन्हें 'हारे का सहारा' कहते हैं। उनकी आरती खाटू धाम सहित देशभर के श्याम मंदिरों में प्रतिदिन संध्या के समय गाई जाती है, विशेषकर एकादशी और फागुन मेले के समय।
संपूर्ण खाटू श्याम बाबा आरती (देवनागरी)
ॐ जय श्री श्याम हरे, स्वामी जय श्री श्याम हरे निज भक्तन के कारण, निज भक्तन के कारण, रूप कृष्ण का धरे ॐ जय श्री श्याम हरे
निष्कलंक शिरोमणि, निष्कलंक शिरोमणि, तीनों लोक में छाए बर्बरीक तनुधारी, बर्बरीक तनुधारी, हारे को हरि कहलाए ॐ जय श्री श्याम हरे
महाभारत के रण में, महाभारत के रण में, शीश किया था दान हारे का सहारा बनकर, हारे का सहारा बनकर, पाया कृष्ण से मान ॐ जय श्री श्याम हरे
खाटू धाम बिराजे, खाटू धाम बिराजे, बाबा श्याम कहाए लाखों भक्त संग आवें, लाखों भक्त संग आवें, फागुन मेला लगाए ॐ जय श्री श्याम हरे
नीले घोड़े के असवार, नीले घोड़े के असवार, हाथ में धनुष बाण भाल तिलक सजे प्यारे, भाल तिलक सजे प्यारे, शीश धरे मुकुट म्यान ॐ जय श्री श्याम हरे
दीन दुखी जन आवें, दीन दुखी जन आवें, तेरे दर पर श्याम मनवांछित फल पावें, मनवांछित फल पावें, पूर्ण होंय सब काम ॐ जय श्री श्याम हरे
धूप दीप नैवेद्य, धूप दीप नैवेद्य, भोग लगाऊं तोय श्याम बाबा की आरती, श्याम बाबा की आरती, जो कोई भक्त गाए सुख सम्पत्ति पाए, मन वांछित फल पाए ॐ जय श्री श्याम हरे
अर्थ
हे श्याम हरि, आपकी जय हो। अपने भक्तों के कल्याण के लिए आपने वह स्वरूप धारण किया जो सदा हारे हुओं का सहारा बना रहा।
आप निष्कलंक शिरोमणि हैं, तीनों लोकों में आपकी महिमा छाई हुई है। बर्बरीक स्वरूप में आपने मानव शरीर धारण किया, और जो हार जाता है, वह आपमें साक्षात् हरि को पाता है।
महाभारत के युद्ध में आपने अपना शीश दान कर दिया, हारे का सहारा बनकर आपने साक्षात् श्रीकृष्ण से यह सम्मान अर्जित किया।
आप खाटू धाम में विराजमान हैं और बाबा श्याम कहलाते हैं। वहाँ लाखों भक्त आते हैं, विशेषकर फागुन के विशाल मेले में।
आप नीले घोड़े पर सवार हैं, हाथ में धनुष-बाण है, भाल पर सुंदर तिलक और शीश पर मुकुट सुशोभित है।
दीन-दुखी जन आपके द्वार आते हैं, हे श्याम, और उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
धूप-दीप और भोग से हम आपकी आरती करते हैं। जो भी भक्त यह आरती गाता है, उसे सुख, सम्पत्ति और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
आरती करने की विधि और सही समय
खाटू श्याम आरती बाबा की मूर्ति या तस्वीर के सम्मुख खड़े होकर, घी का दीपक जलाकर और धूप दिखाकर गाई जाती है। भक्त प्रायः थाली में कुमकुम, चावल, फूल, घंटी और प्रसाद (बताशे या पेड़ा) सजाकर रखते हैं। आरती के दौरान धीरे-धीरे घंटी बजाई जाती है, और अंत में दीपक को मूर्ति के सामने दक्षिणावर्त घुमाकर उसकी लौ पर हाथ सेककर आँखों और मस्तक से स्पर्श किया जाता है।
यह आरती प्रतिदिन संध्या पूजा में गाई जा सकती है, परंतु एकादशी, मंगलवार और खाटू धाम के वार्षिक फागुन मेले तथा बाबा के प्रकट्य उत्सव के समय इसका विशेष महत्व है।
लाभ और महात्म्य
बाबा श्याम को विशेष रूप से आशा के देवता के रूप में जाना जाता है - भक्त उनकी शरण में तब जाते हैं जब उन्हें लगता है कि वे स्वास्थ्य, धन, मुकदमे, संबंध या किसी भी संघर्ष में हार चुके हैं। श्रद्धापूर्वक उनकी आरती गाने से निराशा दूर होकर साहस लौटता है और असंभव-सी लगने वाली स्थितियों में भी मार्ग खुल जाता है। कठिन समय बीतने पर कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भी यह आरती गाई जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खाटू श्याम बाबा कौन हैं? खाटू श्याम बाबा भीम और हिडिम्बा के पौत्र बर्बरीक का ही नाम है, जिन्होंने महाभारत युद्ध से पहले अपना शीश कृष्ण को अर्पित किया था और कलियुग में श्याम नाम से पूजित होने का वरदान पाया।
उन्हें हारे का सहारा क्यों कहा जाता है? क्योंकि उनकी अपनी कथा एक ऐसे युद्ध में सब कुछ न्यौछावर करने की है जिसमें उनका कोई हित नहीं था, इसलिए भक्त मानते हैं कि जो सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसे वे कभी निराश नहीं करते।
यह आरती कब गानी चाहिए? यह प्रतिदिन संध्या पूजा में गाई जा सकती है, विशेषकर एकादशी, मंगलवार और खाटू धाम के फागुन मेले में इसका विशेष महत्व है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Khatu Shyam mantra
Om Shri Shyam Devaya Namah
Chant with love and surrender, especially before Shyam Baba katha, aarti, or bhog.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
खाटू श्याम बाबा कौन हैं?
खाटू श्याम बाबा भीम और हिडिम्बा के पौत्र बर्बरीक का ही नाम है, जिन्होंने महाभारत युद्ध से पहले अपना शीश कृष्ण को अर्पित किया था और कलियुग में श्याम नाम से पूजित होने का वरदान पाया।
उन्हें हारे का सहारा क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उनकी अपनी कथा एक ऐसे युद्ध में सब कुछ न्यौछावर करने की है जिसमें उनका कोई हित नहीं था, इसलिए भक्त मानते हैं कि जो सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसे वे कभी निराश नहीं करते।
यह आरती कब गानी चाहिए?
यह प्रतिदिन संध्या पूजा में गाई जा सकती है, विशेषकर एकादशी, मंगलवार और खाटू धाम के फागुन मेले में इसका विशेष महत्व है।
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