भगवान शिव के बाल-स्वरूप बटुक भैरव की साहस, रक्षा व विघ्न-निवारण हेतु सम्पूर्ण आरती।
बटुक भैरव, भगवान शिव के उग्र स्वरूप भैरव के बाल (छोटे) एवं सौम्य किंतु अत्यंत रक्षक रूप हैं। उन्हें व्यापक रूप से क्षेत्रपाल तथा नकारात्मक शक्तियों, भय व अन्याय से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। भक्त उनसे साहस, सुरक्षा व शीघ्र विघ्न-निवारण की कामना करते हैं।
सम्पूर्ण बटुक भैरव आरती (देवनागरी)
ॐ जय बटुक भैरव, स्वामी जय बटुक भैरव भोले शंकर के तुम, बाल स्वरूप कहाए ॐ जय बटुक भैरव
काल भैरव के छोटे, प्यारे तुम बालक भक्तों की रक्षा करते, बनकर क्षेत्रपालक ॐ जय बटुक भैरव
श्वेत वर्ण तन सोहे, बाल रूप निराला हाथ लिए डमरू त्रिशूल, कर में शोभे प्याला ॐ जय बटुक भैरव
भय शोक सभी हरते, दुष्टन को मारो भक्त जनों की विपदा, हे प्रभु सब टारो ॐ जय बटुक भैरव
काल बाधा टल जाए, जो तुमको ध्यावे संकट में रक्षक बनकर, तुरंत सहायता पावे ॐ जय बटुक भैरव
काशी क्षेत्र के रक्षक, तुम भैरव नाथा सब देवों में तुम ही, कहलाओ काल के त्राता ॐ जय बटुक भैरव
ॐ जय बटुक भैरव, स्वामी जय बटुक भैरव जो यह आरती गावे, पावे शुभ फल भारी ॐ जय बटुक भैरव
अर्थ
आरती में बटुक भैरव को भोले शंकर के बाल-स्वरूप, काल भैरव के छोटे व सौम्य रूप के रूप में नमन किया गया है, जो अपने भक्तों के लिए कठोर क्षेत्रपाल की भाँति रक्षक बनते हैं। उनके श्वेत वर्ण, अनोखे बाल-रूप तथा हाथों में धारण डमरू, त्रिशूल व कपाल का वर्णन है।
भक्त उनसे भय, शोक दूर करने तथा दुष्टों का नाश करने की प्रार्थना करते हैं, ताकि हर विपदा में रक्षा हो। उन्हें काशी क्षेत्र का रक्षक बताया गया है, जहाँ उन्हें कोतवाल के रूप में पूजा जाता है, तथा कहा जाता है कि संकट में सच्चे मन से स्मरण करने वाले भक्त की वे तुरंत सहायता करते हैं, विशेषकर अकाल मृत्यु अथवा काल-बाधा को टालने में।
बटुक भैरव की पूजा क्यों की जाती है
बटुक भैरव की पूजा नकारात्मक शक्तियों, नज़र दोष, अप्रत्याशित दुर्घटनाओं, कानूनी परेशानियों तथा हर प्रकार के भय से रक्षा हेतु की जाती है। कालभैरव के अधिक उग्र स्वरूप की तुलना में बटुक भैरव का बाल-स्वरूप अधिक सुलभ माना जाता है — नए घर में प्रवेश, नए कार्य के आरंभ अथवा बच्चों व परिवार की सुरक्षा हेतु प्रायः उन्हें सबसे पहले पूजा जाता है, क्योंकि उनका बाल-रूप शुभ व दैनिक आवश्यकताओं हेतु सौम्य माना जाता है।
विधि और समय
उत्तम दिन: रविवार व मंगलवार विशेष शुभ माने जाते हैं, साथ ही प्रत्येक पक्ष की अष्टमी, विशेषकर कालभैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी)।
उत्तम समय: संध्या काल अथवा गहन साधना हेतु निशीथ काल (मध्यरात्रि), यद्यपि आरती श्रद्धापूर्वक किसी भी समय की जा सकती है।
विधि: बटुक भैरव की प्रतिमा के समक्ष सरसों अथवा तिल के तेल का दीपक जलाएं। लाल पुष्प, सिंदूर तथा सामान्य नैवेद्य (कुछ परंपराओं में उड़द दाल की सामग्री अथवा जलेबी) अर्पित करें। हाथ जोड़कर आरती पढ़ें तथा दक्षिणावर्त दिशा में दीपक घुमाकर आरती उतारें। इस दिन कई भक्त काले कुत्ते को भोजन कराते हैं, क्योंकि कुत्ता भैरव का वाहन माना जाता है और उन्हें अत्यंत प्रिय है।
बटुक भैरव आरती के लाभ
नियमित पाठ से साहस बढ़ता है व अकारण भय दूर होता है, नकारात्मक शक्तियों व नज़र दोष से रक्षा होती है, कानूनी अथवा प्रशासनिक बाधाएं दूर होने में सहायता मिलती है, तथा आपातकाल में सुरक्षा व शीघ्र दैवीय सहायता का भाव जागृत होता है।
करणीय और अकरणीय
बटुक भैरव के प्रति भय के बजाय सम्मान व श्रद्धा से भक्ति करें — उनका बाल-रूप सुलभ व रक्षक कृपा का प्रतीक है। पूजा को सरल, विनम्र व निरंतर रखें।
उनकी पूजा अथवा किसी भैरव साधना का प्रयोग किसी को हानि पहुँचाने अथवा प्रतिशोध हेतु न करें; यह उस धार्मिक भाव के विपरीत है जिसके साथ उन्हें आवाहित किया जाता है। बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के उन्नत भैरव साधनाएं न करें, क्योंकि गहन उपासना हेतु उचित दीक्षा आवश्यक होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: बटुक भैरव, कालभैरव से किस प्रकार भिन्न हैं? उत्तर: बटुक भैरव भैरव का युवा, सौम्य व अधिक सुलभ स्वरूप हैं, जबकि कालभैरव उनका उग्र, परिपक्व स्वरूप है जो काल व अहंकार-नाश से जुड़ा है; दोनों ही भगवान शिव की रक्षक शक्ति के स्वरूप हैं।
प्रश्न: क्या बटुक भैरव आरती घर पर की जा सकती है? उत्तर: हाँ, कोई भी भक्त इसे घर पर सामान्य दीपक व पुष्प अर्पण के साथ पढ़ सकता है; दैनिक आरती हेतु विस्तृत अनुष्ठान अनिवार्य नहीं हैं।
प्रश्न: बटुक भैरव की पूजा किसे करनी चाहिए? उत्तर: सुरक्षा, साहस अथवा भय, नकारात्मक शक्ति व बाधाओं से मुक्ति चाहने वाला कोई भी व्यक्ति उनकी पूजा कर सकता है, तथा कानूनी, सुरक्षा या अस्पष्ट परेशानियों से जूझ रहे लोगों को विशेष रूप से लाभ मिलता है।
संक्षिप्त मार्गदर्शिका
प्रारंभ से पहले
मंत्र
Shiva mantra
Om Namah Shivaya
Chant with a quiet mind, especially on Monday, Pradosh, or during Shiva puja.
भाव
भक्त जिन आशीर्वादों की प्रार्थना करते हैं
प्रश्न-उत्तर
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
बटुक भैरव, कालभैरव से कैसे भिन्न हैं?
बटुक भैरव सौम्य, सुलभ बाल-स्वरूप हैं, कालभैरव उग्र स्वरूप; दोनों शिव की रक्षक शक्ति हैं।
क्या आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ, सामान्य दीपक व पुष्प अर्पण से घर पर की जा सकती है।
बटुक भैरव की पूजा किसे करनी चाहिए?
सुरक्षा, साहस अथवा भय-निवारण चाहने वाला कोई भी व्यक्ति।
रक्षा व साहस चाहिए?
विधिवत पूजा द्वारा बटुक भैरव की रक्षक कृपा प्राप्त करें और सुरक्षा, साहस व विघ्न-निवारण पाएं।







