भगवान शिव के उग्र रक्षक स्वरूप काल भैरव की सम्पूर्ण आरती, अर्थ, विधि व उनकी आराधना से मिलने वाली सुरक्षा सहित।
काल भैरव, भगवान शिव के उग्र रक्षक स्वरूप, प्रत्येक पावन नगरी विशेषकर काशी (वाराणसी) के कोतवाल अर्थात रक्षक व अनुशासक माने जाते हैं, जहां उनके दर्शन के बिना कोई भी तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाती है। वे श्वान (कुत्ते) की सवारी करते हैं, त्रिशूल, दण्ड व कमंडल धारण करते हैं, तथा भय, शत्रु, तंत्र-बाधा, बुरी आत्माओं, अकस्मात संकट व अकाल मृत्यु के भय से रक्षा हेतु उनका आह्वान किया जाता है। उनकी आरती अत्यंत श्रद्धा से, प्रायः सांयकाल अथवा रात्रि में गायी जाती है, जब उनकी ऊर्जा सर्वाधिक सक्रिय मानी जाती है।
सम्पूर्ण काल भैरव आरती (देवनागरी)
जय काल भैरव देवा, प्रभु जय काल भैरव देवा। भक्तन के दुःख हरता, शिव अंश स्वयं सेवा॥ जय काल भैरव देवा॥
काशी के कोतवाल तुम, नगर नगर के रखवाले। भूत प्रेत भय हरते, दुष्टन के तुम काल॥ जय काल भैरव देवा॥
श्वान वाहन असि त्रिशूल धारी, दण्ड कमंडल हाथ। भक्तन का सदा सहारा, संकट में देते साथ॥ जय काल भैरव देवा॥
काल रूप शिव अवतारी, तीनों लोक में मान्य। जो शरण तुम्हारी आवे, ताको मिटे अज्ञान॥ जय काल भैरव देवा॥
अष्ट भैरव रूप धरे हो, बटुक रूप भी धारा। भोले भक्तन के रक्षक, तुम ही जग के सहारा॥ जय काल भैरव देवा॥
मदिरा भोग तुम्हें प्रिय है, नारियल अरु फल थार। सच्चे मन से जो पूजे, ताको मिले उद्धार॥ जय काल भैरव देवा॥
काल भैरव की आरती, जो कोई नित गावे। सब भय शोक मिटावे, सुख सम्पत्ति पावे॥ जय काल भैरव देवा॥
भावार्थ
काल भैरव देव की जय हो, आप भक्तों के दुःख हरने वाले हैं, स्वयं शिव के अंश स्वरूप हैं।
आप काशी के कोतवाल हैं, हर नगर के रखवाले हैं; आप भूत-प्रेत का भय दूर करते हैं और दुष्टों के लिए साक्षात काल हैं।
श्वान की सवारी करने वाले, तलवार व त्रिशूल धारण करने वाले, हाथ में दण्ड व कमंडल लिए आप सदैव भक्तों का सहारा हैं और संकट में उनके साथ रहते हैं।
आप शिव के काल स्वरूप अवतार हैं, तीनों लोकों में पूजनीय हैं; जो आपकी शरण में आता है उसका अज्ञान मिट जाता है।
आपने आठ भैरव रूप धारण किए हैं और बटुक रूप भी धारण करते हैं; आप भोले-भक्तों के रक्षक और सम्पूर्ण जगत के सहारे हैं।
नारियल व फल का थाल आपको प्रिय है; जो सच्चे मन से आपकी पूजा करता है उसका उद्धार होता है।
जो कोई काल भैरव की यह आरती नित्य गाता है, उसके सब भय व शोक मिट जाते हैं और वह सुख-सम्पत्ति पाता है।
काल भैरव की पूजा क्यों की जाती है
जब भी भक्त शत्रु, तंत्र-बाधा, अकस्मात भय, कानूनी उलझन अथवा राहु-केतु-शनि जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव से घिरा महसूस करता है, तब काल भैरव का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि उनके समक्ष कोई अन्याय टिक नहीं सकता, और वे विशेष रूप से उन भक्तों की प्रार्थना शीघ्र सुनते हैं जिनके साथ अन्याय हुआ हो अथवा जिन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता हो। उन्हें वह रक्षक देवता भी माना जाता है जिनकी पूजा अथवा स्मरण किसी भी शक्तिपीठ अथवा ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्रवेश से पूर्व करना चाहिए, क्योंकि वे पावन शक्ति के द्वार पर प्रहरी के रूप में खड़े रहते हैं।
आरती की विधि व समय
यह आरती सांयकाल, विशेषकर रविवार व काल भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी, उनका प्रमुख पर्व) के दिन करना सर्वोत्तम है। काल भैरव की मूर्ति अथवा चित्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं, नारियल, काले तिल अथवा उड़द दाल अर्पित करें, तथा घंटी बजाते हुए पूर्ण एकाग्रता से समस्त पद गाएं। आरती आरम्भ करने से पूर्व कुछ बार "ॐ काल भैरवाय नमः" का जाप करना परंपरागत है। अनेक भक्त इस दिन एक काले श्वान को भोजन कराते हैं, जो भगवान के वाहन को अर्पण स्वरूप है।
करणीय व अकरणीय
काल भैरव के समक्ष श्रद्धा व निर्भयता से जाएं, क्योंकि वे सच्चे व सरल हृदय वालों की रक्षा करते हैं। परंपरा में निर्धारित वस्तुएं ही अर्पित करें — नारियल, तिल, उड़द, काला वस्त्र — तथा जो सच्ची भक्ति परंपरा का भाग न हो उससे बचें। किसी को हानि पहुंचाने की मंशा से यह पूजा कदापि न करें; काल भैरव की शक्ति सुरक्षा व न्याय के लिए है, निर्दोष को हानि पहुंचाने के लिए कभी नहीं। पूजा के समय शरीर व स्थान की स्वच्छता बनाए रखें, तथा संकल्प-आधारित पूजा के दिन मदिरा या मांसाहार से बचें, जब तक कि यह किसी विशिष्ट मंदिर परंपरा का भाग न हो जिसमें आप व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शित हों।
काल भैरव की महिमा
शैव परंपरा के अनुसार काल भैरव तब प्रकट हुए जब भगवान शिव ने ब्रह्मा के अहंकार को शांत करने हेतु उग्र रूप धारण किया, और तभी से वे धर्म व काल के रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं। उनके समक्ष स्वयं यमराज भी नतमस्तक होते हैं — इसीलिए उन्हें "काल" भैरव कहा जाता है, अर्थात काल व मृत्यु को नियंत्रित करने वाले। भक्तों का विश्वास है कि काल भैरव की सच्ची आराधना अकाल मृत्यु के भय को दूर करती है तथा जीवन की कठिनतम परीक्षाओं में साहस, सुरक्षा व न्याय प्रदान करती है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Kaal Bhairav mantra
Om Kaal Bhairavaya Namah
Chant with a clean sankalp, especially on the advised remedy day and time.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
काल भैरव कौन हैं?
काल भैरव भगवान शिव का उग्र रक्षक स्वरूप हैं, जो पावन नगरियों विशेषकर काशी के रक्षक माने जाते हैं तथा भय, शत्रु व संकट से सुरक्षा हेतु उनका आह्वान किया जाता है।
काल भैरव अष्टमी कब होती है?
यह मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को होती है, तथा उनका सबसे प्रमुख पर्व दिवस है।
काल भैरव को कौन-सा भोग प्रिय है?
नारियल, काले तिल, उड़द दाल, सरसों के तेल का दीपक व काला वस्त्र पारंपरिक अर्पण हैं। इस दिन श्वान को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
क्या काल भैरव पूजा सभी के लिए सुरक्षित है?
हां, जब सच्चे व श्रद्धापूर्ण मन से तथा किसी को हानि पहुंचाने की मंशा के बिना की जाए, तो काल भैरव पूजा पूर्णतः सुरक्षित है और केवल सुरक्षा व न्याय हेतु है।
काल भैरव की सुरक्षा पाएं
भय, शत्रु व नकारात्मक प्रभावों से रक्षा हेतु भगवान काल भैरव की पूजा अर्पित करें।







