आदि शक्ति जगदम्बा को समर्पित सम्पूर्ण जय आद्य शक्ति आरती, अर्थ, विधि व उनकी कृपा से मिलने वाले आशीर्वाद सहित।
जय आद्य शक्ति आदि शक्ति — उस आदि पराशक्ति — को समर्पित सर्वाधिक प्रिय व शक्तिशाली आरतियों में से एक है, जिनसे महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती प्रकट होती हैं, तथा जो अंततः दुर्गा, अम्बा व माँ के प्रत्येक स्वरूप के साथ एकरूप हैं। सदियों पूर्व रचित यह आरती गुजरात, राजस्थान व सम्पूर्ण उत्तर भारत में समान श्रद्धा से गायी जाती है। यह नवरात्रि, शुक्रवार तथा प्रत्येक शक्तिपीठ में सर्वाधिक गायी जाने वाली देवी आरतियों में से एक है। इसके पद माँ की ब्रह्मांडीय शक्ति, उनके अनेक स्वरूप तथा अपने बच्चों के प्रति उनकी असीम करुणा का वर्णन करते हैं।
सम्पूर्ण जय आद्य शक्ति आरती (देवनागरी)
जय आद्य शक्ति, माँ जय आद्य शक्ति। अखंड ब्रह्मांड दीपावो, ज्योत तुम्हारी जगती॥ जय आद्य शक्ति॥
त्रिगुण शक्ति महामाया, तुम ही जगत की रचनाहारी। पालन पोषण करती हो माँ, संहार भी तुम्हीं करती॥ जय आद्य शक्ति॥
महाकाली महालक्ष्मी, महासरस्वती रूप तुम्हारा। तीनों गुण की स्वामिनी माँ, सृष्टि तुम्हीं से सारा॥ जय आद्य शक्ति॥
ब्रह्माणी रुद्राणी माता, वैष्णवी नाम तुम्हारा। शक्ति रूप में जग में विचरो, दुष्टों का करती संहारा॥ जय आद्य शक्ति॥
सिंह वाहन पर सवार हो माँ, त्रिशूल हाथ तुम्हारे। भक्तन के सब कष्ट मिटातीं, विपत्ति के हो निवारे॥ जय आद्य शक्ति॥
मधु कैटभ को मार गिराया, महिषासुर का किया संहार। शुम्भ निशुम्भ का नाश कर माता, देवों को दिया उद्धार॥ जय आद्य शक्ति॥
नवरात्रि में तेरा पूजन, घर घर होता माता। जो श्रद्धा से भक्ति करे, वो सुख संपत्ति पाता॥ जय आद्य शक्ति॥
अम्बे माँ जगदम्बे तेरी, महिमा अपरम्पार। जो यह आरती नित गावे, उसका हो बेड़ा पार॥ जय आद्य शक्ति॥
भावार्थ
आदि शक्ति की जय हो, हे माँ, आद्य शक्ति की जय हो; आप अपने तेजस्वी प्रकाश से सम्पूर्ण अनंत ब्रह्मांड को आलोकित करती हैं।
हे महामाया, त्रिगुण की शक्ति, आप ही इस जगत की रचयिता हैं; आप ही इसका पालन-पोषण करती हैं और आप ही इसका संहार भी करती हैं।
आपके स्वरूप महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती हैं; आप त्रिगुण की स्वामिनी हैं और सम्पूर्ण सृष्टि आपसे ही उत्पन्न होती है।
हे माता, आप ब्रह्माणी, रुद्राणी व वैष्णवी नाम से जानी जाती हैं; आप शक्ति रूप में इस जगत में विचरण करती हैं और दुष्टों का संहार करती हैं।
हे माँ, सिंह वाहन पर सवार, हाथ में त्रिशूल धारण किए आप अपने भक्तों के सब कष्ट मिटाती हैं और विपत्तियों का निवारण करती हैं।
आपने मधु व कैटभ का वध किया, महिषासुर का संहार किया; हे माता, शुम्भ-निशुम्भ का नाश कर आपने देवताओं का उद्धार किया।
नवरात्रि में हे माता आपका पूजन घर-घर होता है; जो श्रद्धा से आपकी भक्ति करता है वह सुख-सम्पत्ति पाता है।
हे अम्बे माँ, हे जगदम्बे, आपकी महिमा अपरम्पार है; जो यह आरती नित्य गाता है उसका जीवन-बेड़ा पार हो जाता है।
आदि शक्ति की पूजा क्यों की जाती है
आदि शक्ति सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्रोत हैं — ब्रह्मा, विष्णु व महेश भी सृष्टि, पालन व संहार के अपने कार्य करने से पूर्व उन्हीं से अपनी शक्ति ग्रहण करते हैं। उन्हें उस माँ के रूप में पूजा जाता है जो अपने बच्चों को हर कठिनाई से बचाती है, भय के समक्ष साहस प्रदान करती है तथा उन बाधाओं को दूर करती है जिन्हें कोई अन्य शक्ति दूर नहीं कर सकती। यह आरती विशेष रूप से प्रिय है क्योंकि इसमें माँ के अनेक स्वरूपों का सीधा नाम लिया गया है, जो भक्तों को स्मरण कराता है कि दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती व अम्बा अलग-अलग देवियां नहीं बल्कि एक ही माँ के भिन्न-भिन्न स्वरूप हैं।
आरती की विधि व समय
जय आद्य शक्ति परंपरागत रूप से सांयकाल, विशेषकर शुक्रवार तथा नवरात्रि की नौ रातों (चैत्र व शारदीय दोनों नवरात्रि) में गायी जाती है। देवी के चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएं, लाल पुष्प, कुमकुम व मिष्ठान अर्पित करें, तथा हाथ में घंटी लेकर दीपक को धीरे-धीरे दक्षिणावर्त घुमाते हुए आरती गाएं। अनेक परिवार दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा अथवा किसी भी देवी पूजा के पश्चात इसे समापन आरती के रूप में गाते हैं, क्योंकि यह माँ के सबसे सम्पूर्ण व सार्वभौमिक स्वरूप का सम्मान करती है।
करणीय व अकरणीय
माँ के समक्ष विनम्रता व खुले हृदय से जाएं; कहा जाता है कि वे विस्तृत अनुष्ठान की अपेक्षा सच्ची भक्ति पर सबसे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। औपचारिक पूजा करते समय लाल अथवा उज्ज्वल रंग धारण करें, क्योंकि यह देवी पूजा हेतु शुभ माना जाता है। पूजा स्थल स्वच्छ रखें तथा पूजा के दिन मांसाहार व मदिरा से बचें। आरती को यांत्रिक ढंग से अथवा शीघ्रता से न गाएं — प्रत्येक पद के भाव को अनुभव करते हुए गाएं। यथासंभव पूरे परिवार को साथ शामिल करें, क्योंकि यह आरती परंपरागत रूप से एक पारिवारिक, सामूहिक अभ्यास है।
आदि शक्ति की महिमा
देवी माहात्म्य तथा अन्य शाक्त ग्रंथों में वर्णन है कि आदि शक्ति ने मधु-कैटभ, महिषासुर व शुम्भ-निशुम्भ जैसे राक्षसों का वध करने हेतु प्रकट होकर, जब स्वयं देवता भी उन्हें परास्त नहीं कर सके, प्रत्येक बार सृष्टि में धर्म व संतुलन पुनर्स्थापित किया। यह आरती उन्हीं विजयों का स्मरण कराती है, तथा भक्तों को यह याद दिलाती है कि माँ की शक्ति कोई दूर की गाथा नहीं बल्कि आज भी सच्चे मन से पुकारने वाले हर भक्त के लिए सुलभ जीवंत शक्ति है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Devi mantra
Om Dum Durgaye Namah
Chant 11, 21, or 108 times according to your time and capacity.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
इस आरती में आदि शक्ति कौन हैं?
आदि शक्ति वह पराशक्ति हैं जिनसे महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती प्रकट होती हैं, तथा जो दुर्गा, काली, लक्ष्मी व अम्बा के साथ एकरूप हैं।
जय आद्य शक्ति कब गानी चाहिए?
यह परंपरागत रूप से सांयकाल, विशेषकर शुक्रवार व नवरात्रि की नौ रातों में गायी जाती है, यद्यपि इसे भक्तिपूर्वक किसी भी दिन गाया जा सकता है।
क्या यह आरती अन्य देवी पूजाओं के बाद गायी जा सकती है?
हां, अनेक परिवार इसे दुर्गा, लक्ष्मी अथवा सरस्वती पूजा के पश्चात समापन आरती के रूप में गाते हैं, क्योंकि यह माँ के सम्पूर्ण, सार्वभौमिक स्वरूप का सम्मान करती है।
इस आरती के समय क्या अर्पित करें?
घी का दीपक, लाल पुष्प, कुमकुम व एक साधारण मिष्ठान पारंपरिक अर्पण हैं, साथ ही सच्ची भक्ति।
जगदम्बा का आशीर्वाद पाएं
सुरक्षा, साहस व मनोकामना पूर्ति हेतु आदि शक्ति / दुर्गा माँ की पूजा अर्पित करें।







