गणेश चालीसा का संपूर्ण पाठ अर्थ, पाठ विधि, लाभ एवं प्रश्नोत्तर सहित — विघ्न-बाधाओं के नाश हेतु।
भगवान गणेश, शिव-पार्वती के गजमुख पुत्र, प्रत्येक अनुष्ठान में सर्वप्रथम पूजित होते हैं — विघ्नहर्ता के रूप में और बुद्धि, समृद्धि तथा शुभ कार्यों के आरंभ के देवता के रूप में। गणेश चालीसा हिंदू घरों में सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली भक्ति-रचनाओं में से एक है, जो उनके स्वरूप, जन्म-कथा एवं भक्त के मार्ग की हर बाधा दूर करने की शक्ति का वर्णन करती है।
संपूर्ण गणेश चालीसा (देवनागरी)
दोहा जय गणपति सद्गुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥ जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥ वक्रतुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥ राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥ पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्ध सुफूलं॥ सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥ धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व विख्याता॥ ऋद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥ कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगलकारी॥ एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥ भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा॥ अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥ अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥ मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥ गणेश जन्म की कथा सुहाई। कहत सुनत अघ दूर पराई॥ एक समय शिव अंतर्धाना। चली गौरी संग सखी सुजाना॥ मैल देह के डारि सुहायो। तेहि ते बालक रूप उपायो॥ नाम गणेश गौरि तब कीन्हा। द्वार बैठाय गमन तब लीन्हा॥ तबहिं शिव आवत तहँ भयऊ। बालक देखि अति चकित होयऊ॥ रोक्यो शिव को बालक ज्ञानी। महादेव क्रोधित तब मानी॥ पश्छित काटि सिर सुत घातयो। गौरी विलख करी बहु त्रासयो॥ तुरत गजानन शीश चढ़ायो। प्राण मंत्र पढ़ि शिव जियायो॥ नाम गजानन शम्भु धरायो। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि पायो॥ बुद्धि परीक्षा जबहिं भई। गणपति तुम सब भांति ठई॥ मात-पिता प्रति परिक्रमा कीन्हा। सृष्टि परिक्रम फल यह लीन्हा॥ तुम्हरो नाम सकल जग गावै। ताते तुरत प्रथम पूज्य कहावै॥ अस मूषक वाहन तुम राजा। करत उपाय सकल तुम काजा॥ मोदक फल तुम अति ही भावा। तिनको भोग तुरन्त लगावा॥ सकल भूमि पर छत्र तुम्हारा। सब पर करहु कृपा तुम भारा॥ मूषक वाहन सुन्दर लागे। जग में गणपति नाम प्रताप जागे॥ जय जय जय गणपति गुण गावे। बुद्धि प्रदायक ताहि बतावे॥ जय जय जय गजबदन सुनंदा। सुत गणराज करत सब वंदा॥ तुम बिनु सृष्टि सफल नहिं होई। तुम बिनु शुभ काज न होई कोई॥ तुम बिनु सिद्धि न ऋद्धि पावै। तुम बिनु शुभ मुहूर्त न आवै॥ नवग्रह ग्रह बाधा जब होई। तुम्हरे भजन ते नासे सोई॥ जो कोई सम्मुख यह चालीसा। पढ़े प्रेम सहित रस भरी॥ तिनकी सकल कामना पूरन। हो सो प्रथम पूज्य गणराजा॥ मोहि विशेष कृपा जो कीजै। तिनको यह चालीसा दीजै॥ नित नियम कर प्रातः जो गावे। मन वांछित ताहि फल पावे॥ अस गणेश सब भक्तन प्यारा। सबकी सुनि करते हैं सारा॥ जयति जयति जय गणपति देवा। जय जय जय शिव सुत सुखदेवा॥
दोहा श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करे धरि ध्यान। नित नव मंगल गृह बसे, लहै जगत सम्मान॥
अर्थ
प्रारंभिक दोहे में गणपति को सद्गुणों का सदन, कवियों में श्रेष्ठ, दयालु मुख वाले, विघ्नहर्ता एवं मंगलकारी तथा गिरिजा (पार्वती) के दुलारे कहकर नमन किया गया है।
प्रथम चौपाइयों में उनके तेजस्वी स्वरूप का वर्णन है — गजमुख, वक्र सूंड, ललाट पर त्रिपुण्ड तिलक, मणि-मुक्ताओं की माला, स्वर्ण मुकुट, विशाल नेत्र, तथा चार हाथों में पुस्तक, कुठार, त्रिशूल एवं मोदक। वे पीताम्बर धारण करते हैं और उनके चरणों की पूजा मुनि भी करते हैं। वे शिव-पुत्र, षडानन (कार्तिकेय) के भ्राता, गौरी के दुलारे हैं, ऋद्धि-सिद्धि उनकी सेवा में रहती हैं तथा मूषक उनका वाहन है।
मध्य भाग में उनकी जन्म-कथा है — किस प्रकार पार्वती ने पुत्र-प्राप्ति हेतु कठोर तप किया, अपने शरीर के मैल से गणेश को उत्पन्न कर द्वार पर रखवाली हेतु बिठाया, अनजाने में शिव ने क्रोधवश उनका शीश काट दिया, और गौरी के विलाप को देखकर शिव ने गजमुख जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया तथा गजानन नाम देकर उन्हें प्रथम पूज्य का पद प्रदान किया।
आगे की चौपाइयों में वर्णन है कि देव-भ्राताओं की बुद्धि-परीक्षा में गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा करके ही सृष्टि-परिक्रमा का फल पाया — यह दर्शाता है कि माता-पिता का सम्मान ही समस्त सृष्टि की परिक्रमा के समान है — और इस प्रकार वे प्रथम पूज्य कहलाए, जिन्हें हर शुभ कार्य के आरंभ में सबसे पहले पूजा जाता है।
अंतिम चौपाइयों में कहा गया है कि उनकी कृपा बिना कोई सृष्टि सफल नहीं होती, कोई शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता, ऋद्धि-सिद्धि नहीं मिलती और शुभ मुहूर्त नहीं आता। श्रद्धापूर्वक इस चालीसा के पाठ से ग्रह-बाधा नष्ट होती है और प्रतिदिन प्रातः पढ़ने वाले भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। अंतिम दोहे में वचन है कि जो ध्यानपूर्वक यह चालीसा पढ़ता है, उसके घर नित नई मंगलता बसती है और जगत में सम्मान मिलता है।
गणेश चालीसा क्यों पढ़ें
गणेश जी को हर नए कार्य के आरंभ में स्मरण किया जाता है — नया घर, व्यवसाय, यात्रा, विवाह, परीक्षा अथवा पूजा — ताकि बाधाएँ आने से पूर्व ही दूर हो जाएँ। यह चालीसा विशेष रूप से नए आरंभों में सफलता, विलंब व बाधाओं के निवारण, बुद्धि व निर्णय-क्षमता में सुधार तथा पारिवारिक सुख-समृद्धि हेतु पढ़ी जाती है।
पाठ विधि एवं समय
बुधवार गणेश पूजा हेतु विशेष शुभ माना जाता है, साथ ही चतुर्थी तिथि भी। स्नान के पश्चात पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें, घी का दीपक जलाएँ, दूर्वा, लाल पुष्प एवं मोदक या लड्डू अर्पित करें और शांत चित्त से चालीसा का पाठ करें, अधिमानतः प्रातःकाल किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ से पहले।
करें और न करें
गणेश जी को तुलसी दल अर्पित करने से बचें, क्योंकि परंपरा के अनुसार यह उन्हें प्रिय नहीं है (अन्य अधिकांश देवताओं के विपरीत)। पाठ का स्थान स्वच्छ रखें और पूरी चालीसा एक ही बैठक में पूर्ण करना उत्तम माना जाता है, बीच में न रोकें।
लाभ
नियमित पाठ से कार्यक्षेत्र, व्यवसाय, शिक्षा व पारिवारिक मामलों की बाधाएँ दूर होती हैं; बुद्धि, स्मरण-शक्ति व निर्णय-क्षमता तीक्ष्ण होती है; नए आरंभों में शुभता आती है; और घर में ऋद्धि (समृद्धि) व सिद्धि (सफलता) दोनों का वास होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश चालीसा के लिए कौन-सा दिन सर्वोत्तम है? बुधवार व चतुर्थी तिथि विशेष शुभ मानी जाती है, परंतु इसे प्रतिदिन, अधिमानतः प्रातःकाल पढ़ा जा सकता है।
इसे कितनी बार पढ़ना चाहिए? प्रतिदिन एक बार श्रद्धापूर्वक पढ़ना पर्याप्त है; महत्वपूर्ण कार्यों से पूर्व कई भक्त इसे तीन, सात या ग्यारह बार पढ़ते हैं।
हर पूजा में गणेश जी को सर्वप्रथम क्यों पूजा जाता है? अपने भ्राता कार्तिकेय के साथ हुई बुद्धि-परीक्षा में माता-पिता की परिक्रमा को संपूर्ण सृष्टि की परिक्रमा के समान मानकर उन्होंने यह पद जीता और प्रथम पूज्य कहलाए।
क्या बच्चों की पढ़ाई के लिए गणेश चालीसा पढ़ी जा सकती है? हाँ, गणेश जी बुद्धि व विद्या के देवता हैं, अतः विद्यार्थी परीक्षा व महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसरों से पूर्व स्पष्टता व आत्मविश्वास हेतु सामान्यतः इसका पाठ करते हैं।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Ganesh mantra
Om Gam Ganapataye Namah
Chant before beginning the puja, aarti, study, business, or any new work.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश चालीसा के लिए कौन-सा दिन सर्वोत्तम है?
बुधवार व चतुर्थी तिथि विशेष शुभ मानी जाती है, परंतु इसे प्रतिदिन भी पढ़ा जा सकता है।
इसे कितनी बार पढ़ना चाहिए?
प्रतिदिन एक बार श्रद्धापूर्वक पढ़ना पर्याप्त है; महत्वपूर्ण कार्यों से पूर्व कई भक्त इसे तीन, सात या ग्यारह बार पढ़ते हैं।
हर पूजा में गणेश जी को सर्वप्रथम क्यों पूजा जाता है?
माता-पिता की परिक्रमा को संपूर्ण सृष्टि की परिक्रमा मानकर उन्होंने बुद्धि-परीक्षा जीती और प्रथम पूज्य कहलाए।
क्या बच्चों की पढ़ाई के लिए गणेश चालीसा पढ़ी जा सकती है?
हाँ, गणेश जी बुद्धि के देवता हैं, अतः विद्यार्थी परीक्षा से पूर्व सामान्यतः इसका पाठ करते हैं।
गणेश जी के आशीर्वाद से आरंभ करें
बाधाओं को दूर कर नए आरंभ में शुभता लाने हेतु गणेश पूजा बुक करें।







